भारत-अमरीका के व्यापारिक सम्बन्धों को सुदृढ़ बनाना

प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने मूलभूत संरचना, एविएशन, रक्षा तथा अन्तरिक्ष अनुसंधान समेत भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अमरीकी कंपनियों से निवेश करने को कहा है| वे “इंडिया आइडियाज़ शिखर सम्मेलन” को संबोधित कर रहे थे| इस शिखर सम्मेलन की मेज़बानी अमरीका-भारत व्यवसाय परिषद ने की| इस शिखर सम्मेलन की विषय-वस्तु “एक बेहतर भविष्य का निर्माण” थी| कोविड-19 के बाद रिकवरी एजेंडा के रूप में इंडिया आइडियाज़ शिखर सम्मेलन का उद्देश्य भारत में विदेशी पूंजी को आकर्षित करना है|

प्रधानमंत्री ने बल देते हुए कहा कि 2020-21 की पहली तिमाही में भारत को विदेशी निवेश में 20 बिलियन डॉलर मिले हैं| उन्होंने यह भी कहा कि भारत की “व्यापार करने की सुगमता” के स्तर में सुधार हुआ है| निवेश आशावाद भारत की मुख्य व्यवसाय रेटिंग्स में और अधिक सुधार को निर्धारित कर सकता है| भारत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ़॰डी॰आई॰) में काफ़ी आगे निकाल चुका है| एफ़॰आई॰आई॰ पोर्टफ़ोलियो निवेश से एफ़॰डी॰आई॰ विदेशी निवेश में जाना एक अच्छी प्रवृत्ति है, क्योंकि विदेशी पोर्टफ़ोलियो निवेश की तुलना में एफ़॰डी॰आई॰ अपेक्षाकृत एक स्थिर निवेश है| एफ़॰आई॰आई॰ “हॉट मनी” है तथा यह ब्याज दर के अंतर पर आधारित विदेशी पूंजी की उड़ान की वजह बन सकती है| हॉट मनी हमेशा ही उच्च ब्याज दर देती है|

प्रधानमंत्री ने कहा कि “राष्ट्र के व्यापार के अवसरों में वृद्धि, अधिक खुलेपन के साथ वैश्विक एकीकरण में एक वृद्धि, स्तर की पेशकश करनेवाले एक बाज़ार की पहुँच के साथ आपकी प्रतिस्पर्धा में एक वृद्धि का तात्पर्य भारत के उत्थान से है, जिस पर आप विश्वास कर सकते हैं और कुशल मानव संसाधनों की उपलबद्धता के साथ निवेश पर आपके लाभ में वृद्धि से भी इसका संबंध है|” उन्होंने 5जी की फ़्रंटियर प्रौद्योगिकी, बिग-डेटा वैश्लेषिकी, क्वान्टम कम्प्यूटिंग, ब्लॉक-चेन तथा इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स में निवेश की संभावनाओं का भी उल्लेख किया| 

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत तथा अमरीका दो जीवंत लोकतन्त्र उसी तरह हैं, जैसे ये स्वाभाविक द्विपक्षीय साझेदार हैं| अमरीका-भारत की साझेदारी कोविड-19 महामारी से तेज़ी से उबरने के लिए विश्व को मदद करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है|

इस महामारी के दौरान, वैश्विक आर्थिक लचीलेपन को घरेलू आर्थिक क्षमताओं के माध्यम से कुशलतापूर्वक और बेहतर तरीक़े से हासिल किया जा सकता है| प्रधानमंत्री ने “आत्मनिर्भर भारत” के आदर्श में सेल्फ़-रिलायंट भारत के महत्व पर बल दिया| महामारी के बाद अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की विविधता तथा वित्तीय बाज़ारों की मज़बूती वैश्विक लचीलेपन के अन्य निर्धारक हैं| नीति की अनिश्चितता प्रगति को धीमी कर सकती है|

खाद्य प्रसंस्करण में एफ़॰डी॰आई॰, जैविक उत्पाद तथा मछली पालन कृषि के निवेश विकल्पों में शामिल हैं| स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के निवेश-फ़ार्मा सेक्टर में भारत तथा अमरीका सुदृढ़ व्यवसायिक सम्बन्धों को निर्मित कर रहा है| ऊर्जा क्षेत्र में, भारत गैस-आधारित एक अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित हो रहा है| स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े निवेश के अवसर होंगे| अमरीका-भारत के व्यवसायिक निवेश के अन्य संभावित क्षेत्र में करोड़ों लोगों के लिए आवास निर्माण, सड़कों, राजमार्गों तथा बन्दरगाहों के निर्माण समेत मूलभूत संरचना का निर्माण किया जाना शामिल है|

विशाल संभावित विकास के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में नागर विमानन की भी पहचान की गई है| प्रधानमंत्री ने कहा कि आनेवाले आठ वर्षों में विमान यात्रियों की संख्या दोगुने से अधिक होने की आशा की जा रही है| अगले एक दशक में शीर्ष भारतीय एयरलाइंस एक हज़ार से अधिक नए विमान को शामिल करने की योजना बना रही हैं| रक्षा तथा अन्तरिक्ष क्षेत्र में, भारत ने एफ़॰डी॰आई॰ की सीमा को संशोधित करके 74 प्रतिशत कर दिया है| बीमा क्षेत्र में, एफ़॰डी॰आई॰ की उच्चतम सीमा 100 प्रतिशत है| भारत ने स्वास्थ्य आश्वासन योजना-आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री फ़सल बीमा योजना तथा जन सुरक्षा और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं समेत कई प्रकार की बीमा योजना की शुरुआत की है| प्रधानमंत्री का मानना है कि स्वास्थ्य, कृषि, व्यवसाय तथा जीवन बीमा, बीमा के नए मार्ग हैं| आंकड़े बताते हैं कि भारत में एफ़॰डी॰आई॰ अंतर्वाह उच्चतम स्तर तक पहुँच चुका है| इसमें गत वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है|

कोविड-19 महामारी के बीच, भारत ने विदेशी निवेश को आकर्षित करना शुरू कर दिया है| ध्यान देनेवाली बात यह है कि विदेशी निवेश के साथ घरेलू निजी कॉर्पोरेट निवेश को भारत में सशक्त बनाने की अत्यधिक आवश्यकता है| प्रयोगसिद्ध प्रमाण दिखाता है कि सार्वजनिक मूलभूत संरचना निवेश का क्षेत्र एक प्रमुख निर्धारक है, जो निजी निवेश को आकर्षित करता है| प्रधानमंत्री ने मूलभूत संरचना निवेश को सशक्त बनाने पर बल दिया| इसे हासिल करने के लिए मूलभूत संरचना के गतिरोध से निपटना, नीति की निश्चितता को सुनिश्चित करना तथा वृहद-आर्थिक नीति समन्वय बहुत अधिक आवश्यक है| महामारी काल के बाद, आर्थिक रिकवरी को सुनिश्चित करने के लिए मुख्य क्षेत्रों में निवेश सचमुच में बहुत आवश्यक है|




आलेख – डॉ॰ लेखा एस चक्रवर्ती, प्रोफ़ेसर, एन॰आई॰पी॰एफ़॰पी॰ एवं अनुसंधान संकाय सहयोगी, बार्ड कॉलेज लेवी अर्थशास्त्र संस्थान, न्यू यॉर्क 

अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी

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