भारत-उज़्बेकिस्तान के सम्बन्धों में हो रही उत्साहजनक वृद्धि
आर्थिक सम्बन्धों तथा द्विपक्षीय सम्बन्धों को बढ़ाने के एक उपाय के रूप में, इस सप्ताह भारत तथा उज़्बेकिस्तान ने अपनी राष्ट्रीय समन्वय समितियों की पहली बैठक की| इन समितियों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच की सहमति वाली साझा परियोजनाओं के क्रियान्वयन की जांच करना है| इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के विदेश राज्य मंत्री,वी॰ मुरलीधरण तथा उज़्बेकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और निवेश तथा विदेशी व्यापार मंत्री, सरदोर उमूर्ज़ाकोव ने की| स्वास्थ्य तथा यात्रा संबंधी बाधाओं को ध्यान में रखते हुए, इस बैठक का आयोजन ऑनलाइन फ़ॉर्मेट में किया गया था|
विदेश मंत्रालय के एक वक्तव्य के अनुसार, दोनों पक्षों ने व्यापार तथा अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में द्विपक्षीय गतिविधियों की समीक्षा की| उन्होंने द्विपक्षीय निवेश समझौते,तरजीही व्यापार समझौता, कृषि उत्पादों के लिए एक-दूसरे को बाज़ार की पहुँच देना, भारत की ऋण सीमा के अंतर्गत चिन्हित परियोजनाओं के क्रियान्वयन, भारत के गुजरात राज्य तथा उज़्बेकिस्तान के ताशकंद क्षेत्र के बीच के सहयोग तथा ताशकंद में भारत-उज़्बेकिस्तान उद्यमशीलता विकास केंद्र पर हुई बातचीत का जायज़ा भी लिया| उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं में हुई प्रगति पर संतुष्टि जताई तथा आशा जताई कि परियोजनाओं की शीघ्र समाप्ति द्विपक्षीय व्यापार को और बढ़ाएगी|
भारत के पड़ोस में मध्य एशिया तथा इसकी भौगोलिक स्थिति और जनसांख्यिकी के कारण, इस क्षेत्र में उज़्बेकिस्तान एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है| 32 मिलियन लोगों के साथ, इस क्षेत्र में कुल आबादी के लगभग आधे लोग यहाँ रहते हैं| भारत तथा उज़्बेकिस्तान के सम्बन्धों का एक लंबा इतिहास है तथा विभिन्न क्षेत्रों में ये सांस्कृतिक विशेषताओं को साझा करते हैं| दोनों देश रणनीतिक साझेदार हैं तथा हाल के वर्षों में, इनके सम्बन्धों में उत्साहजनक वृद्धि हुई है| प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने 2015 तथा 2016 में उज़्बेकिस्तान की यात्रा की, जबकि अक्तूबर 2018 तथा जनवरी 2019 में राष्ट्रपति, शौकत मिर्ज़ियोएव ने भारत का दौरा किया| जनवरी 2019 में, उज़्बेकिस्तान में भारत-मध्य एशिया के विदेश मंत्रियों के पहले ऐतिहासिक संवाद का आयोजन भी किया गया था| इस संवाद में अफ़ग़ानिस्तान ने भी भागीदारी की थी|
हाल में, भारत तथा उज़्बेकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग में वृद्धि देखने को मिल रही है| नवंबर 2019 में, दोनों देशों ने जवाबी कार्रवाई अभियानों पर फ़ोकस करते हुए, अपने पहले साझा क्षेत्र प्रशिक्षण अभ्यास, दस्लिक-2019 का आयोजन किया था| इसका उद्घाटन भारत के रक्षा मंत्री, राजनाथ सिंह ने किया था, इस सिलसिले में यह उज़्बेकिस्तान का उनका पहला दौरा तो था ही, इसके अलावा, किसी भारतीय रक्षा मंत्री की आधे दशक में हुई यह पहली यात्रा भी थी| सैन्य शिक्षा तथा सैन्य औषधि के क्षेत्र में द्विपक्षीय दस्तावेज़ों पर भी हस्ताक्षर किए गए|
भारत तथा उज़्बेकिस्तान दोनों शंघाई सहयोग संगठन (एस॰सी॰ओ॰) के सदस्य हैं तथा ताशकंद एस॰सी॰ओ॰ के क्षेत्रीय आतंक-रोधी ढांचे (आर॰ए॰टी॰एस॰) का मुख्यालय है|
द्विपक्षीय स्तर पर सौहार्दपूर्ण राजनीतिक संबंध तथा बढ़ते सुरक्षा सहयोग को आर्थिक संबंध के साथ मिलाना होगा| क्षेत्र के लिए प्रत्यक्ष भूमि की पहुँच के अभाव के कारण व्यापार में बाधा उत्पन्न हुई है| भारत एक बड़ी अर्थव्यवस्था है तथा इसे सुरक्षित ऊर्जा स्रोतों की आपूर्ति की आवश्यकता है| ध्यातव्य है कि सुरक्षित ऊर्जा स्रोत मध्य एशिया,विशेषकर उज़्बेकिस्तान में प्रचुर मात्र में उपलब्ध हैं| दूसरी तरफ़, ताशकंद भारत को संभावित निवेशक तथा व्यापार और प्रौद्योगिकी में एक साझेदार के रूप में देखता है| दोनों देश बैंकिंग, आई॰टी॰, ऑटोमोबाइल, धातु उद्योग, औषधि तथा रसायन क्षेत्र में सहयोग को बढ़ा सकते हैं| हालांकि, हाल के वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि हो रही है|जबकि, कोविड-19 ने अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक परिदृश्य को बुरी तरह से प्रभावित किया है| भारत तथा उज़्बेकिस्तान अपने-अपने देशों में महामारी से उपजी स्थिति को नियंत्रित करने में बड़े स्तर पर सफल रहे हैं| इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत ने उज़्बेकिस्तान को चिकित्सा संबंधी आपूर्तियों के अंतर्गत मानवीय सहायता भी दी है|
बढ़ते संबंध दोनों देशों को ज्वलंत मुद्दों के समाधान तलाशने में सहयोग के अवसर प्रदान करते हैं, जिसमें अफ़ग़ानिस्तान की अस्थिरता तथा दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के बीच प्रत्यक्ष संपर्क के मुद्दे शामिल हैं| उज़्बेकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान में शांति लाने में एक सक्रिय हितधारक बन चुका है| यह मज़ार-ए-शरीफ़ से हेरात तक एक रेलवे लाइन का निर्माण कर रहा है| यह लाइन अफ़ग़ानिस्तान के माध्यम से दक्षिण एशिया-मध्य एशिया के व्यापार को संभव बनाएगी| भारत अशगाबत परिवहन गलियारे से जुड़ चुका है तथा यह ईरान के चाबहार बन्दरगाह में निवेश कर रहा है| चाबहार बन्दरगाह के संचालन तथा अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आई॰एन॰एस॰टी॰सी॰) के पूर्ण क्रियान्वयन के साथ व्यापार तथा आर्थिक संबंध का बढ़ना तय है| कनेक्टिविटी पर भारत तथा उज़्बेकिस्तान के साझा प्रयास परस्पर व्यापारिक कारोबार पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं|
आलेख – डॉ॰ अतहर ज़फ़र, सी॰आई॰एस॰ के रणनीतिक विश्लेषक
अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी
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