भारत-बेलारूस के संबंध विकास के लिए तैयार

बेलारूस के पदधारी राष्ट्रपति, अलेक्ज़ेंडर लुकाशेंको ने 2020 का राष्ट्रपतित्व चुनाव जीत लिया है| वे 26 वर्षों से अधिक समय से बेलारूस के राष्ट्रपति रहे हैं| चुनाव परिणामों की जैसे ही घोषणा हुई, राजधानी मिंस्क तथा अन्य स्थानों पर नागरिक अपनी असंतुष्टि व्यक्त करने संबंधी विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर जमा हो गए| बहरहाल, चुनाव के परिणामों से भारत तथा बेलारूस के द्विपक्षीय सम्बन्धों पर किसी प्रकार के प्रभाव पड़ने की आशा नहीं की जा रही है|

बेलारूस के साथ भारत के संबंध परंपरागत रूप से गर्मजोशीपूर्ण और सौहार्दपूर्ण रहे हैं| सोवियत संघ के विघटन के बाद 1991 में एक स्वतंत्र देश के रूप में बेलारूस को सबसे पहले स्वीकृति देनेवाले देशों में भारत शामिल था| परस्पर हितों के मुद्दों पर बहुपक्षीय मंच में एक दूसरे के साथ सहयोग करने तथा विभिन्न मामलों पर विचारों की समानता तथा अच्छी समझ को विकसित करने में इस स्वीकृति ने दोनों देशों को मदद दी| दोनों देशों के बीच के सहयोग संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यू॰एन॰एस॰सी॰) तथा परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एन॰एस॰जी॰) जैसे बहुत से बहुपक्षीय मंचों पर देखने को मिले हैं| वास्तव में, जिन देशों के समर्थन जुलाई 2020 में यू॰एन॰एस॰सी॰ में एक अस्थाई सीट के लिए भारत की उम्मेदवारी को सशक्त बनाने में सहायक रहे हैं, उन देशों में बेलारूस भी शामिल था| भारत ने भी विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर बेलारूस के समर्थन का प्रतिफल दिया है| नई दिल्ली गुट निरपेक्ष आंदोलन (एन॰ए॰एम॰) तथा आई॰पी॰यू॰ (अंतर-संसदीय संघ) जैसे अन्य अंतर्राष्ट्रीय तथा बहुपक्षीय समूहों में बेलारूस की सदस्यता का समर्थक है| मानवाधिकारों के उल्लंघन तथा अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता पर लगे प्रतिबंधों के लिए बेलारूस को लक्ष्य बनानेवाले जेनेवा तथा न्यू यॉर्क के विभिन्न प्रस्तावों पर भारत के समर्थनकारी रवैये का बेलारूस ने गंभीरता से सराहना की है|

एक उभरती वैश्विक महाशक्ति के रूप में भारत के विकास को समझते हुए, बेलारूस भारत के साथ एक “रणनीतिक संबंध” विकसित करने की इच्छा रखता है| जी-20, शंघाई सहयोग संगठन (एस॰सी॰ओ॰) तथा ब्रिक्स में भारत की सदस्यता भी बेलारूस के लिए महत्वपूर्ण है| यह अपने प्रभाव का विस्तार विशेषरूप से, यूरेशियाई क्षेत्र में भी करना चाहता है|

दोनों देशों ने गर्मजोशीपूर्ण तथा मित्रवत सम्बन्धों को विकसित करने में कठिन परिश्रम किए हैं| यह दोनों देशों की ओर से होनेवाली उच्च स्तरीय यात्राओं से सपष्ट है| दोनों पक्ष विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं| भारत और बेलारूस धातु तथा खनन, शिक्षा तथा भारी मशीनरी, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी, ऊर्जा क्षेत्र, पोटाश उर्वरक, भारत में सार्वजनिक विद्युत परिवहन व्यवस्था के आधुनिकीकरण, कृषि तथा कृषि-प्रसंस्करण और पर्यटन के क्षेत्रों में एक दूसरे का सहयोग कर रहे हैं| दोनों देश रक्षा उपकरणों के निर्माण में साझा परियोजनाओं पर भी सहमत हुए हैं| चूंकि, बेलारूस सोवियत युग के रक्षा उपकरणों के रखरखाव तथा उनमें सुधार करने में अधिक कुशलता विकसित कर चुका है, इसलिए ये परियोजनाएं भारत के लिए लाभकारी होंगी|

2015 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति की बेलारूस की राजकीय यात्रा के दौरान, नई दिल्ली तथा मिंस्क ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एस॰ई॰बी॰आई॰) तथा वित्त मंत्रालय, भारतीय मानक ब्यूरो के बीच तथा प्रसार भारती और बेलारूस नेशनल स्टेट टेलीविज़न के बीच के समझौतों समेत कई समझौतों तथा सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए| बेलारूस ने शांति के दूत के सम्मान में 2018 में बेलारूस के स्टेट यूनिवर्सिटी में महात्मा गांधी की एक प्रतिमा का अनावरण भी किया| कुल मिलाकर दोनों देशों के बीच की उच्च स्तरीय यात्राओं की स्थिति सफल रही है|

आर्थिक क्षेत्र में, 2019 में वार्षिक द्विपक्षीय व्यापारिक कारोबार 569॰6 मिलियन अमरीकी डॉलर का रहा है| रिपोर्ट कहती है कि गत वर्ष की तुलना में इसमें महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है। बेलारूस को बाज़ार अर्थव्यवस्था दर्जे की स्वीकृति देने वाले 2015 के भारत के विशेष भाव प्रदर्शन तथा 100 मिलियन अमरीकी डॉलर की ऋण सीमा ने आर्थिक क्षेत्र के विकास में भी मदद दी है। "मेक इन इंडिया" परियोजनाओं में निवेश करने संबंधी बेलारूस के व्यवसायियों को भारत के प्रोत्साहन के परिणाम मिल रहे हैं।

बेलारूस की रणनीतिक स्थिति यूरेशिया के लिए इसे संवेदनशील बनाती है तथा यह अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण गलियारे (आई.एन.एस.टी.सी.) के साथ संपर्क बनाने में भविष्य में भारत के लिए मददगार हो सकती है। रूस समेत आई.एन.एस.टी.सी. के सदस्यों के साथ बेलारूस सशक्त संबंध साझा करता है, जो भारत के लिए एक बड़ी सुविधाजनक स्थिति है।

भारत तथा बेलारूस के बीच की समझ तथा आपसी विश्वास पर ध्यान दिया जाए, तो इससे पता चलता है कि इससे संबंध सिर्फ़ मज़बूत होंगे। भारतीय प्रौद्योगिकी तथा आर्थिक सहयोग कार्यक्रम के अंतर्गत, बेलारूस के मानव संसाधन विकास में भारत सहायता करता रहा है। अब तक, बेलारूस के 290 से अधिक अधिकारी तथा अन्य लोग इस कार्यक्रम से लाभान्वित हो चुके हैं। बेलारूस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा की मेज़बानी करने की आशा कर रहा है तथा यह इस यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों के एक महत्वपूर्ण इवेंट के रूप में सम्मान देगा।

आलेख – डॉ॰ इंद्राणी तालुकदार, सी॰आई॰एस॰ मामलों की रणनीतिक विश्लेषक

अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी

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