राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

गत सप्ताह, देश में विद्यालय तथा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तनकारी सुधार के लिए मार्ग को सरल बनाते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एन॰ई॰पी॰) 2020 को अनुमोदित किया| मंत्रिमंडल ने शिक्षा पर 34 वर्ष पुरानी राष्ट्रीय नीति को परिवर्तित किया तथा मानव संसाधन विकास (एच॰आर॰डी॰) मंत्रालय का शिक्षा मंत्रालय के रूप में पुनः नामकरण भी किया| प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारत को एक “ज्ञान केंद्र” में परिवर्तित करेगी| भारतीय अंतरीक्ष अनुसंधान संगठन (आई॰एस॰आर॰ओ॰) के पूर्व अध्यक्ष, डॉ॰ के॰ कस्तूरीरंगन ने शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन से संबन्धित मसौदे को दिसंबर 2018 में प्रकाशित किया था| नई एन॰ई॰पी॰ 6 से 14 वर्ष के लिए 3 और 18 वर्ष के बीच के आयु वर्ग के बच्चों की अनिवार्य स्कूलिंग का विस्तार करती है| बच्चों को शिक्षा के बेहतर परिणाम प्राप्त हो, इसके लिए प्री-स्कूल के बच्चों के लिए भी पोषण युक्त दोपहर के भोजन के साथ ऊर्जा से भरपूर नाश्ता उपलब्ध कराने के प्रावधान में विस्तार किया गया है|

विद्यालय शिक्षा के 10+2 के वर्तमान ढांचे में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन करते हुए, आधारगत चरण के 3 से 8, प्रारम्भिक चरण के 8 से 11, मध्य चरण के 11 से 14 और माध्यमिक चरण के 14 से 18 आयु वर्ग के अनुसार एन॰ई॰पी॰ ने क्रमश: “5+3+3+4” की एक योजना तैयार की है| बचपन की देखभाल तथा शिक्षा (ई॰सी॰सी॰ई॰) पर बल देते हुए, नई व्यवस्था में 3 वर्ष की आंगनवाड़ी/प्री-स्कूलिंग के साथ 12 वर्ष की स्कूलिंग का प्रावधान किया गया है| बच्चों के मस्तिष्क की आंतरिक शक्ति के विकास के निर्णायक चरण के रूप में आंगनवाड़ी/प्री-स्कूलिंग को वैश्विक माना गया है|

एन॰ई॰पी॰ 2020 कहती है कि छात्रों को कम से कम पाँचवीं कक्षा तक उनकी मातृ भाषा या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाया जाना चाहिए| किसी भाषा को किसी भी छात्र पर थोपा नहीं जाना चाहिए| नीति स्पष्ट रूप से कहती है कि बच्चे अपने घर की भाषा में महत्वपूर्ण विचारों को अधिक तत्परता से सीखते और समझते हैं|

एन॰ई॰पी॰ 2030 तक शत-प्रतिशत कुल भर्ती अनुपात (जी॰ई॰आर॰) के साथ विद्यालय पूर्व से माध्यमिक स्तर तक शिक्षा का सार्वभौमिकरण करने पर फ़ोकस कर रही है|एन॰ई॰पी॰ 2020 खुली स्कूली शिक्षा प्रणाली के माध्यम से स्कूल की शिक्षा से वंचित दो करोड़ बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था में वापस लाएगी| एन॰ई॰पी॰ 2020 के साथ उच्च शिक्षा में 3॰5 करोड़ नई सीटें जोड़ी जाएंगी| “प्रायोगिक ज्ञान तथा गहन सोच” पर ज़ोर देने के साथ “अंतर्भाग को मौलिक” बनाए रखने के लिए पाठ्यक्रम में कटौती करके 10वीं तथा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को आसान बनाया जाना है| नई नीति छात्रों को एक वर्ष में दो बोर्ड परीक्षाएँ देने की भी अनुमति देती है|

एक नये आधिकारिक मान्यता का ढांचा तथा एक स्वतंत्र प्राधिकरण निजी तथा सार्वजनिक दोनों स्कूलों को नियंत्रित करेंगे| जबकि, भारत का उच्च शिक्षा आयोग (एच॰ई॰सी॰आई॰) चिकित्सा तथा क़ानूनी शिक्षा को छोड़कर समूची उच्च शिक्षा को नियंत्रित करेगा| इंटर्नशिप के साथ पेशेवर शिक्षा छठी कक्षा से शुरू होगी तथा उच्च शिक्षावाले पाठ्यक्रम में विषयों के चयन में लचीलेपन की सुविधा दी जाएगी|

एन॰सी॰ई॰आर॰टी॰ के साथ परामर्श में राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एन॰सी॰टी॰ई॰) 2021 तक शिक्षक की शिक्षा के लिए एक नए तथा व्यापक राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचे का निर्माण करेगी| 2035 तक उच्च शिक्षा में जी॰ई॰आर॰ को 50 प्रतिशत तक बढ़ाया जाना है| एन॰ई॰पी॰ 2020 के अंतर्गत, शैक्षिक वर्ग, अतिरिक्त पाठ्यक्रम या पेशेवर पाठ्यक्रम के बीच किसी प्रकार का कोई कठोर विभाजन नहीं किया जाएगा| शिक्षा प्राप्त करने के परिणामों के प्रति छात्रों की प्रगति का पता लगाने के लिए एन॰ई॰पी॰ 2020 360 डिग्री का एक समग्र प्रगति कार्ड ला रही है| 

एन॰ई॰पी॰ के अंतर्गत, पूर्वस्नातक छात्र एक वर्ष में एक सर्टिफ़िकेट, दो वर्ष में एक डिप्लोमा तथा तीन वर्ष में एक बैचलर डिग्री के साथ निकल सकते हैं| यू॰जी॰, पी॰जी॰ तथा पी॰एच॰डी॰ के सभी पाठ्यक्रम अंतरविषयक होंगे तथा एम॰फिल॰ पाठ्यक्रम को समाप्त कर दिया जाएगा| सरकार क्रेडिट का ट्रांसफ़र करने के लिए क्रेडिट शैक्षणिक बैंक की भी स्थापना करेगी| 2030 तक, 4 वर्ष की बी॰एड॰ की एक एकीकृत डिग्री अध्यापन के लिए न्यूनतम डिग्री योग्यता होगी| आई॰आई॰टीज़॰ तथा आई॰आई॰एमएस॰ के बराबर विश्व स्तरीय श्रेष्ठ बहु-विषयक शिक्षा के लिए मॉडेल के तौर पर बहु-विषयक शिक्षा तथा अनुसंधान विश्वविद्यालय (एम॰ई॰आर॰यू॰) स्थापित किए जाएँगे|

एन॰ई॰पी॰ के अंतर्गत, एक सशक्त अनुसंधान संस्कृति को प्रोत्साहन देने के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान को स्थापित किया जाएगा| अपक्षपात के साथ तकनीक के अधिक प्रयोग के लिए एक राष्ट्रीय शैक्षणिक प्रौद्योगिकी मंच का भी निर्माण किया जाएगा|

एन॰ई॰पी॰ 2020 जेंडर समावेशन, सुविधाहीन क्षेत्रों तथा समूहों के लिए निधिकरण तथा विशेष शिक्षा क्षेत्रों पर बल देती है| इसका उद्देश्य शिक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश को जल्द से जल्द जी॰डी॰पी॰ के वर्तमान के 4॰6 प्रतिशत से 6 प्रतिशत तक पहुंचाना है|

इस प्रकार, एन॰ई॰पी॰ 2020 का उद्देश्य बाल शिक्षा को एक समावेशित, सहभागीपूर्ण तथा समग्र दृष्टिकोण प्रदान करना है| एन॰ई॰पी॰ का क्रियान्वयन 21वीं सदी की आवश्यकताओं को पूरा करने में भारत की शिक्षा व्यवस्था को परिवर्तित करने में सहायक होगा|







आलेख – पायल, शिक्षाविशारद 

अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी

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