विचार-मंडलियों के माध्यम से प्रगाढ़ होते भारत-आसियान के संबंध
भारत की “एक्ट ईस्ट” नीति तथा भारत-प्रशांत दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, आसियान-भारत नेटवर्क विचार मंडलियों (ए॰आई॰एन॰टी॰टी॰) का छठवाँ राउंडटेबल सम्मेलन गत सप्ताह वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया गया था| कोविड काल के बाद में इस वर्ष की चर्चाओं का फ़ोकस “आसियान-भारत” की साझेदारी को सशक्त बनाने पर था|ए॰आई॰एन॰टी॰टी॰ की अवधारणा 2009 में भारत द्वारा की गई थी और इसका उद्देश्य सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर नीति सिफ़ारिशों को प्रस्तुत करते हुए तथा जानकारी के अंतराल को संबोधित करके आसियान-भारत की रणनीतिक साझेदारी को सशक्त बनाना है| विदेश मंत्री, डॉ॰ एस॰ जयशंकर, थाईलैंड के उप-प्रधानमंत्री तथा विदेश मंत्री, दोन प्रमुदविनाइ तथा आसियान के महासचिव, दातो लिम जोक होई ने इस वर्ष के राउंडटेबल सम्मेलन में भागीदारी की|
डॉ॰ जयशंकर ने तर्क दिया कि एक तरफ़ इस महामारी ने गंभीर प्रतिस्पर्धी अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर, तो दूसरी तरफ़ बहुपक्षवाद पर दबाव को बढ़ाया है| सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोविड-19 वैश्विक व्यवस्था को क्या आकार देगा| भारत तथा दक्षिण पूर्व एशिया वैश्वीकरण में आपसी हित रखते हैं| विदेश मंत्री ने अपने भाषण में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए कोविड-19 महामारी से उत्पन्न होनेवाली अभूतपूर्व चुनौतियों को रखांकित किया| वैश्विक अर्थव्यवस्था की अनुमानित हानि 5॰8 से 8॰8 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर के बीच या फिर लगभग 6॰5 से 9॰7 प्रतिशत तक की हो सकती है|
कोविड-19 ने आपूर्ति शृंखला के लचीलेपन तथा विविधता पर चिंताओं के मामले में विश्व की अर्थव्यवस्था में स्वाभाविक जोखिमों को अधिक सुस्पष्ट किया है| आर्थिक सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का एक मुख्य घटक है, जिसमें व्यापार तथा प्रौद्योगिकी शामिल हैं| इस संदर्भ में, डॉ॰ जयशंकर ने आगे कहा कि रणनीतिक स्वायत्तता की संकल्पना वैश्विक आपूर्ति शृंखला में महत्वपूर्ण है तथा इसमें एक व्यापक पुनर्संतुलन बनाने तथा एक न्यायसंगत विश्व की आवश्यकता है| स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना तथा एक आत्म-निर्भर भारत का निर्माण एक वरीयता है| आत्म-निर्भर भारत का दृष्टिकोण तटस्थतावाद या संरक्षणवाद का समर्थन नहीं है, बल्कि यह प्रेरित करता है कि “एक आत्म-निर्भर भारत के पास विश्व को देने के लिए बहुत कुछ है|” एक प्रबल आर्थिक शक्ति के रूप में, आसियान तथा भारत दोनों को कोविड के बाद की दुनिया में एशिया के भविष्य को आकार देने की आवश्यकता है|
थाईलैंड के उप-प्रधानमंत्री तथा विदेश मंत्री, दोन प्रमुदविनाइ ने अपने भाषण में आसियान-भारत की रणनीतिक साझेदारी में “साझा करने के मूल्य” को रेखांकित किया| उन्होंने भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग परियोजना, मानव पूंजी विकास, क्षेत्रीयतावाद तथा उप-क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम समेत आपूर्ति शृंखला, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी तथा मूलभूत संरचनावाले सहयोग के पाँच मुख्य क्षेत्रों के सुझाव दिये| इसके उदाहरण स्वरूप, अयेयावाडी-चोपराया-मेकोंग आर्थिक सहयोग रणनीति (ए॰सी॰एम॰ई॰सी॰एस॰) तथा मेकोंग-गंगा सहयोग (एम॰जी॰सी॰), समुद्री पर्यावरण तथा आपदा प्रबंधन और विषाणु-रोधी औषधि तथा टीके के अनुसंधान तथा विकास को लिया जा सकता है|
हालांकि, ए॰आई॰एन॰टी॰टी॰ का यह संस्करण वर्चुअल था| विगत में हुए चार राउंडटेबल सम्मेलन की मेज़बानी नई दिल्ली, वियेनतियान, हनोई, कुआलालंपुर तथा जकार्ता ने की थी| ए॰आई॰एन॰टी॰टी॰ के इस संस्करण का सह-आयोजन भारत के विदेश मंत्रालय तथा विकासशील देशों के अनुसंधान और सूचना व्यवस्था (आर॰आई॰एस॰),आसियान अध्ययन केंद्र (ए॰एस॰सी॰) तथा चुलालोंगकॉर्न विश्वविद्यालय के सहयोग से थाईलैंड के विदेश मंत्रालय ने किया था| “कोविड-19 काल के बाद आसियान-भारत के सम्बन्धों तथा वैश्विक व्यवस्था के परिवर्तित होते भू-दृश्य” को चर्चा के मुख्य विषयों में शामिल किया गया| “कोविड-19 काल के बाद आसियान तथा भारत के लिए अवसरों के रूप में उभरती मूल्य शृंखला”, “चौथी औद्योगिक क्रान्ति (4आई॰आर॰) में आसियान-भारत की साझेदारी को बढ़ावा देना”, “हिन्द-प्रशांत पर आसियान के दृष्टिकोण (ए॰ओ॰आई॰पी॰) तथा हिन्द-प्रशांत महासागरीय पहल (आई॰पी॰ओ॰आई॰)”, “अनुपूरक तथा सहयोग, आसियान-भारत के सम्बन्धों में आगे के मार्ग हैं|
दक्षिण-पूर्व एशिया भारत की एक्ट ईस्ट नीति का मुख्य स्तम्भ है| एक उन्मुक्त, खुले, समेकित तथा नियम-आधारित हिन्द-प्रशांत व्यवस्था को सुरक्षित बनाना परस्पर हित का मामला है| भारत में आसियान की केन्द्रीयता तथा हिन्द-प्रशांत के प्रति आसियान के दृष्टिकोण जैसे एक समान सिद्धांतों में समानता है तथा दोनों पक्ष समुद्री सहयोग, भौतिक तथा डिजिटल कनेक्टिविटी, ब्लू अर्थव्यवस्था और मानवीय सहायता को सशक्त बनाने के लिए सतत परिश्रम कर रहे हैं| दक्षिण पूर्व एशिया के साथ भारत के रणनीतिक संबंध तीन ‘सी’–वाणिज्य, कनेक्टिविटी तथा संस्कृति पर आधारित है और भारत आसियान-भारत की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के उद्देश्य के साथ आसियान में निवेश करना जारी रखेगा|
आलेख – डॉ॰ तितली बसु, पूर्व तथा दक्षिण-पूर्व एशिया मामलों की रणनीतिक विश्लेषक
अनुवाद- मनोज कुमार चौधरी
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