भारत-जापान आर्थिक साझेदारी का सशक्तिकरण
इन्वेस्ट इंडिया एक्सक्लूसिव इन्वेस्टमेंट फ़ोरम के तीसरे संस्करण में हाल ही में जापान संस्करण का आयोजन किया गया था| इसका उद्देश्य व्यवसाय के लिए अनुकूल स्थितियों को उत्पन्न करके भारत- जापान व्यापार तथा निवेश सहयोग को और सशक्त बनाना है| हालांकि, ये कोविड-19 के प्रभाव का सामना कर रहे हैं| भारत के आर्थिक आधुनिकीकरण तथा एक आत्मनिर्भर भारत बनाने सम्बन्धी प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में जापान मुख्य सहयोगियों में से एक है| जापानी तकनीक का सोर्सिंग तथा जापानी जनता का सक्रिय जुटाव और निजी क्षेत्र के निवेश नई दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण हैं|
इसके विशाल बाज़ार के कारण जापानी कंपनियों के लिए भारत एक पसंदीदा देश है| जापानी विनिर्माण कंपनियों के सौजन्य से विदेशी व्यापार कार्य-प्रणालियों पर जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बैंक (जे.बी.आई॰सी.( द्वारा कराये गए हाल की सर्वेक्षण रिपोर्ट में चीन को पछाड़ते हुए भारत शीर्ष स्थान पर पहुंचा| 2000 से 2020 तक 33॰5 बिलियन अमरीकी डॉलर के संचयी एफ़॰डी॰आई॰ अंतर्वाह के साथ जापान, भारत में चौथा सबसे बड़ा निवेशक है| इस अवधि के दौरान, भारत के कुल एफ़॰डी॰आई॰ अंतर्वाह में इसका योगदान 7 प्रतिशत से अधिक है| घरेलू और वैश्विक बाज़ारों को ध्यान में रखते हुए स्वचालित लिथियम-आयन बैटरी पैक के सुज़ुकी-तोशिबा-डेंसो के साझा उपक्रम के साथ जापान ने “मेक इन इंडिया” के अंतर्गत सफलता की कथा लिखी है और मेड इन इंडिया सुज़ुकी “बैलेनो” कारों के निर्यात अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में किए जा रहे हैं|
जापानी व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए, सीमा-शुल्क, गुणवत्ता, निर्यात प्रक्रिया तथा संचालन तंत्र समेत भारत में निवेशकों के सामने आनेवाली कुछ चुनौतियों के समाधान के लिए समर्पित एक फ़ोकस्ड अंतर-मंत्रिस्तरीय समूह का गठन किया गया है| इस समूह में वाणिज्य तथा उद्योग, वित्त, रेलवे, सड़क तथा सरफ़ेस मंत्रालय के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है| इस समूह का चार सत्रों में लगभग 50 जापानी कंपनियों के साथ बैठक करने का कार्यक्रम है| इस समूह की कुछ कंपनियाँ भारत में पहले से काम कर रही हैं| ख़बर है कि जापानी पक्ष का भारत में लगभग 200 निवेश योजनाएँ हैं| इसी दौरान, व्यवसाय करने की सुगमता को दुरुस्त करने के उद्देश्य के साथ 2021 तक एक अखिल भारतीय निवेश अनुमति प्रकोष्ठ की शुरुआत होने की संभावना है|
निवेशों को सुविधाजनक बनाने में सहायता करने के लिए, दिसंबर 2019 में वाणिज्य तथा उद्योग मंत्रालय और जापान के आर्थिक, व्यापर तथा उद्योग (एम॰ई॰टी॰आई॰) मंत्रालय के बीच भारत-जापान औद्योगिक प्रतिस्पर्धा साझेदारी (आई॰जे॰आई॰सी॰पी॰) की शुरुआत की गई थी| एफ़॰डी॰आई॰, संचालन तंत्र की लागत में कमी करने तथा इसी तरह के कारकों को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों का बेहतर प्रयोग करके भारत के औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की दिशा में साझा रूप से काम करना इसका उद्देश्य है| जापानी व्यवसायों के लिए भारत में प्रवेश की योजना को अमल में लाने तथा संभावना तलाशने के लिए जापान प्लस एक वन स्टॉप शॉप भी है|
निवेश प्रोत्साहन प्रदान करनेवाली जापान औद्योगिक बस्ती (जे॰आई॰टी॰) की शुरुआत के साथ इस मामले में महत्वपूर्ण प्रगति कर ली गई है| जापान एकमात्र ऐसा देश है, जो वर्तमान में भारत में समर्पित देश केन्द्रित 12 औद्योगिक टाउनशिप रखता है| इसके अतिरिक्त, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए असम में 13वीं जे॰आई॰टी॰ स्थापित करने की योजना है| इसके अलावा, स्टार्ट-अप तंत्रों के बीच की खाइयों को भरने के उद्देश्य से बेंगलुरु में भारत-जापान स्टार्ट-अप केंद्र की स्थापना की गई थी, जो बाज़ार तथा निवेशकों के साथ स्टार्ट-अप्स तथा कंपनियों के बीच एक इंटरफ़ेस के रूप में सेवा दे रहा है|
इसी दौरान 2019 में, भारत ने प्रतिकूल व्यापार संतुलन पर चिंता व्यक्त की थी तथा भारत के उत्पादों तथा सेवाओं को इसकी पूरी संभावना के अनुरूप बाज़ार की पहुँच नहीं मिलने के बाद व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते की समीक्षा की इसने मांग की थी| भारत के लिए व्यापार संतुलन एक शीर्ष नीतिपरक वरीयता है| 2018-19 के दौरान, भारत-जापान का द्विपक्षीय व्यापार 17॰63 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंचा| इस अवधि के दौरान, जापान से भारत को होनेवाला निर्यात 12॰77 बिलियन अमरीकी डॉलर का था तथा जापान ने यहाँ से 4॰86 बिलियन डॉलर का आयात किया|
प्रधानमंत्री मोदी तथा उनके जापानी प्रतिपक्ष शिंज़ो आबे ने एक उच्च स्तर के राजनय की शुरुआत की है| भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि “एक सशक्त भारत तथा जापान ना केवल हमारे दोनों राष्ट्रों को समृद्ध बनाएँगे, बल्कि ये एशिया तथा विश्व को स्थिर करनेवाले कारक भी बनेंगे|” सशक्त आर्थिक संबंध भारत-जापान के विशेष रणनीतिक तथा वैश्विक साझेदारी का एक मुख्य स्तम्भ है| इनकी जनसांख्यिकीय प्रोफ़ाइल की पूरकता तथा जापान के हार्डवेयर तथा भारत के सॉफ्टवेयर के साथ भविष्य में भारत-जापान के आर्थिक सहयोग के सशक्त होने की प्रचुर संभावनाएं हैं|
आलेख – डॉ॰ तितली बसु, पूर्व तथा दक्षिण पूर्व एशिया मामलों की रणनीतिक विश्लेषक
अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी
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