प्रधानमंत्री ने आर्थिक गतिविधियों में नवोन्मेष का आह्वान किया

ऑल इंडिया रेडियो नेटवर्क पर अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम, “मन की बात” में प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने भारत की जनता को संबोधित किया| प्रधानमंत्री ने कहा कि 26 जुलाई एक बहुत ही विशेष दिन है| आज से 21 वर्ष पहले, हमारी सेना ने करगिल युद्ध में जीत का झण्डा फहराया| जिन हालातों में करगिल का युद्ध हुआ, भारत उन्हें कभी नहीं भूल सकता है| अपने देश के आंतरिक झगड़ों से ध्यान हटाने के लिए, भारतीय ज़मीन पर धोखे से घुसपैठ करके पाकिस्तान ने इस मुसीबत की शुरुआत की थी| तब भारत पाकिस्तान के साथ अच्छे सम्बन्धों को प्रोत्साहित देने संबंधी प्रयास करने की प्रक्रिया में था|

प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध के समय में हम जो कुछ भी कहते हैं या करते हैं, उसका सीमा पर सदा मुस्तैद रहनेवाले हमारे सैनिकों तथा उनके परिवार के मनोबल पर बहुत गहरा असर होता है| हमें इसे कभी नहीं भूलना चाहिए| इसलिए हमारे आचरण, हमारा व्यवहार, हमारा भाषण, हमारे वक्तव्य, हमारी सीमाएं, हमारा उद्देश्य, हम जो कुछ भी करते हैं और कहते हैं, वो विशेष रूप से हमारी सेनाओं के मनोबल तथा सम्मान को बढ़ाने में सहायक होने चाहिए|

प्रधानमंत्री का मानना है कि पिछले कई महीनों से देश जिस तरह से एकजुट होकर कोरोनावायरस के विरुद्ध लड़ाई लड़ रहा है, उस भावना ने कई आशंकाओं को ग़लत साबित कर दिया है| आज अन्य देशों की तुलना में हमारे देश में संक्रमण मुक्त होने की दर बेहतर है| अत्यधिक देशों की तुलना में हमारे देश में कोरोना वायरस के कारण मरनेवालों की दर बहुत कम है| निःसन्देह, एक भी मृत्यु दुःखद होती है, लेकिन भारत अपने करोड़ों लोगों के जीवन को बचाने में सफल भी रहा है| बहरहाल, हमें अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है| हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कोरोना आज भी उतना ही घातक है, जितना यह अपने प्रसार की शुरुआत में था| इसलिए, हमें पूरी तरह से सावधान रहना चाहिए|

श्री मोदी ने जम्मू तथा कश्मीर के गंदेरबल की ज़ैतूना बेग़म की सेवाओं को स्मरण किया| उन्होंने निर्णय लिया है कि उनकी पंचायत कोरोना के विरुद्ध लड़ाई लड़ेगी तथा इसके साथ यह आय के अवसर भी उत्पन्न करेगी| उन्होंने अपने आस-पास में निःशुल्क मास्क तथा राशन वितरित किए| साथ ही उन्होंने फ़सल के बीज तथा सेब के छोटे पौधे वितरित किए, ताकि लोगों को कृषि और बागवानी में किसी तरह की असुविधा ना हो|

प्रधानमंत्री ने कहा कि सही तथा सकारात्मक रवैया कष्टदायक समय को अवसरों में बदलने में हमेशा ही कारगर साबित होता है और इससे विकास को बढ़ावा मिलता है| कोरोना के दौरान, हमने देखा है कि अपनी प्रतिभा तथा दक्षता के बल पर कैसे हमारे देश के युवा तथा महिलाओं ने नए प्रयोग किए हैं| बिहार में, महिलाओं के कई स्व-सहायता समूह मधुबनी कला के साथ मास्क बनाना शुरू कर चुके हैं और उनका यह प्रयास बहुत लोकप्रिय हो रहा है| स्वास्थ्य की रक्षा करने के अलावा, मधुबनी मास्क एक क्षेत्रीय परंपरा का द्योतक है, इससे आजीविका के अवसर भी सृजित हो रहे हैं|

बांस का प्रयोग करके, त्रिपुरा, मणिपुर तथा असम के शिल्पकार उच्च गुणवत्ता की पानी की बोतल तथा टिफ़िन-बॉक्स बनाना शुरू कर चुके हैं| एक नया उत्पाद होने के साथ ये पर्यावरण के अनुकूल भी हैं|

श्री मोदी ने लोगों को नए तरीक़े से सोचने के लिए कहा| बिहार के युवाओं ने रास्ता दिखा दिया है| पहले वे सामान्य नौकरी किए करते थे| एक दिन उन्होंने मोती की खेती करने का निर्णय लिया| अपने क्षेत्र में, लोगों को इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं थी, लेकिन युवाओं के इस समूह ने सभी आवश्यक सूचना एकत्रित की और फिर वे जयपुर और भुवनेश्वर जाकर प्रशिक्षित हुए तथा अपने गाँव लौटकर मोती की खेती की शुरुआत की| आज, वे इसके ज़रिए न सिर्फ़ आय कर रहे हैं, बल्कि अन्य राज्यों से वापस लौटे मुज़फ्फ़रपुर, बेगुसराइ तथा पटना के प्रवासी श्रमिकों को भी प्रशिक्षण देना शुरू कर चुके हैं| बहुत से लोगों के लिए, इसने आत्म-निर्भर बनने के नए मार्ग को खोल दिया है|

श्री मोदी ने कहा कि 7 अगस्त राष्ट्रीय हथकरघा दिवस है| भारत का हथकरघा तथा हमारे हस्तशिल्प का सैंकड़ों वर्ष पुराना एक गौरवशाली इतिहास है| अधिक से अधिक मात्रा में भारतीय हथकरघा तथा हस्तशिल्प को प्रयोग में लाने का हमें प्रयास करना चाहिए और इसके प्रयोग के लिए अधिक से अधिक लोगों को प्रेरित किया जाना चाहिए|

प्रधानमंत्री ने सूरीनाम के साथ भारत के निकटतम सम्बन्धों को स्मरण किया| सैंकड़ों वर्षों से अधिक समय पहले, भारत के लोग वहाँ गए और वहाँ अपने घर बनाए| आज, सूरीनाम की एक-चौथाई से अधिक आबादी भारतीय मूल की है| “सरनामी” वहाँ की आम भाषाओं में से एक है, यह भोजपुरी की एक उपबोली है| भारत इन सांस्कृतिक सम्बन्धों के प्रति गर्व का अनुभव करता है|

हाल ही में, चंद्रिका प्रसाद संतोखी सूरीनाम के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं| अपने शपथ ग्रहण समारोह में, श्री संतोखी ने वैदिक भजन सुनाए, उन्होंने संस्कृत भाषा में भी सम्बोधन किया| प्रधानमंत्री ने श्री चंद्रिका प्रसाद संतोखी को बधाई दी तथा उन्हें 130 करोड़ भारतीयों की ओर से शुभकामनाएं दीं|

आलेख – कौशिक रॉय, आकाशवाणी के समाचार विश्लेषक

अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी

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