इमरान का दु:ख : भाषण कला काम नहीं कर रही



पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, इमरान ख़ान ने 29 जून, 2020 को बलूच अलगाववादियों द्वारा कराची में पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज पर किए गए हमले के लिए भारत को दोषी ठहराने का अवसर नहीं गंवाया, मानो कोई लिखी हुई प्रतिक्रिया तैयार थी| इस हमले में चार मिलिटैंट समेत लगभग 13 लोगों की मृत्यु हो गई|

पाकिस्तान में सब कुछ के लिए भारत को दोषी ठहराना कोई आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि पाकिस्तान के गुज़रे ज़माने के प्रिय नेता ऐसा ही करते रहे हैं, विशेषकर तब, जब वे स्थिति को संभालने में असफल रहते हैं|

वास्तव में, इस हमले के कुछ दिनों पहले, पार्टी में इमरान के लेफ़्टिनेंट ने भारत द्वारा “फॉल्स फ़्लैग ऑपरेशन” को लेकर चर्चा की शुरुआत की थी और भारत-विरोधी बयानबाज़ी करके आवाज़ बुलंद कर रहे थे| ऐसा वे संभवतः इसलिए कर रहे थे कि इस प्रकार के एक हमले के लिए पाकिस्तान को तैयार किया जा सके| क्या श्री ख़ान ने भी यह नहीं कहा कि इस प्रकार की किसी घटना की सूचना एजेंसियों को पहले से ही थी| फिर पाकिस्तान की एजेंसियों ने इसे क्यों नहीं टाला, यह विचार करने योग्य एक प्रश्न है|

पिछले कुछ वर्षों में, इस प्रकार की चालबाज़ी अपनी सरकारों की असफलताओं से लोगों का ध्यान हटाने के लिए अधिकतर पाकिस्तानी नेता करते रहे हैं| इमरान ख़ान भी इससे अलग नहीं हैं| वास्तव में, भारत के विरुद्ध इस प्रकार के आधारहीन आरोप लगाते समय, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को बलूच विद्रोहियों को धन्यवाद देना चाहिए कि इन विद्रोहियों ने आज पाकिस्तान को डरानेवाले कई तरह के संकटों से जनता का ध्यान हटाने के लिए उन्हें एक बहाना दे दिया है| पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार ग्रहण करने के बाद से जन मामलों के उनकी सरकार के अयोग्य निपटारे को इसके लिए धन्यवाद दिया जाना चाहिए|

इमरान ख़ान ने घेरेबंदी में पड़े एक व्यक्ति की तरह व्यवहार करना शुरू कर दिया है| अक्सर उन्हें एक “चुने हुए” प्रधानमंत्री के रूप में पेश किया गया है| उनकी शक्ति का आधार अब जी॰एच॰क्यू॰ की साख के लिए सीमित है| यह आधार अब कमज़ोर होता हुआ जान पड़ता है|

जब श्री ख़ान सत्ता में आए, तो पाकिस्तान की राजनीति और अर्थव्यवस्था को निपटाने की उनकी शैली को कई टीकाकारों ने “भिन्न” कहकर अभिवादन किया| बहरहाल, अब वे उनके विरुद्ध हो चुके हैं| राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एन॰ए॰बी॰) के ग़लत इस्तेमाल के बावजूद, वे भ्रष्टाचारियों को न्याय के कटघरे में लाने में असफल हो चुके हैं| बल्कि, वे भ्रष्ट राजनीतिज्ञों से घिरे हुए हैं, उनमें से बहुत से नेता उनके मंत्रिमंडल में मंत्री हैं| उनके बहुत से मुखर समर्थक उनमें वही पुराने और परिचित बुराई पाते हैं, जो उनके पूर्ववर्तियों के पीड़ित होने का कारण बनी|

इन्हीं में से एक, अशरफ़ भट्टी ने कुछ समय पहले उर्दू मीडिया में एक स्तम्भ लिखा कि इमरान “पूरी तरह” से असफल हो चुके हैं तथा “पाकिस्तान” के प्रिय प्रधानमंत्री को पिछले 22 महीनों तक पाकिस्तान का समय बर्बाद करने के लिए जनता को उत्तर देना चाहिए| गत चुनावों में उनका समर्थन करनेवाले, एक अन्य लोकप्रिय टीकाकार, हसन निसार ने भी कुछ ऐसा ही लिखा है|

इमरान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इन्साफ़ (पी॰टी॰आई॰) के अत्यधिक चर्चित चेहरों में से एक, फ़वाद चौधरी ने हाल के एक साक्षात्कार में सार्वजनिक रूप से अपनी पार्टी के गंदे धब्बे को साफ़ किया| उन्होंने स्वीकार किया कि सरकार काम करने में असफल रही है तथा पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है|

इसके कुछ दिनों पहले, गठबंधन सहयोगियों में से एक, बलूच नेशनलिस्ट पार्टी-मेंगल ने इसे प्रतिशोध कहा था| इसके नेता, अख़्तर मेंगल ने बहुत से बलूच लोगों की बेहतरी की दिशा में काम करने के प्रति अपनी वचनबद्धता को पूरा नहीं कर पाने की सरकार की असफलता को लेकर अपना संत्रास व्यक्त किया था| उससे पहले कई बलूच नेताओं की तरह, अख़्तर ने लोकतान्त्रिक माध्यमों से अपने लोगों की विश्वसनीय मांगों को आगे बढ़ाने की सीमाओं को अवश्य तलाशा होगा|

पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियां ख़ान को हटाने की मांग कर रही हैं| ओसामा बिन लादेन को एक शहीद के रूप में उनका चरित्र-चित्रण करना अवचेतन मन की भावनाओं को प्रकट करने वाली उनकी एक भूल हो सकती है, जो जिहादी चरमपंथियों के लिए उनकी सहानुभूति का एक धोखा है, जिसकी विपक्षी नेताओं ने निंदा की है| ग़रीब-विरोधी और जन-विरोधी उपाय के रूप में बजट की उनकी आलोचना को बहुत से लोगों ने समर्थन दिया है| विपक्षी पार्टियां भी नेशनल एसेम्बली के अध्यक्ष के विरुद्ध विश्वास-मत की मांग कर रही हैं| आनेवाले दिनों में, विपक्षी पार्टियां अपनी स्थिति मज़बूत कर सकती हैं तथा उनके लिए और चुनौती खड़ी कर सकती हैं|

इन सब के बीच, विपक्षी नेता, शाहबाज़ शरीफ़ का इलाज करने संबंधी चीनी पेशकश को लेकर श्री ख़ान भी असहज महसूस कर रहे हैं| ध्यातव्य है कि उनमें कोरोनवायरस की पुष्टि हुई है|

अफ़वाह है कि मज़बूत सैन्य प्रतिष्ठान ज़मीन की स्थिति पर नज़र रख रहा है| आख़िरकार, सेना सार्वजनिक रूप से इमरान की असफलता के सहयोगी के रूप में देखा जाना पसंद नहीं करेगी|

इस परिदृश्य के उलट, “माइनस इमरान” सूत्र ने पाकिस्तान की मीडिया की सुर्खियों में स्थान बनाया है| एसेम्बली में श्री ख़ान का करारा जवाब यह रहा कि फिलहाल उनका कोई विकल्प नहीं है, जो आत्म-आश्वासन का एक अभ्यास हो सकता है, लेकिन, परिस्थिति पूरी तरह से उनके विरुद्ध जान पड़ती है|

आलेख – डॉ॰ अशोक बेहूरिया, दक्षिण एशिया केंद्र के वरिष्ठ फैलो एवं समन्वयक, मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान

अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी

Comments

Popular posts from this blog

भारत ने फिजी को पहुंचाई मानवीय सहायता

आत्मनिर्भर भारत में प्रवासियों की भूमिका

अरब-भारत सहयोग फोरम की बैठक