भारत-अमरीका के बीच नौसैनिक अभ्यास

अंडमान एवं निकोबार द्वीपों में तटों से दूर भारत ने अमरीकी नौसेना के साथ एक साझा नौसैनिक अभ्यास किया| अमरीका के साथ हुए अभ्यास को पैस्सेक्स या पासिंग अभ्यास नाम दिया गया| इसमें ज़मीनी कार्रवाई, निगरानी तथा दो नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता को नियंत्रित करने के लिए पनडुब्बी-रोधी क़वायद तथा श्रेष्ठ अभ्यासों को साझा करने जैसे भिन्न तरह के समन्वित अभ्यास शामिल किए गए| हिन्द महासागर में चीन की बढ़ी हुई उपस्थिती को ध्यान में रखते हुए, यह विकास महत्वपूर्ण है| 

मलक्का जलडमरुमध्य की अनदेखी करनेवाले चीन समेत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के संकटपूर्ण समुद्रीमार्ग से संबन्धित एक समुद्री क्षेत्र में बंगाल की खाड़ी में अभ्यासों का संचालन बहुत ही महत्वपूर्ण है| इन अभ्यासों में चार नौसैनिक जहाज़ शामिल किए गए तथा एक परमाणु शक्तिसम्पन्न युद्ध पोत यू॰एस॰एस॰एस॰ निमित्ज़ समेत अमरीकी बेड़े से इन जहाज़ों का संचालन किया गया| ध्यातव्य है कि ये युद्धक बेड़े दक्षिण चीन सागर में “फ़्रीडम ऑफ़ नेविगेशन” अभियानों को संचालित करते रहे हैं| यह अभ्यास ठीक उसी समय पर हुआ, जब चीन विवादास्पद दक्षिण चीन सागर के निकट अपना ख़ुद का सैन्य अभ्यास कर रहा है| 

लद्दाख क्षेत्र में नाटकीय रूप से झड़प के बढ्ने के बाद, भारत तथा चीन के बीच सीमा पर व्याप्त तनावों के कारण किसी भी प्रकार के कार्य को अंजाम देने के लिए, हिन्द महासागर में भारतीय नौसेना एक परिचालन एलर्ट पर रही है| अपने अभियान आधारित तैनाती के तहत चोक बिन्दु तथा संपर्क के संकटपूर्ण समुद्री मार्गों पर भारत ने युद्ध पोतों को तैनात किया है तथा इन जहाज़ों को किसी भी अभियान के लिए भेजा जा सकता है| समुद्री डकैती-रोधी गश्ती के नाम पर विगत कुछ वर्षों से चीनी नौसेनाओं की उपस्थिती बढ्ने के कारण, भारतीय नौसेना हिन्द महासागर की गतिविधियों पर निकटता से नज़र रख रही है| 2017 में, हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका के जिबूती में चीन ने विदेश में अपने पहले सैन्य ठिकाने का उदघाटन किया|

भारत अंडमान एवं निकोबार द्वीप में अपनी मूलभूत संरचना को दुरुस्त कर रहा है तथा भारतीय सेना की अंडमान एवं निकोबार कमांड में अपनी सुविधाओं को भी उन्नत कर रहा है| वास्तविक नियंत्रण रेखा (एल॰ए॰सी॰) पर बढ़े तनावों के बीच शक्ति प्रदर्शन के अंतर्गत सामरिक कार निकोबार हवाई ठिकाने पर भारतीय वायु सेना ने आधे स्क्वाड्रन अर्थात 8 से 10 विमानों को तैनात किया है| 

गत महीने, मलक्का जलडमरुमध्य के निकट भारत तथा जापान के बीच हुए इसी तरह के एक अभ्यास के बाद, अमरीका के साथ यह नौसैनिक अभ्यास हुआ| भारत, अमरीका तथा जापान इस क्षेत्र के क़रीबी नौसैनिक सहयोगी हैं तथा ये मालाबार नौसैनिक अभ्यास समेत साझा अभ्यासों में नियमित रूप से भागीदारी करते हैं| भविष्य में त्रिपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों में ऑस्ट्रेलिया की भागीदारी करने की संभावना के साथ, एक उन्मुक्त, समेकित तथा खुले हिन्द-प्रशांत के लिए क़्वाड यानि चतुभुज के सभी चार देश पहली बार अभ्यासों में भागीदारी करेंगे| पहली बार इस क्षेत्रीय समूह के सभी सदस्य सैन्य स्तर पर जुड़ेंगे| चीन इस समूह के प्रति चौकन्ना है| सूनामी की घटना के बाद हिन्द-प्रशांत में राष्ट्रों को मदद देने के लिए 2004 में इस समूह का गठन किया गया था तथा 2017 में इसे पुनः प्रचलित किया गया| 2019 में चार देशों के मंच का मंत्री स्तर पर उन्नत किए जाने के बाद, पेईचिंग भी घटनाक्रमों पर नज़र रख रहा है| 

इसी दौरान, अमरीकी रक्षा मंत्री, मार्क एस्पर ने कहा कि ऐसे समय में जब चीन “व्यवस्थित रूप से नियम तोड़” रहा हो तथा बल प्रयोग कर रहा हो, ठीक इसी समय अमरीका “21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण रक्षा सम्बन्धों में से एक” के रूप में भारत के साथ अपने बढ़ते सुरक्षा सहयोग को देख रहा है| उन्होंने कहा कि यू॰एस॰एस॰ निमित्ज़ के नेतृत्व में भारतीय नौसेना के युद्ध पोतों तथा एक अमरीकी नौसेना के वाहक हमलावर समूह के बीच हिन्द महासागर में साझा नौसैनिक अभ्यास एक स्वतंत्र तथा खुले हिन्द-प्रशांत के समर्थन में नौसैनिक सहयोग को बढ़ावा देने के प्रति दोनों देशों की साझा वचनबद्धता को दर्शाता है |

रक्षा मंत्री, एस्पर सामरिक अध्ययन के अंतर्राष्ट्रीय संस्थान (आई॰आई॰एस॰एस॰) द्वारा आयोजित एक वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान, हिन्द-प्रशांत की सुरक्षा के प्रति अमरीका की रणनीति तथा दृष्टिकोण पर बोल रहे थे| विशेष रूप से, दक्षिण चीन सागर तथा दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान) को लेकर, श्री एस्पर ने चीन द्वारा नियम तोड़े जाने तथा बल प्रयोग करने संबंधी कई उदाहरण दिये|





आलेख – डॉ॰ स्तुति बैनर्जी, अमरीकी मामलों की सामरिक विश्लेषक 

अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी

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