घबराया हुआ पाकिस्तान

5 राफ़ेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप जैसे ही भारत पहुंची, वैसे ही पाकिस्तान के आधिकारिक तंत्र ने इस मुद्दे पर झूठी चेतावनी देनी शुरू कर दी| पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने असंगत हथियारों को जमा करने से भारत को रोकने के लिए वैश्विक समुदाय से अनुरोध किया है, क्योंकि इससे दक्षिण एशिया में हथियारों की स्पर्धा शुरू हो सकती है| इस प्रकार की कल्पना अतर्कसंगत और हास्यास्पद है|

भारत को राफ़ेल मिल जाने से पाकिस्तान परेशान है| भारतीय वायु सेना में 36 राफ़ेल शामिल किए जाएँगे| 4++ पीढ़ी के परमाणु सक्षम राफ़ेल विमान की प्राप्ति ने भारत के निकटतम पड़ोस के कई देशों को हतोत्साहित कर दिया है|

भारत द्वारा हथियारों के निर्माण करने संबंधी पाकिस्तान का आरोप सही नहीं है, बल्कि इससे इस्लामाबाद की अपरिपक्वता का पता चलता है| भारत अपने सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण कर रहा है| एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में इसे ऐसा करने का अधिकार है| बहरहाल, पाकिस्तान वायु सेना के एफ़-16 से राफ़ेल विमान उन्नत स्तर का है, इसी कारण मामला परिवर्तित हुआ है| राफ़ेल अत्याधुनिक लड़ाकू विमान है, जो विशाल तकनीकी विशेषताओं से सुसज्जित है| पाकिस्तान को जो एफ़-16 विमान अमरीका से मिले हैं, उनकी डिज़ाइन पुरानी है| पहले के मॉडेल के एफ़-16 विमान ए॰आई॰एम॰-120ए/बी उन्नत मध्यम दूरी की हवा से हवा में मार करनेवाली मिसाइल (ए॰एम॰आर॰ए॰एम॰एम॰) से लैस थे, इस मिसाइल की मारक क्षमता 75 किलोमीटर है| लेकिन, 2010 में पाकिस्तान ने 100 किलोमीटर की रेंज के साथ ए॰आई॰एम॰-120सी-5 की एक खेप को प्राप्त किया|

बहरहाल, 4++ पीढ़ी के राफ़ेल विमान नज़र ना आनेवाली और हवा से हवा में मार करनेवाली घातक मिसाइल (बी॰वी॰आर॰ए॰ए॰एम॰), मीटियोर से लैस है| अचानक एफ़-16 समेत पाकिस्तानी विमानों को ए॰एम॰आर॰ए॰एम॰एम॰ से लैस किया गया है, जो सीधे ख़तरे में आती है| बहु-प्रचारित जे॰एफ़॰-17 समेत पाकिस्तान वायु सेना के अन्य विमान राफ़ेल के लिए आसान निशाना है|

मीटियोर मिसाइल का निर्माण एम॰बी॰डी॰ए॰ ने किया है तथा आई॰ए॰एफ़ के लिए यह एक खेल पलटनेवाली मिसाइल है| यहाँ तक कि यू॰के॰ की रॉयल वायु सेना पाँचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ एफ़-35 का संचालन कर रही है, जो मीटियोर मिसाइलों से लैस है|

यह रेडार निर्देशित नज़र को धोखा देनेवाली और हवा से हवा में मार करनेवाली एक सक्रिय मिसाइल (बी॰वी॰आर॰ए॰ए॰एम॰) है तथा इसमे संचालक शक्ति प्रणाली लगी हुई है तथा यह जी॰एम॰बी॰एच॰ के ठोस ईंधन, परिवर्तनशील प्रवाह, डक्टेड रॉकेट सिस्टम का इस्तेमाल करती है, इसे रैमजेट भी कहते हैं| रैमजेट प्रोपल्शन प्रणाली उड़ान के लक्ष्य की दिशा के विभिन्न चरणों में मीटियोर को इसके इंजन को त्वरित योग्यता देती है| हवा से हवा में मार करनेवाली एक मानक मिसाइल में प्रोपल्शन प्रणाली यह विकल्प नहीं देती है|

बड़े स्तर पर “नो एस्केप ज़ोन’ की क्षमता मीटियोर देती है, अर्थात जिस क्षेत्र में निशाना साधा गया है, उस क्षेत्र में गत्यात्मक रूप से प्रहार करने से टाला नहीं जा सकता है या फिर मार गिराने की संभावना बहुत अधिक रहती है| ए॰एम॰आर॰ए॰ए॰एम॰ के 100 किलोमीटर की तुलना में मीटियोर 120 किलोमीटर की एक विस्तारित रेंज रखती है, जो इसे इसके शिकार और ख़राब मौसम में भी लंबी दूरी के ख़तरों को तबाह करने में श्रेष्ठ बनाती है|

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस्लामाबाद में डर केवल राफ़ेल ने नहीं पैदा किया है, बल्कि इसके घातक शस्त्रागार का भी इसमें योगदान है| मीटियोर मिसाइल ए॰एम॰आर॰ए॰ए॰एम॰ से बेहतर है तथा यह एफ़-16 के लिए सीधे ख़तरे की वजह बन सकती है| दशकों से, इस्लामाबाद एफ़-16 की श्रेष्ठता को लेकर डींगें हाँकता रहा है, लेकिन अब आई॰ए॰एफ़॰ के राफ़ेल ने इस्लामाबाद को सही तस्वीर दिखा दी है|

भारत एक ज़िम्मेदार वैश्विक शक्ति होने के कारण, इसने कभी भी अपनी सैन्य शक्ति का घमंड नहीं किया है| लेकिन, वर्तमान समय में बचाव विशेष आवश्यकता है| भारत का रक्षा व्यय 2020-21 के जी॰डी॰पी॰ का केवल 1.5 प्रतिशत है, जबकि, पाकिस्तान ने 2018-19 में अपने जी॰डी॰पी॰ का 4 प्रतिशत सिर्फ़ रक्षा पर व्यय किया है| पाकिस्तान जो समय-समय पर बेलाउट पैकेज की मांग करता है, इस जैसे देश के लिए यह एक बड़ी धनराशि है| भारत अपने जी॰डी॰पी॰ का लगभग 7 प्रतिशत सामाजिक क्षेत्र पर व्यय करता है और पाकिस्तान महत्वपूर्ण सामाजिक क्षेत्र पर केवल 3 प्रतिशत के आस-पास व्यय करता है| कोविड-19 महामारी के दौरान, भारत ने अपने जी॰डी॰पी॰ के 10 प्रतिशत यानि 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की| लेकिन, देश के विशेषज्ञों और आम लोगों ने पाकिस्तान के कोविड-19 के राहत पैकेज को पूरी तरह से अपर्याप्त बताया है|

इसी दौरान, भारत को सदा उपदेश देनेवाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, इमरान ख़ान फिर से राजनीति करने पर उतर आए हैं| वे पाक अधिकृत कश्मीर (पी॰ओ॰के॰) के लोगों के साथ “एकता” का दिखावा करने के लिए मुज़फ्फ़राबाद जाने की योजना बना रहे हैं| आतंकी समूहों का पालन-पोषण करनेवाली आई॰एस॰आई॰ विशेष रूप से भारत पर निशाना साधते हुए, इसके लिए विस्तृत यात्रा कार्यक्रम बना रही है| श्री ख़ान अवैध पी॰ओ॰के॰ की एसेम्बली को प्रयोगात्मक रूप से संबोधित करेंगे| ख़बर है की पाकिस्तान सरकार पी॰ओ॰के॰ के विदेशी पत्रकारों के लिए एक फ़ील्ड ट्रिप का संचालन भी करेगी| बहरहाल, आई॰एस॰आई॰ का आतंकी प्रशिक्षण शिविर हमेशा की तरह अबाध रहेंगे|

आलेख – कौशिक रॉय, आकाशवाणी के समाचार विश्लेषक

अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी

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