अमरीका के पूर्व एन॰एस॰ए॰ ने कहा, “चीन का व्यवहार अस्वीकार्य”
अमरीका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एन॰एस॰ए॰), जॉन बॉल्टन ने कहा है कि 21वीं सदी में भारत-अमरीका के संबंध अमरीका के लिए “अत्यधिक महत्वपूर्ण” होंगे| उन्होंने यह भी कहा कि अमरीका के परिप्रेक्ष्य से चीन के साथ संबंध एक चुनौती बनी हुई है| रणनीतिक मामलों में अमरीका-भारत के बीच का संबंध इस सदी में वॉशिंगटन के अत्यधिक महत्वपूर्ण सम्बन्धों में से एक होने जा रहा है| 21वीं सदी में चीन अमरीका के अस्तित्व के लिए एक संभावित ख़तरा है| श्री बॉल्टन ने कहा कि वैश्विक परिदृश्य पर भारत अन्य मुख्य प्लेयर होगा|
दो सबसे बड़े लोकतन्त्र के बीच “बहुत से सामान्य मूल्यों तथा एक बढ़ती हुई साझा विरासत” की ओर इशारा करते हुए, बॉल्टन ने कहा कि अमरीका एक ऐसा देश है, जहां विश्वभर के लोग आकर बसे हुए हैं, ऐसे में भारत की ओर ध्यान “अनिवार्य रूप से बढ़ेगा”|
“भू-राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण” मुद्दों को रेखांकित करते हुए, बॉल्टन ने स्वीकार किया कि भारत तथा अमरीका के बीच ऐसे कई मुद्दे हैं, जिनपर चर्चा किए जाने की आवश्यकता है| पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन की झड़प को लेकर बॉल्टन ने कहा कि इस प्रकार का व्यवहार अमरीका तथा चीन की परिधि में बसे प्रत्येक नागरिक को चिंतित कर रहा है|
उन्होंने आगे कहा कि चीन के पास विश्व के सबसे बड़े आक्रामक साइबर युद्ध कार्यक्रम हैं, यह अमरीकी नौसेना को पश्चिमी प्रशांत से बाहर निकालने के लिए क्षेत्र खंडन तथा पहुँच-रोधी हथियार प्राप्त कर चुका है| भारत तथा अन्य देशों के साथ लगती अपनी सीमाओं पर चीन की स्थिति के संदर्भ में, पेईचिंग अपनी बैलिस्टिक मिसाइल तथा परमाणु हथियारों की क्षमता को बढ़ा रहा है|
श्री बॉल्टन का मानना है कि विगत 30 या 40 वर्षों में शेष दुनिया चीन को लेकर ग़लती कर चुकी है| वे विश्वास करते हैं कि चीन की आर्थिक स्वतन्त्रता तथा इसके विकास को अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था के नियमों का पालन करना होगा| लेकिन, अब यह एक झूठ में बदल चुका है|
अमरीका का मानना है कि चीन के अधिक समृद्ध होने के साथ, प्रतिनिधि सरकार गाँव से प्रांतीय चुनावों और प्रांतीय चुनावों से राष्ट्रीय चुनावों तक विस्तृत होगी| अमरीका के पूर्व एन॰एस॰ए॰ ने आगे कहा कि यह प्रक्रिया भी एक झूठ में बदल चुकी है|
चीन द्वारा विश्वास किए जा रहे वैश्विक आशाओं के बदले, श्री बॉल्टन ने चीन संबंधी धारणाओं पर निर्मित नीति ढांचे की एक समीक्षा का आह्वान किया|
अमरीका के पूर्व एन॰एस॰ए॰ ने कहा कि माओ त्से-तुंग के बाद राष्ट्रपति, शी चिनफिंग सबसे अधिक शक्तिशाली नेता हैं, लेकिन प्रतिनिधि सरकार के विस्तार का कोई संकेत नहीं है| उन्होंने आगे कहा कि शी “एक सत्तावादी नेता” हैं, जिनकी “कार्यवाहियाँ बहुत रुखाई से परिकलित होती हैं|” वैश्विक मामलों में एक ज़िम्मेदार हिस्सेदार होने को लेकर श्री बॉल्टन चीन को संदेह की नज़र से देखते हैं|
वे अनुभव करते हैं कि चीन का उभार शांतिपूर्ण नहीं रहा है तथा यह एक ज़िम्मेदार हिस्सेदार नहीं है| चीन प्रभावी रूप से दक्षिण चीन सागर पर नियंत्रण जमा रहा है| चीनी सचमुच ज़मीन तैयार कर रहे हैं, जिसके उपर वे दक्षिण चीन सागर में अपने सैन्य ठिकानों का निर्माण कर रहे हैं|
बॉल्टन ने कोविड-19 के प्रसार की वास्तविकताओं को छुपाने के लिए भी चीनी सरकार को दोषी ठहराया, उन्होंने इसे “विश्वभर में व्यापक स्तर पर ग़लत सूचना फैलाने का अभियान” कहा| उन्होंने आगे कहा कि आज भी वास्तव में चीन के भीतर के प्रभाव की सीमा को कोई नहीं जानता है| अमरीका, यूरोप, लैटिन अमरीका, भारत तथा अन्य किसी देश में इस रोग के फैलाव की तुलना में चीन के आंकड़े को देखकर ऐसा लगता है कि यहाँ कोरोनवायरस महामारी पूरी तरह से समाप्त हो चुका है| इस बात पर विश्वास करना असंभव है| चीन पर पड़नेवाले कोरोनवायरस के आर्थिक प्रभाव को लेकर विश्व भी नहीं जानता है|
कोविड-19 महामारी के मूल कारणों का पता लगाने की जब बात आई तो बॉल्टन ने चीन के इरादों पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि जैविक हथियारों पर चीन का अनुसंधान “विश्व में सबसे व्यापक” हो सकता है| उनका मानना है कि कोविड-19 महामारी की तह में वास्तव में जाने की इच्छा रखनेवाले देश को महामारी विज्ञानियों तथा चिकित्सकों के लिए रहस्य से पर्दा उठाने में किसी प्रकार का भय नहीं होना चाहिए| विशेषज्ञों को इसकी तह में जाना चाहिए| बहरहाल, यह चीन के रवैये के विपरीत है|
कंपनी के रूप में श्री बॉल्टन ने ज़ेड॰टी॰ई॰ तथा हुवाई का भी संदर्भ दिया, जो “वाणिज्यिक संचार की कंपनियाँ नहीं” हैं, लेकिन, ये “चीनी राज्य के हथियार हैं|” पूर्व अमरीकी राजनयिक ने कहा कि “ये कंपनियाँ विश्वभर के आर्थिक क्षेत्र पर नियंत्रण जमाने के लिए बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव सरीखे प्रयासों का हिस्सा हैं|”
आलेख – सिद्धार्थ राय, पत्रकार
अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी
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