स्वाधीनता दिवस के अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री ने आत्म-निर्भरता पर बल दिया
15 अगस्त 2020 को लाल क़िले की प्राचीर से राष्ट्र को किए गए अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम अपने स्वतंत्र अस्तित्व के 75वें वर्ष में प्रवेश करेंगे| यह एक यादगार अवसर है| सभी 130 करोड़ भारतवासियों को आनेवाले दो वर्षों के लिए महत्वपूर्ण संकल्प लेने होंगे| अपनी स्वाधीनता के जब हम 75 वर्ष पूरे करेंगे, तब हम उन संकल्पों से मुक्त होने के योग्य हो सकेंगे|
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने कड़ी वचनबद्धता, अटूट एकता, ईमानदार तपस्या, आत्मसंयम तथा बलिदान के साथ स्वाधीनता की लड़ाई लड़ी| उन्होंने मातृभूमि भारत के लिए जिस तरह से अपने जीवन का बलिदान दिया, उसे हमें नहीं भूलना चाहिए| हमें कभी नहीं भूलना चाहिए कि दासता के लंबे अंधेरे समय के दौरान, एक क्षण के लिए भी उन्होंने स्वाधीनता की इच्छा को छोड़ा नहीं|
बापूजी (महात्मा गांधी) के नेतृत्व में जन आंदोलनों के साथ महान राष्ट्रीय जागरण ने स्वाधीनता के संघर्ष को एक नई गति प्रदान की| इसी कारण, आज हमें इस प्रकार के उत्साह के साथ स्वाधीनता दिवस मनाने का सौभाग्य मिला है|
पूरी दुनिया में, स्वाधीनता की अपनी लड़ाई में भारत एकता की अपनी शक्ति के साथ अपना सर ऊंचा किए आगे बढ़ता गया तथा एकजुट होकर अपनी वचनबद्धता और प्रेरणा के साथ अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए इसने संकल्प लिया|
श्री मोदी ने कहा कि कोरोना महामारी के बीच में 130 करोड़ भारतवासियों ने स्वयं को आत्म-निर्भर बनाने के संकल्प लिए| आज प्रत्येक भारतीय के मन में आत्म-निर्भरता अंकित है| हम आत्म-निर्भर भारत के सपनों की अनुभूति का गवाह भी बन रहे हैं| “आत्म-निर्भर भारत” केवल एक शब्द नहीं है, यह 130 करोड़ देशवासियों के लिए एक मंत्र बन चुका है|
हम स्वाधीनता की 75वीं वर्षगांठ से केवल एक क़दम दूर हैं, भारत जैसे देश को अपने दम पर खड़ा होना तथा आत्म-निर्भर बनना आवश्यक है| प्रधानमंत्री ने पूरे विश्वास के साथ कहा कि भारत इस सपने को साकार करेगा| देश के नागरिकों की शक्ति इसकी वजह बनेगी| प्रधानमंत्री ने नागरिकों की प्रतिभा पर गर्व का अनुभव किया| उन्होंने अपने युवाओं तथा देश की अद्वितीय महिला शक्ति में विश्वास भी व्यक्त किया| इतिहास गवाह है कि जब कभी भारत ने कुछ करने का संकल्प लिया है, इसने कर दिखाया है|
श्री मोदी ने कहा कि भारत ने इस कहावत का सदा ही पालन किया है, “समूचा विश्व एक कुटुंब है|” वेद की वाणी है, “वसुधैव कुटुंबकम” तथा विनोबाजी कहा करते थे, “जय जगत” अर्थात विश्व की जय हो| इस प्रकार, पूरा विश्व हमारे लिए एक परिवार है| इसलिए, वित्तीय विकास के साथ-साथ मानवजाति तथा मानवता को भी महत्व दिया जाना चाहिए| हम इस कथन का पालन करते हैं|
आज दुनिया एक दूसरे से जुड़ी हुई है तथा एक दूसरे पर निर्भर है| इसलिए, यह समय की मांग है कि भारत जैसे एक विशाल देश को विश्व की अर्थव्यवस्था में अपने योगदान को बढ़ाना चाहिए| विश्व कल्याण की दिशा में यह भारत का कर्तव्य भी है| अगर भारत अपने योगदान को बढ़ाना चाहता है, तब इसे ख़ुद भी सशक्त बनना होगा| इसे आत्म-निर्भर बनना होगा| हमें विश्व कल्याण के लिए योगदान देने योग्य बनना होगा| अगर हमारी जड़ें मज़बूत होती हैं तथा हम अधिक सक्षम हैं, हम विश्व कल्याण की दिशा में क़दम उठाने के योग्य बनेंगे|
प्रधानमंत्री ने स्वाधीनता दिवस के अपने सम्बोधन में कहा कि हमारे देश में प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधन हैं| समय की मांग है कि देश को नए शिखर तक ले जाने के लिए मानव संसाधनों तथा हमारे प्राकृतिक संसाधनों का हमें मूल्य वर्धन शुरू कर देना चाहिए| उन्होंने कहा कि कब तक हम दुनिया को कच्चे माल का निर्यात करते रहेंगे? कब तक कच्चे माल का निर्यात तथा तैयार सामान का आयात जारी रहेगा? हमें जल्द ही “आत्म-निर्भर” बनना होगा| विश्व की आवश्यकताओं के अनुसार, हमें हमारी क्षमताओं का मूल्य वर्धन करना होगा| यह हमारी ज़िम्मेदारी है|
हमारी शक्ति आत्म-निर्भर की शक्ति में है| कृषि में मूल्य वर्धन इस क्षेत्र के लिए भी आवश्यक है| विश्व की आवश्यकताओं के अनुसार, हमें कृषि क्षेत्र को विकसित करने की आवश्यकता है| हमारे कृषि क्षेत्र के लिए मूल्य वर्धन की आवश्यकता है|
देश कई नई पहल कर रहा है| हम अन्तरिक्ष क्षेत्र को खोल चुके हैं| देश के युवाओं को अवसर मिल रहे हैं| जब अन्तरिक्ष के क्षेत्र में भारत सशक्त बनेगा, तब पड़ोसी देशों को भी इसके लाभ मिलेंगे| अगर, हम ऊर्जा के क्षेत्र में सशक्त बनते है, तो भारत अपने अंधकार को दूर करने की इच्छा रखनेवाले देशों की मदद कर सकेगा| जब देश की स्वास्थ्य संरचना आत्म-निर्भर बनेगी, तब स्वास्थ्य पर्यटन के लिए भारत एक वरीयतावाला देश बनेगा| इस प्रकार, यह देखना आवश्यक है कि विश्व में “मेक इन इंडिया” के उत्पादों को सराहना मिले| प्रधानमंत्री ने कहा कि इस सच्चाई का इतिहास गवाह है कि एक समय था, जब हमारे देश की कुशल मानवशक्ति से निर्मित वस्तुओं की विश्व में सराहना होती थी|
आलेख – पदम सिंह, आकाशवाणी के समाचार विश्लेषक
अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने कड़ी वचनबद्धता, अटूट एकता, ईमानदार तपस्या, आत्मसंयम तथा बलिदान के साथ स्वाधीनता की लड़ाई लड़ी| उन्होंने मातृभूमि भारत के लिए जिस तरह से अपने जीवन का बलिदान दिया, उसे हमें नहीं भूलना चाहिए| हमें कभी नहीं भूलना चाहिए कि दासता के लंबे अंधेरे समय के दौरान, एक क्षण के लिए भी उन्होंने स्वाधीनता की इच्छा को छोड़ा नहीं|
बापूजी (महात्मा गांधी) के नेतृत्व में जन आंदोलनों के साथ महान राष्ट्रीय जागरण ने स्वाधीनता के संघर्ष को एक नई गति प्रदान की| इसी कारण, आज हमें इस प्रकार के उत्साह के साथ स्वाधीनता दिवस मनाने का सौभाग्य मिला है|
पूरी दुनिया में, स्वाधीनता की अपनी लड़ाई में भारत एकता की अपनी शक्ति के साथ अपना सर ऊंचा किए आगे बढ़ता गया तथा एकजुट होकर अपनी वचनबद्धता और प्रेरणा के साथ अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए इसने संकल्प लिया|
श्री मोदी ने कहा कि कोरोना महामारी के बीच में 130 करोड़ भारतवासियों ने स्वयं को आत्म-निर्भर बनाने के संकल्प लिए| आज प्रत्येक भारतीय के मन में आत्म-निर्भरता अंकित है| हम आत्म-निर्भर भारत के सपनों की अनुभूति का गवाह भी बन रहे हैं| “आत्म-निर्भर भारत” केवल एक शब्द नहीं है, यह 130 करोड़ देशवासियों के लिए एक मंत्र बन चुका है|
हम स्वाधीनता की 75वीं वर्षगांठ से केवल एक क़दम दूर हैं, भारत जैसे देश को अपने दम पर खड़ा होना तथा आत्म-निर्भर बनना आवश्यक है| प्रधानमंत्री ने पूरे विश्वास के साथ कहा कि भारत इस सपने को साकार करेगा| देश के नागरिकों की शक्ति इसकी वजह बनेगी| प्रधानमंत्री ने नागरिकों की प्रतिभा पर गर्व का अनुभव किया| उन्होंने अपने युवाओं तथा देश की अद्वितीय महिला शक्ति में विश्वास भी व्यक्त किया| इतिहास गवाह है कि जब कभी भारत ने कुछ करने का संकल्प लिया है, इसने कर दिखाया है|
श्री मोदी ने कहा कि भारत ने इस कहावत का सदा ही पालन किया है, “समूचा विश्व एक कुटुंब है|” वेद की वाणी है, “वसुधैव कुटुंबकम” तथा विनोबाजी कहा करते थे, “जय जगत” अर्थात विश्व की जय हो| इस प्रकार, पूरा विश्व हमारे लिए एक परिवार है| इसलिए, वित्तीय विकास के साथ-साथ मानवजाति तथा मानवता को भी महत्व दिया जाना चाहिए| हम इस कथन का पालन करते हैं|
आज दुनिया एक दूसरे से जुड़ी हुई है तथा एक दूसरे पर निर्भर है| इसलिए, यह समय की मांग है कि भारत जैसे एक विशाल देश को विश्व की अर्थव्यवस्था में अपने योगदान को बढ़ाना चाहिए| विश्व कल्याण की दिशा में यह भारत का कर्तव्य भी है| अगर भारत अपने योगदान को बढ़ाना चाहता है, तब इसे ख़ुद भी सशक्त बनना होगा| इसे आत्म-निर्भर बनना होगा| हमें विश्व कल्याण के लिए योगदान देने योग्य बनना होगा| अगर हमारी जड़ें मज़बूत होती हैं तथा हम अधिक सक्षम हैं, हम विश्व कल्याण की दिशा में क़दम उठाने के योग्य बनेंगे|
प्रधानमंत्री ने स्वाधीनता दिवस के अपने सम्बोधन में कहा कि हमारे देश में प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधन हैं| समय की मांग है कि देश को नए शिखर तक ले जाने के लिए मानव संसाधनों तथा हमारे प्राकृतिक संसाधनों का हमें मूल्य वर्धन शुरू कर देना चाहिए| उन्होंने कहा कि कब तक हम दुनिया को कच्चे माल का निर्यात करते रहेंगे? कब तक कच्चे माल का निर्यात तथा तैयार सामान का आयात जारी रहेगा? हमें जल्द ही “आत्म-निर्भर” बनना होगा| विश्व की आवश्यकताओं के अनुसार, हमें हमारी क्षमताओं का मूल्य वर्धन करना होगा| यह हमारी ज़िम्मेदारी है|
हमारी शक्ति आत्म-निर्भर की शक्ति में है| कृषि में मूल्य वर्धन इस क्षेत्र के लिए भी आवश्यक है| विश्व की आवश्यकताओं के अनुसार, हमें कृषि क्षेत्र को विकसित करने की आवश्यकता है| हमारे कृषि क्षेत्र के लिए मूल्य वर्धन की आवश्यकता है|
देश कई नई पहल कर रहा है| हम अन्तरिक्ष क्षेत्र को खोल चुके हैं| देश के युवाओं को अवसर मिल रहे हैं| जब अन्तरिक्ष के क्षेत्र में भारत सशक्त बनेगा, तब पड़ोसी देशों को भी इसके लाभ मिलेंगे| अगर, हम ऊर्जा के क्षेत्र में सशक्त बनते है, तो भारत अपने अंधकार को दूर करने की इच्छा रखनेवाले देशों की मदद कर सकेगा| जब देश की स्वास्थ्य संरचना आत्म-निर्भर बनेगी, तब स्वास्थ्य पर्यटन के लिए भारत एक वरीयतावाला देश बनेगा| इस प्रकार, यह देखना आवश्यक है कि विश्व में “मेक इन इंडिया” के उत्पादों को सराहना मिले| प्रधानमंत्री ने कहा कि इस सच्चाई का इतिहास गवाह है कि एक समय था, जब हमारे देश की कुशल मानवशक्ति से निर्मित वस्तुओं की विश्व में सराहना होती थी|
आलेख – पदम सिंह, आकाशवाणी के समाचार विश्लेषक
अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी
Comments
Post a Comment