प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया तथा नवोन्मेष का आह्वान किया

कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है| भारतीय किसानों ने भारत को पर्याप्त मात्रा में भोजन की उपलपद्धता सुनिश्चित की है| यही कारण है कि प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत नवंबर 2020 तक 80 करोड़ भारतवासियों को निःशुल्क राशन दिये जा रहे हैं| प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से कृषि अनुसंधान, इसके विस्तार की प्रगति और भारत में शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा की| 



भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आई॰सी॰ए॰आर॰) के महानिदेशक तथा कृषि अनुसंधान एवं विस्तार विभाग के सचिव, डॉ॰ त्रिलोचन महापात्र ने विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना करने के लिए वरीयताओं, प्रदर्शन और तैयारियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया| 2014 के बाद, आई॰सी॰ए॰आर॰ के विभिन्न केन्द्रों के अनुसंधान पर आधारित 1,434 नई क़िस्म की खेत की फ़सल, 462 प्रकार की बाग़वानी की फ़सल तथा जलवायु के लचीलेपन वाली 1,121 विविधताओं को विकसित किया गया है| विविधताओं को विकसित करने के लिए आणविक ब्रीडिंग तकनीक का प्रयोग किया गया है, जो कई तरह के दबाव को झेलने में सक्षम है| गेहूं के 3,226 एच॰डी॰ सात प्रकार के रोगों तथा टमाटर चार प्रकार के रोगों का अवरोध करने में सक्षम है| 



वाणिज्यिक प्रसंस्करण विविधताओं की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रसंस्करण विशेषताओं के साथ आर्कविसेस, आर्कअलेशा तथा आर्कयोजी को विकसित किया गया है| कृषि जलवायु क्षेत्रों की विशेष आवश्यकताओं पर विभिन्न तरह के फ़ोकस को विकसित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की प्रधानमंत्री ने प्रशंसा की तथा किसानों को अच्छी आय सुनिश्चित करने के लिए आगे और पीछे की कड़ी को विकसित करने की आवश्यकता के लिए प्रेरित किया|



करण-4 एक प्रकार का गन्ना है, जिसने चीनी की रिकवरी को बढ़ाया है तथा उत्तर प्रदेश में पारंपरिक रूप से उगाई गई क़िस्मों का स्थान लिया है| श्री मोदी ने गन्ने से जैव-इथेनॉल बढ़ाने के तरीक़ों और अन्य फ़सलों को खोजे जाने की आवश्यकता पर बल दिया|



“कुपोषण मुक्त भारत” को आधार देने के एक प्रयास के अंतर्गत, बढ़े हुए आयरन, ज़िंक तथा प्रोटीन तत्व के साथ 70 जैव-सुदृढ़ क़िस्में विकसित की गई हैं| कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से पोषण थाली तथा न्यूट्रिया-गार्डेन को बढ़ावा दिया जा रहा है| 76 कृषि विज्ञान केन्द्रों और 450 मॉडेल फ़ार्मों को शामिल करते हुए, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ में प्रायोगिक परियोजनाएं चलाई गई थीं| संतुलित आहार सुनिश्चित करने के लिए न्यूट्रिया-गार्डेन बढ़ाने में आंगनवाड़ी के कर्मचारियों तथा ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है| पोषण थाली में चावल, स्थानीय दाल, मौसमी फल, पत्तेदार हरी सब्ज़ियाँ, कंद, अन्य सब्ज़ियाँ, दूध तथा चीनी, गुड़ और तेल जैसी अन्य चीज़ें शामिल हैं| 



प्रधानमंत्री ने क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण के साथ जैविक तथा प्राकृतिक खेती के अभ्यासों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया| आई॰सी॰ए॰आर॰ ने भारत के भू-संदर्भित जैविक कार्बन के नक्शे को विकसित किया है तथा जैविक कृषि को बढ़ावा देनेवाले 80 जैव नियंत्रित एजेंट और 22 जैव कीटनाशकों की पहचान की है|



प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि कृषि तथा संबन्धित क्षेत्रों में तकनीक के प्रयोग तथा नवोन्मेष को सुनिश्चित करने के लिए स्टार्ट-अप्स और कृषि-उद्यमों को प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है| उन्होंने किसानों की मांग पर सूचना प्रदान करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने की आवश्यकता पर बल दिया| 



उन्होंने कहा कि चिन्हित समस्याओं के समाधान के लिए वर्ष में दो बार “हैकाथोंस” का आयोजन किया जा सकता है तथा कृषि से जुड़े बड़ी संख्या में श्रमिकों और महिलाओं को ध्यान में रखते हुए, खेती की गतिविधि को कम करनेवाले साधन तथा उपकरण के डिज़ाइन किए जाने की आवश्यकता है|



श्री मोदी ने इच्छा जताई कि जल के प्रयोग की क्षमता को बढ़ाने के लिए जागरूकता तथा आउटरीच कार्यक्रम संचालित किए जाने की आवश्यकता है|



प्रधानमंत्री ने प्रेरित करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों को रूपांतरित करने में भारतीय कृषि की पूरी संभावना का लाभ उठाने के लिए, भारतीय समुदाय के पारंपरिक ज्ञान को युवाओं तथा कृषि स्नातकों के प्रौद्योगिकी ज्ञान और कुशलता के साथ जोड़ दिया जाना चाहिए|



नागरिकों द्वारा पहले से ही इस्तेमाल किए जा रहे तथा जिनमें उचित अनुपात में आगे बढ़ने की संभावना है तथा जो अपने-अपने क्षेत्रों में विश्व-स्तरीय एप बन सकते हैं, ऐसे श्रेष्ठ भारतीय एप की पहचान करने के लिए प्रधानमंत्री ने “आत्मनिर्भर भारत” नवाचार चुनौती को भी लॉन्च किया| प्रधानमंत्री ने कहा कि “इसमें भागीदारी करने के लिए प्रौद्योगिकी समुदाय के सभी मित्रों को मैं प्रेरित करता हूँ|”



प्रधानमंत्री ने भारत में जीवंत प्रौद्योगिकी तथा स्टार्ट-अप इको-सिस्टम का उल्लेख किया तथा इस क्षेत्र को प्रौद्योगिकी समाधान देने में युवाओं ने कैसे विशिष्टता हासिल की है,इसका भी उन्होंने ज़िक्र किया| उन्होंने कहा कि स्टार्ट-अप तथा नवाचार करने, विकसित करने तथा देश में निर्मित एप को बढ़ावा देने के लिए टेक इकोसिस्टम में बहुत उत्साह है|उन्होंन आगे कहा कि चूंकि, राष्ट्र एक आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में काम कर रहा है, ऐसे में एप्स को विकसित करने के लिए एक दिशा देने तथा उसमें गति प्रदान करने का यह एक सुअवसर है, जो हमारे बाज़ार के अनुकूल हों और विश्व के साथ प्रतिस्पर्धा भी कर सके|










आलेख – पदम सिंह, आकाशवाणी के समाचार विश्लेषक 

अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी

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