भारत-बांग्लादेश के सम्बन्धों में हो रही वृद्धि
भारत के विदेश सचिव, हर्ष वर्धन शृंगला ढाका की दो दिवसीय यात्रा पर थे| वे बांग्लादेश की प्रधानमंत्री, शेख़ हसीना के लिए प्रधानमंत्री मोदी का संदेश लेकर गए थे| भारतीय विदेश सचिव का उन्होंने स्वयं स्वागत किया| कोविड-19 महामारी के प्रसार के मद्देनज़र कई महीनों के बाद, वे पहले विदेशी गणमान्य अतिथि हैं, जिनका उन्होंने स्वयं स्वागत किया है| गत कुछ महीनों में नई दिल्ली तथा ढाका के बीच वर्चुअल बैठकों के माध्यम से द्विपक्षीय चर्चाएं हुई थीं| इस वास्तविकता को ध्यान में रखा जाना चाहिए कि महामारी के कारण दक्षिण एशियाई अर्थव्यवस्थाएँ बहुत बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं, इस परिदृश्य में इस यात्रा का महत्व है| अपनी यात्रा के दौरान, भारतीय विदेश सचिव बांग्लादेश के विदेश मंत्री, ए॰के॰ अब्दुल मोमेन, विदेश राज्य मंत्री, शहरयार आलम तथा विदेश सचिव, मसूद बिन मोमेन से भी मिले|
भारतीय विदेश सचिव तथा बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के बीच चली चार घंटे की लंबी बैठक के दौरान, दोनों देशों ने मौजूदा कनेक्टिविटी नेटवर्क को फिर से शुरू करने, सहयोग करने तथा कोविड-19 टीके के विकास पर एक दूसरे को अवगत कराने के उपायों और तरीक़ों पर चर्चाएं कीं तथा चल रहे “मुजीब बोरशो” समारोह को साझा रूप से सम्पन्न किया| उन्होंने कोविड-19 के बाद की आर्थिक चुनौतियों पर क़ाबू पाने संबंधी रणनीति को आकार देने पर भी चर्चाएं कीं| ध्यातव्य है कि दोनों देश इस चुनौती का सामना कर रहे हैं| भारत ने साझा परामर्श परिषद को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव किया है| यह विदेश मंत्री के स्तर की परिषद है, जो बांग्लादेश में भारत के वित्तपोषणवाली विभिन्न परियोजनाओं का निरीक्षण करती है तथा दोनों देशों के बीच के विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चाएं करती है| फ़रवरी 2019 में जब दोनों देश मिले थे, तब भारत ने प्रक्रिया को फिर से शुरू करने के लिए एक वर्चुअल बैठक का प्रस्ताव किया| व्यवसायियों, सरकारी अधिकारियों तथा भारत में उपचार कराने की इच्छा रखनेवाले लोगों की यात्राओं में सुविधा पहुँचाने के लिए, भारत ने दोनों देशों के बीच एक “एयर बबल” बनाने का भी प्रस्ताव किया है| यहाँ इस बात का उल्लेख करने की आवश्यकता है कि भारत में चिकित्सा उपचार के लिए आनेवाले बांग्लादेशी नागरिकों के मामले में बांग्लादेश अन्य देशों की तुलना में शीर्ष पर है| बांग्लादेश ने अपने देश में कोरोनावायरस के भारतीय टीके के परीक्षण की संभावना पर भी चर्चा की| इस महामारी से लड़ने के अपने प्रयासों में ढाका विश्व के अन्य देशों के साथ इस मामले पर चर्चा कर रहा है|
कोविड-19 के कारण प्रभावित हुए बांग्लादेश के साथ व्यापारिक सम्बन्धों को सामान्य बनाने के लिए जुलाई महीने में भारत ने कई उपाय किए हैं| कोरोनावायरस महामारी के कारण दो महीने से अधिक की काम-बंदी के बाद, जून महीने में दोनों देशों के बीच सीमा-पार व्यापार फिर से शुरु हुई है| अपने अनुदान सहायता कार्यक्रम के अन्तर्गत भारत ने बांग्लादेश को 10 डीज़ल लोकोमोटिव्स सुपुर्द किए| जुलाई महीने में भारत-बांग्लादेश के सम्बन्धों में बहुत सी गतिविधियां हुई हैं| 55 वर्ष पहले बंद होने के बाद, कोलकाता से आगरतला और करीमगंज तक इस्पात बार और दालों को लेकर एक कंटेनर जहाज़ की पहली परीक्षण जलयात्रा का संचालन किया गया| आंध्र प्रदेश के गुंटूर से मिर्ची तथा कपड़े लेकर, पहले “टाइम टेबल्ड” तथा इलेक्ट्रॉनिक रूप से सील 50 रेक का बांग्लादेश के बेनापोल तक परिचालन किया गया| ढुलाई के मौजूदा माध्यम में पार्सल वैन तथा कंटेनर अब जुड़ चुके हैं|
ढाका की एक बड़ी चिंताओं में बांग्लादेश में रोहिङ्ग्या शरणार्थियों की उपस्थिती की चिंता रही है| ढाका ने बार-बार इस ओर भारत को ध्यान दिलाने की कोशिश की है तथा इसने इन विस्थापित लोगों की उपस्थिती के कारण क्षेत्र में बड़े सुरक्षा संकट उत्पन्न होने की संभावना पर बल दिया है| रोहिङ्ग्या शरणार्थियों को वापस लेने के लिए म्यांमार को प्रभावित करने संबंधी भारत को अपने राजनय का प्रयोग करने के लिए ढाका ने भारत से आग्रह किया है| भारत ढाका के प्रयासों के समर्थन में रहा है तथा विभिन्न वक्तव्यों में इसने कहा है कि म्यांमार को रोहिङ्ग्या को वापस लेने की आवश्यकता है| नई दिल्ली भी सम्मान के साथ रोहिङ्ग्या की तुरंत और सुरक्षित स्वदेश वापसी के पक्ष में है| उनकी वापसी में सुविधा पहुंचाने के लिए, भारत ने 250 पूर्वनिर्मित घर भेंट स्वरूप दिये हैं, जिनका निर्माण म्यांमार के साथ हुए एक समझौते के हिस्से के रूप में किया गया है| अभियान “इंसानियत” के अन्तर्गत बांग्लादेशी शरणार्थी शिविरों में रह रहे रोहिङ्ग्या को भारत सहायता भी दे रहा है|
यह आश्चर्य की बात नहीं है कि इस संबंध को प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने “शोनाली अध्याय” के रूप में परिभाषित किया है तथा विदेश मंत्री, डॉ॰ एस॰ जयशंकर ने इस क्षेत्र में इसे एक “रोल मॉडेल” कहा है| इस भावना के अनुरूप बांग्लादेश के विदेश मंत्री, ए॰ के॰ अब्दुल मोमेन ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत के साथ बांग्लादेश के संबंध ऐतिहासिक, चट्टान की तरह मज़बूत और ख़ून के रिश्ते की तरह है| कोविड-19 महामारी के दौरान हुई भारतीय विदेश सचिव की बांग्लादेश यात्रा केवल द्विपक्षीय सम्बन्धों की शक्ति को रेखांकित करती है|
आलेख – डॉ॰ स्मृति एस॰ पटनायक, शोध फैलो, आई॰डी॰एस॰ए॰
अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी
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