सड़क मूलभूत संरचना के माध्यम से भारत को सम्बद्ध किया जाना
किसी भी राष्ट्र के लिए सड़कें एक महत्वपूर्ण जीवनरेखा हैं| इसी तरह परिवहन नेटवर्क भी महत्वपूर्ण है| एक देश की विकास की गति वस्तुओं के उत्पादन तथा सेवाओं और उनकी गतिविधियों पर निर्भर करती है| भारत जैसे एक विशाल तथा घनी आबादी वाले राष्ट्र की प्रगति के लिए, नई तथा उन्नत सड़कों का निर्माण महत्व रखता है| सड़कें कनेक्टिविटी देती हैं तथा निर्बाध यातायात के प्रवाह को सुनिश्चित करती हैं|
भारत को “आत्म-निर्भर” बनाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में सरकार द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण सुधारों में सड़क नेटवर्क मूलभूत संरचना का विकास शामिल है| विगत कुछ वर्षों में, भारत की सड़क मूलभूत संरचना में लगातार उन्नति हुई है| कनेक्टिविटी सुधरी है तथा सड़क परिवहन तीव्र विकास का एक उच्च बिन्दु बन चुका है| सड़कें सेवाओं के लिए बेहतर पहुँच, परिवहन की सुगमता तथा लोगों को आवाजाही की स्वतन्त्रता दे रही हैं|
भारत विश्व के सबसे बड़े सड़क नेटवर्कों में से एक है, यह नेटवर्क लगभग 5॰5 मिलियन किलोमीटर तक फैला हुआ है| इसमें राष्ट्रीय तथा राज्य राजमार्ग और शहरी सड़कें शामिल हैं| भारतीय सड़क नेटवर्क में राष्ट्रीय तथा राज्य राजमार्ग, एक्सप्रेसवे, ज़िले की प्रमुख सड़कें तथा शहरी और ग्रामीण सड़कें शामिल हैं| राष्ट्रीय राजमार्ग कुल सड़क नेटवर्क के दो प्रतिशत हैं तथा ये राजमार्ग कुल यातायात के 40 प्रतिशत से अधिक भाग को संभालते हैं|
राजमार्ग नेटवर्क को बढ़ाने के लिए, भारत की भारतमाला परियोजना का उद्देश्य 66,100 किलोमीटर के आर्थिक गलियारे, सीमा तथा तटीय सड़कों और एक्सप्रेसवेज़ का निर्माण करना है| यह परियोजना पर्यटक गंतव्यों, बाइपासों के निर्माण, रिंग रोड के विकास, भीड़ बिन्दुओं तथा चौक की भीड़ में कमी लाने के लिए सड़क कनेक्टिविटी को भी उन्नत बनाएगी|
वाहनों की गति को 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ाकर तथा आपूर्ति शृंखला की लागत 5 से 6 प्रतिशत कम करके, यह परियोजना 550 ज़िलों के लिए चार लेन की कनेक्टिविटी की परिकल्पना करती है| पहले चरण में, 34,800 किलोमीटर के राजमार्गों का विकास करने के लिए 2022 तक यह योजना निवेश के लिए 82 बिलियन डॉलर लाएगी|
वित्त वर्ष 2019-20 में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एन॰एच॰ए॰आई॰) ने 3,979 किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण को पूरा किया है| एक वित्त वर्ष में निर्माण कार्य पूरा करनेवाला यह अब तक का सबसे उच्चतम राजमार्ग है|
एक विश्वसनीय तथा तीव्र सड़क नेटवर्क के महत्व तथा देश के आर्थिक विकास को प्रभावित करने में इसके द्वारा निभाई जानेवाली भूमिका को स्वीकार करते हुए, सरकार पूरे भारत में गुणवत्तापूर्ण सड़कों तथा राजमार्गों का निर्माण कर रही है| सड़क मूलभूत संरचना अंतर्राष्ट्रीय मानकों की बराबरी की होगी|
राष्ट्रीय राजमार्गों की मूलभूत संरचना बढ़ी हुई कनेक्टिविटी और त्वरित गतिशीलता देगी तथा सम-आर्थिक विकास में तेज़ी लाएगी|
सड़क परिवहन तथा राजमार्गों के केन्द्रीय मंत्री, नितिन गडकरी ने 25 अगस्त को मध्य प्रदेश में अन्य 19 परियोजनाओं की आधारशिला रखी तथा 26 राजमार्ग परियोजनाओं का उदघाटन किया| इन परियोजनाओं में एक सड़क की लंबाई 1,361 किलोमीटर है| ये सड़कें उन्नत संपर्क प्रदान करेंगी तथा आर्थिक विकास, रोज़गार और मध्य प्रदेश के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करेंगी|
मध्य प्रदेश सरकार के साथ साझेदारी में, केंद्र सरकार चंबल एक्सप्रेसवे के निर्माण का प्रस्ताव करती है| इस एक्सप्रेसवे का निर्माण सम्पन्न होने से मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में रहनेवाले निर्धनों तथा जनजातीय लोगों को बहुत सुविधा होगी| स्वर्णिम चतुर्भुज के दिल्ली-कोलकाता गलियारे, उत्तर-दक्षिण गलियारा, पूर्व-पश्चिम गलियारा तथा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के साथ यह एक्सप्रेसवे आर-पार कनेक्टिविटी की सुविधा देगा| यह इन क्षेत्रों के आस-पास के ज़िलों के लोगों को रोज़गार प्रदान करेगा|
दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई तथा मुंबई को जोड़नेवाले राजमार्गों के एक नेटवर्क, स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना की शुरुआत भूतपूर्व प्रधानमंत्री, अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी|इस परियोजना पर नए सिरे से बल दिया जा रहा है| सरकार सड़क मूलभूत संरचना को अधिक व्यापक तथा एकीकृत बना रही है| इसे एक-दूसरे के अनुपूरक बनाया जा रहा है-रेल को सड़क के अनुपूरक बनाया जा रहा है, सड़क को समुद्री बन्दरगाह के लिए तथा समुद्री बन्दरगाह के लिए हवाई अड्डे को अनुपूरक बनाया जा रहा है|
ये अंतर-संपर्क रेलवेज़ तथा सड़कमार्गों के बीच, हवाई अड्डे तथा बन्दरगाह के बीच और रेलवे स्टेशन तथा बस स्टेशन के बीच निर्बाध समन्वय को सुनिश्चित करेंगे| हर दिशा की कनेक्टिविटी पर बल दिये जा रहे हैं, चाहे वे हिमालय की चोटियों पर हों या फिर हिन्द महासागर के द्वीपों में हों|
इन अंतर-संपर्कों के साथ, भारत अपनी तटीय मूलभूत संरचना का भी विकास कर रहा है| समूची तटरेखा में चार-लेन की सड़कों के निर्माण की दिशा में एक अत्याधुनिक मूलभूत संरचना के निर्माण पर फ़ोकस होगा, क्योंकि तटरेखाओं का विश्व व्यापार में बहुत अधिक महत्व है| तटीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए, एन॰एच॰ए॰आई॰ ने 1,500 किलोमीटर की सड़क परियोजनाओं की पहचान की है| तटीय मूलभूत संरचना राष्ट्रीय सुरक्षा को सशक्त बनाने में भी मददगार होगी|
आलेख – के॰वी॰ वेंकटसुब्रमन्यन, वरिष्ठ पत्रकार
अनुवाद एवं वाचन – मनोज कुमार चौधरी
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