राफ़ेल: खेल पलटनेवाला लड़ाकू विमान
अंबाला वायुसेना स्टेशन पर पाँच लड़ाकू विमान, राफ़ेल की पहली खेप का आगमन निश्चित रूप से भारतीय वायु सेना (आई॰ए॰एफ़॰) की युद्धक क्षमताओं में एक बड़ी बढ़ोतरी है| इस समय, अंबाला हवाई अड्डे पर रणनीतिक रूप से स्थित 17 “गोल्डेन एरोज़” की शुरुआत अपने आप में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पश्चिमी मोर्चे से सिर्फ़ 250 किलोमीटर की दूरी पर वायु सेना की परिचालनगत तैयारी का संकेत है| फ़्रांसीसी विमानन कंपनी दसॉल्ट ने इन लड़ाकू विमानों को बनाया है| इन विमानों ने दक्षिणी फ़्रांस के बोर्डोक के मेरिग्नियाक हवाई अड्डे से उड़ान भरी तथा हवा से हवा में फिर से ईंधन भरकर भारत पहुँचने से पहले, इन विमानों ने संयुक्त अरब अमीरात के फ़्रांसीसी हवाई अड्डे पर एक बार रुककर 7,000 किलोमीटर की दूरी तय की|
आई॰ए॰एफ़॰ का मानना है कि राफ़ेल “खेल पलटनेवाला” विमान है| राफ़ेल युद्धक विमान से भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर आकाशीय शक्ति के समीकरण को फिर से स्थापित करने की आशा की जा रही है| वास्तव में, आकाशीय शक्ति भविष्य के युद्ध क्षेत्रों में निर्णायक कारक होगी| कार्यसाधकता, लंबी पहुँच तथा स्टैंड-ऑफ़ रेंज पर सटीक हथियार वितरण आकाशीय शक्ति को विश्वसनीय अवरोधक क्षमता देती हैं| राफ़ेल विमानों की परिचालन संबंधी योग्यता पर विचार करके, यह बढ़ा-चढ़ाकर कहना नहीं होगा कि ये विमान आई॰ए॰एफ़॰ की शक्ति को कई गुना बढ़ाने के लिए अति-आवश्यक बल प्रदान करेंगे|
दो दशकों से, रूसी सुखोई एस॰यू॰-30एम॰के॰आईज़ आई॰ए॰एफ़॰ युद्धक फ़्लीट को मुख्य सहारा दे रहा है तथा वायु सेना दो सीटोंवाले, दो इंजनवाले 272 मल्टिरोल युद्धक विमानों को उड़ाती है| हवा में छोड़े जानेवाले सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज़ प्रक्षेपास्त्र को ढोने के लिए इनमें से कुछ विमानों में परिवर्तन लाया गया है| घातक हथियारों से लैस राफ़ेल विमानों का समावेशन वायु सेना की परिचालन क्षमता में बढ़ोतरी करेगा| हवा में उड़ान भरते प्रत्येक राफ़ेल का मुक़ाबला करने के लिए दुश्मनों को कम से कम दो एफ़-16 विमान उड़ाने होंगे| रूस से होनेवाली एस400 वायु रक्षक प्रणाली की सुपुर्दगी के साथ मिलकर, राफ़ेल इस उप-महद्वीप में भारत की आकाशीय श्रेष्ठता में बढ़ोतरी करेंगे|
राफ़ेल के आकाशीय संचालनों में कोई भी शत्रु दखल नहीं दे सकता है| इज़रायल के हेलमेट में लगे डिस्प्ले, रेडार संकेत रिसीवर, लो-बैंडवाले जैमर, दस घंटे की उड़ान के दौरान डेटा-रेकोर्डिंग तथा ट्रेकिंग प्रणाली समेत भारत को ध्यान में रखते हुए, कई विशेष सुधार के साथ राफ़ेल विमान में परिवर्तन किए गए हैं| ये विमान यूरोपीय मिसाइल मेकर एम॰बी॰डी॰एज़ की नज़र ना आनेवाली और हवा से हवा में मार करनेवाली मिसाइल, “मेटियोर” तथा हवा से ज़मीन में मार करनेवाली क्रूज़ मिसाइल, “स्कैल्प” समेत उच्च प्रभाव की मिसाइलों की एक श्रृंखला को ढोने में सक्षम हैं| यह पूरी तरह से एक बहुमुखी विमान है| ये विमान आकाशीय श्रेष्ठता तथा आकाशीय रक्षा, निकटतम एयर समर्थन, टोही तथा परमाणु अवरोधक प्राप्त करने संबंधी सभी युद्धक वैमानिकी अभियानों को अंजाम दे सकते हैं|
फ़्रांस तथा मिस्र समेत सभी राष्ट्र राफ़ेल विमानों का परिचालन करते हैं| भारत को जो विमान मिले हैं, उनमें विशेष आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिक उन्नत और अधिक परिवर्तन लाये गए हैं| हेलमेट में लगी दृष्टि तथा लक्ष्यीकरण प्रणाली पायलट को सामने आते हथियारों को मार गिराने के लिए बिजली की तरह की तेज़ीवाली योग्यता देती है| घातक सटीकता के साथ किसी भी हमले के प्रति तीव्र प्रतिक्रिया देने संबंधी एक “कोल्ड स्टार्ट” पर इन विमानों में काफ़ी ऊंचाई पर स्थित हवाई अड्डे से भी उड़ान भरने की योग्यता है| भारतीय वायु सेना युद्धक विमानों की घातकता को बढ़ाने के लिए राफ़ेल में नई पीढ़ी की हवा से ज़मीन में मार करनेवाली सटीक-निर्देशित मिसाइल प्रणाली “हैमर” को जोड़ने पर भी विचार कर रही है|
इसे ध्यान में रखा जाना चाहिए कि भारत ने 10 युद्धक विमानों की सुपुर्दगी को लिया है| पाँच विमान पायलटों के प्रशिक्षण तथा रख-रखाव दल के लिए फ़्रांस में हैं| सितंबर 2016 में हस्ताक्षरित 59,000 करोड़ के अंतर-सरकारी समझौते के अंतर्गत ये 13 विमान भारत विशेष संवर्धन (आई॰एस॰ई॰) के साथ उड़ान भरने की स्थिति में फ़्रांस से अनुबंधित 36 राफ़ेल मल्टी-रोल युद्धक विमानों के हिस्से में आते हैं| पहला राफ़ेल विमान गत वर्ष अक्तूबर महीने में रक्षा मंत्री, राजनाथ सिंह की फ़्रांस यात्रा के दौरान, आई॰ए॰एफ़॰ को सुपुर्द किया गया था| सभी 36 राफ़ेल को 2021 के अंत तक सुपुर्द करने पर बात तय हुई है| विमान का पहला स्क्वाड्रन अंबाला वायु सेना स्टेशन पर तैनात किया जाएगा, जबकि राफ़ेल के दूसरे स्क्वाड्रन की तैनाती पश्चिम बंगाल के हाशिमारा एयर बेस पर की जाएगी| पश्चिमी तथा पूर्वी दोनों ही हवाई ठिकानों के प्रत्येक मोर्चे पर 18-18 विमान तैनात किए जाएँगे| इसे कहने की आवश्यकता नहीं है कि दोनों ही स्क्वाड्रन मात्रात्मक तथा गुणात्मक क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि करेंगे, जबकि दोनों ही मोर्चों में अपने विरोधियों से निपटने के लिए आई॰ए॰एफ़॰ के पास यह क्षमता पहले से ही है|
राफ़ेल विमानों का आगमन भारतीय वायु सेना से जुड़नेवाले फ़्रांस के युद्धक विमानों की एक अन्य शृंखला को चिन्हित करता है| यह एक ऐसी विरासत है, जिसकी शुरुआत 1953 में तूफ़ानी युद्धक की आपूर्ति तथा बाद में 2000 में मिराज की आपूर्ति के साथ हुई थी| राफ़ेल का समावेशन भारत तथा फ़्रांस के बीच की सामरिक साझेदारी को और अधिक सशक्त बनाएगा|
आलेख – उत्तम कुमार बिस्वास, रक्षा विश्लेषक
अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी
आई॰ए॰एफ़॰ का मानना है कि राफ़ेल “खेल पलटनेवाला” विमान है| राफ़ेल युद्धक विमान से भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर आकाशीय शक्ति के समीकरण को फिर से स्थापित करने की आशा की जा रही है| वास्तव में, आकाशीय शक्ति भविष्य के युद्ध क्षेत्रों में निर्णायक कारक होगी| कार्यसाधकता, लंबी पहुँच तथा स्टैंड-ऑफ़ रेंज पर सटीक हथियार वितरण आकाशीय शक्ति को विश्वसनीय अवरोधक क्षमता देती हैं| राफ़ेल विमानों की परिचालन संबंधी योग्यता पर विचार करके, यह बढ़ा-चढ़ाकर कहना नहीं होगा कि ये विमान आई॰ए॰एफ़॰ की शक्ति को कई गुना बढ़ाने के लिए अति-आवश्यक बल प्रदान करेंगे|
दो दशकों से, रूसी सुखोई एस॰यू॰-30एम॰के॰आईज़ आई॰ए॰एफ़॰ युद्धक फ़्लीट को मुख्य सहारा दे रहा है तथा वायु सेना दो सीटोंवाले, दो इंजनवाले 272 मल्टिरोल युद्धक विमानों को उड़ाती है| हवा में छोड़े जानेवाले सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज़ प्रक्षेपास्त्र को ढोने के लिए इनमें से कुछ विमानों में परिवर्तन लाया गया है| घातक हथियारों से लैस राफ़ेल विमानों का समावेशन वायु सेना की परिचालन क्षमता में बढ़ोतरी करेगा| हवा में उड़ान भरते प्रत्येक राफ़ेल का मुक़ाबला करने के लिए दुश्मनों को कम से कम दो एफ़-16 विमान उड़ाने होंगे| रूस से होनेवाली एस400 वायु रक्षक प्रणाली की सुपुर्दगी के साथ मिलकर, राफ़ेल इस उप-महद्वीप में भारत की आकाशीय श्रेष्ठता में बढ़ोतरी करेंगे|
राफ़ेल के आकाशीय संचालनों में कोई भी शत्रु दखल नहीं दे सकता है| इज़रायल के हेलमेट में लगे डिस्प्ले, रेडार संकेत रिसीवर, लो-बैंडवाले जैमर, दस घंटे की उड़ान के दौरान डेटा-रेकोर्डिंग तथा ट्रेकिंग प्रणाली समेत भारत को ध्यान में रखते हुए, कई विशेष सुधार के साथ राफ़ेल विमान में परिवर्तन किए गए हैं| ये विमान यूरोपीय मिसाइल मेकर एम॰बी॰डी॰एज़ की नज़र ना आनेवाली और हवा से हवा में मार करनेवाली मिसाइल, “मेटियोर” तथा हवा से ज़मीन में मार करनेवाली क्रूज़ मिसाइल, “स्कैल्प” समेत उच्च प्रभाव की मिसाइलों की एक श्रृंखला को ढोने में सक्षम हैं| यह पूरी तरह से एक बहुमुखी विमान है| ये विमान आकाशीय श्रेष्ठता तथा आकाशीय रक्षा, निकटतम एयर समर्थन, टोही तथा परमाणु अवरोधक प्राप्त करने संबंधी सभी युद्धक वैमानिकी अभियानों को अंजाम दे सकते हैं|
फ़्रांस तथा मिस्र समेत सभी राष्ट्र राफ़ेल विमानों का परिचालन करते हैं| भारत को जो विमान मिले हैं, उनमें विशेष आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिक उन्नत और अधिक परिवर्तन लाये गए हैं| हेलमेट में लगी दृष्टि तथा लक्ष्यीकरण प्रणाली पायलट को सामने आते हथियारों को मार गिराने के लिए बिजली की तरह की तेज़ीवाली योग्यता देती है| घातक सटीकता के साथ किसी भी हमले के प्रति तीव्र प्रतिक्रिया देने संबंधी एक “कोल्ड स्टार्ट” पर इन विमानों में काफ़ी ऊंचाई पर स्थित हवाई अड्डे से भी उड़ान भरने की योग्यता है| भारतीय वायु सेना युद्धक विमानों की घातकता को बढ़ाने के लिए राफ़ेल में नई पीढ़ी की हवा से ज़मीन में मार करनेवाली सटीक-निर्देशित मिसाइल प्रणाली “हैमर” को जोड़ने पर भी विचार कर रही है|
इसे ध्यान में रखा जाना चाहिए कि भारत ने 10 युद्धक विमानों की सुपुर्दगी को लिया है| पाँच विमान पायलटों के प्रशिक्षण तथा रख-रखाव दल के लिए फ़्रांस में हैं| सितंबर 2016 में हस्ताक्षरित 59,000 करोड़ के अंतर-सरकारी समझौते के अंतर्गत ये 13 विमान भारत विशेष संवर्धन (आई॰एस॰ई॰) के साथ उड़ान भरने की स्थिति में फ़्रांस से अनुबंधित 36 राफ़ेल मल्टी-रोल युद्धक विमानों के हिस्से में आते हैं| पहला राफ़ेल विमान गत वर्ष अक्तूबर महीने में रक्षा मंत्री, राजनाथ सिंह की फ़्रांस यात्रा के दौरान, आई॰ए॰एफ़॰ को सुपुर्द किया गया था| सभी 36 राफ़ेल को 2021 के अंत तक सुपुर्द करने पर बात तय हुई है| विमान का पहला स्क्वाड्रन अंबाला वायु सेना स्टेशन पर तैनात किया जाएगा, जबकि राफ़ेल के दूसरे स्क्वाड्रन की तैनाती पश्चिम बंगाल के हाशिमारा एयर बेस पर की जाएगी| पश्चिमी तथा पूर्वी दोनों ही हवाई ठिकानों के प्रत्येक मोर्चे पर 18-18 विमान तैनात किए जाएँगे| इसे कहने की आवश्यकता नहीं है कि दोनों ही स्क्वाड्रन मात्रात्मक तथा गुणात्मक क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि करेंगे, जबकि दोनों ही मोर्चों में अपने विरोधियों से निपटने के लिए आई॰ए॰एफ़॰ के पास यह क्षमता पहले से ही है|
राफ़ेल विमानों का आगमन भारतीय वायु सेना से जुड़नेवाले फ़्रांस के युद्धक विमानों की एक अन्य शृंखला को चिन्हित करता है| यह एक ऐसी विरासत है, जिसकी शुरुआत 1953 में तूफ़ानी युद्धक की आपूर्ति तथा बाद में 2000 में मिराज की आपूर्ति के साथ हुई थी| राफ़ेल का समावेशन भारत तथा फ़्रांस के बीच की सामरिक साझेदारी को और अधिक सशक्त बनाएगा|
आलेख – उत्तम कुमार बिस्वास, रक्षा विश्लेषक
अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी
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