भारत-भूटान सम्बन्धों में नई ऊँचाइयाँ



600 मेगा वॉट वाली खोलोंग्चु जल-विद्युत परियोजना के लिए इस सप्ताह भारत तथा भूटान के बीच सुविधा समझौते का हस्ताक्षर किया जाना हमारे अनोखे तथा समय की कसौटी पर परखे गए द्विपक्षीय सम्बन्धों में एक और मील का पत्थर है| रन ऑफ़ द रिवर प्रोजेक्ट पूर्वी भूटान में खोलोंग्चु नदी के निचले हिस्से पर स्थित है| इसका कार्यान्वयन भूटान के द्रुक हरित विद्युत निगम तथा भारत के सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड के बीच गठित एक साझा उपक्रम कंपनी, खोलोंग्चु जल ऊर्जा लिमिटेड (के॰एच॰ई॰एल॰) करेगी| इस परियोजना के 2025 के दूसरे अर्धांश में पूरी होने की आशा है| इस सुविधा समझौते पर हस्ताक्षर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भूटान के विदेश मंत्री, डॉ॰ टंडी दोरजी तथा भारत के विदेश मंत्री, डॉ॰ एस॰ जयशंकर की उपस्थिती में राजधानी थिम्फू में किया गया|

भूटान 38,300 वर्ग किलोमीटर के छोटे से क्षेत्र में फैले अपेक्षाकृत एक छोटा सा हिमालयी राज्य है, जिसकी सीमा उत्तर में चीन और दक्षिण, पश्चिम तथा पूर्व में भारत से लगती है| देश में समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है तथा यहाँ विभिन्न तरह के जीव और वनस्पति हैं| देश की कुल जनसंख्या लगभग 8 लाख है| लगभग 60,000 भारतीय वहाँ व्यापारी के तौर पर बसे हुए हैं और विभिन्न परियोजनाओं, मुख्य रूप से भारत द्वारा स्थापित जल-विद्युत परियोजनाओं में काम कर रहे हैं| भूटान में विशाल संभावनाएं हैं, यहाँ 30,000 मेगा वॉट के जल-विद्युत होने का अनुमान है, जो इसकी आय का मुख्य स्रोत है| देश के राजस्व में जल-विद्युत 27 प्रतिशत से अधिक का योगदान करता है और देश की जी॰डी॰पी॰ में इसकी हिस्सेदारी 14 प्रतिशत है|

जब गत वर्ष अगस्त महीने में दूसरी बार प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने थिम्फू का दौरा किया, तो 720 मेगा वॉट की मंगदेचु परियोजना के उदघाटन के साथ भूटान की जल-विद्युत उत्पादन क्षमता 2,100 मेगा वॉट तक चली गई| प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने जून 2014 में पहली बार भूटान की यात्रा की थी| प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार ग्रहण करने के बाद भारत के प्रधानमंत्री का एक विदेशी देश का यह पहला दौरा था| इस यात्रा ने भारत की “पड़ोस पहले” की नीति विशेषकर, भूटान के साथ इसके महत्व को दर्शाया|

भारत की सहायता से तीन अन्य बड़ी जल-विद्युत परियोजनाएं स्थापित की गई हैं| 336 मेगा वॉट की चुखा, 60 मेगा वॉट की कुरिचु तथा 1,020 मेगा वॉट की टाला परियोजना है| ये तीनों परियोजनाएं भूटान में सफलतापूर्वक चल रहीं हैं और देश की विदेशी आय में योगदान कर रहीं हैं| भूटान की घरेलू आवश्यकताएँ पूरी हो जाने के बाद इन तीन संयत्रों द्वारा उत्पादित 75 प्रतिशत से अधिक बिजली भारत को बेच दी जाती है| अगस्त 2019 में श्री मोदी की भूटान यात्रा के दौरान, भारत तथा भूटान के बीच एक विद्युत क्रय समझौते पर भी हस्ताक्षर किया गया था|

भूटान दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) तथा बहु क्षेत्रीय और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी की पहल (बिम्स्टेक) जैसे क्षेत्रीय समूहों का एक महत्वपूर्ण सदस्य है|

महत्वपूर्ण बात यह है कि भूटान ने चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बी॰आर॰आई॰) के 2017 तथा 2019 के शिखर सम्मेलन में भागीदारी नहीं की और संप्रभुता के मुद्दे पर भारत ने भी इसका बहिष्कार किया| नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव तथा पाकिस्तान जैसे अन्य दक्षिण एशियाई राष्ट्रों ने इस इनिशिएटिव में भागीदारी की, जिसकी रूपरेखा स्पष्ट रूप से इस क्षेत्र में आथिक वर्चस्व के लिए चीन द्वारा तैयार की गई है|

भारत भूटान का सबसे बड़ा व्यावसायिक साझेदार है| 2018 में, दोनों देशों के बीच का द्विपक्षीय व्यापार 9,227 करोड़ तक गया| भारत भूटान को ऑटोमोबाइल, विद्युत तथा मशीनरी उपकरण, पेट्रोल, डीज़ल, रसायन, हाइड्रोलिक टर्बाइन तथा अन्य चीज़ों के कल पुर्ज़ों का निर्यात करता है| भूटान से आयात की जानेवाली मुख्य वस्तुओं में जल-विद्युत संयंत्र से उत्पादित बिजली, डोलोमाइट, सिलिकोन, सीमेंट धातुमल, टिंबर, वूड तथा विभिन्न तरह के कृषि उत्पाद शामिल हैं|

बड़ी संख्या में भूटानी छात्र भारत के विश्वविद्यालयों में व्यवसाय तथा विधि जैसे पेशेवर पाठ्यक्रमों का अध्ययन कर रहे हैं| इनमें से बहुत से छात्रों को भारत की सरकार छात्रवृत्ति देती है| दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी नियमित तौर पर होते हैं| प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में भूटानी तीर्थयात्री भारत स्थित पवित्र बौद्ध तीर्थस्थलों की यात्रा करते हैं|

कुछ देर से, विभिन्न क्षेत्रों में परियोजनाओं की पेशकश के साथ चीन भूटान में सड़क निर्माण की कोशिश में जुटा है, जिसमें जल-विद्युत का उत्पादन शामिल है| विगत कुछ वर्षों में भूटान को होनेवाले चीनी निर्यात कई गुना बढ़े हैं| बहरहाल, 2017 में भारत-भूटान-चीन के ट्राई-जंक्शन पर डोकलाम गतिरोध ने भूटान को पेईचिंग के मंसूबों के प्रति सावधान कर दिया है| चीनी पेशकश को लेकर भूटान और अधिक सतर्क हो गया है|

आलेख – रतन साल्दी, राजनीतिक टिप्पणीकार

अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी

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