भारत-मॉरीशस के सम्बन्धों की ऊँचाइयाँ
भारत तथा मॉरीशस ने अपनी विशेष मित्रता का एक और ऐतिहासिक अवसर को मनाया| भारत-मॉरीशस सहयोग तथा साझा मूल्यों का एक प्रतीक, भारत की सहायता से निर्मित पोर्ट लूइस के सर्वोच्च न्यायालय भवन का औपचारिक अधिष्ठापन प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी तथा मॉरीशस के उनके प्रतिपक्ष, प्रविन्द जुगनाथ ने किया| अपने लोकतान्त्रिक व्यवस्थाओं के महत्वपूर्ण स्तम्भ के रूप में भारत तथा मॉरीशस दोनों अपने स्वतंत्र न्यायाधिकरण का सम्मान करते हैं| प्रधानमंत्री मोदी ने आरंभिक अनुमानित लागत में इस परियोजना के समय पर सम्पन्न होने पर संतुष्टि जताई|
श्री मोदी ने कहा कि कुछ महीने पहले ही उन्होंने तथा प्रधानमंत्री जुगनाथ ने साझा रूप से इस द्वीप राष्ट्र की मेट्रो परियोजना तथा एक नए अत्याधुनिक अस्पताल का उद्घाटन किया था| इनमें से दोनों ही परियोजनाएं मॉरीशस के लोगों के लिए उपयोगी साबित हो रही हैं|
मॉरीशस में ही प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास (सागर) से संबन्धित भारत के दृष्टिकोण की बात कही थी| ऐसा इसलिए, क्योंकि मॉरीशस हिन्द महासागर क्षेत्र के लिए भारत के दृष्टिकोण में महत्व रखता है| प्रधानमंत्री ने कहा कि आज मॉरीशस विकास साझेदारियों के लिए भी भारत के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है| उन्होंने महात्मा गांधी के हवाले से कहा, “मैं पूरी दुनिया के मामले में सोचना नहीं चाहता हूँ| मेरी देशभक्ति में सामान्य तौर पर मानव जाति की भलाई शामिल है| इसलिए, भारत की सेवा में मानवता की सेवा शामिल है|” प्रधानमंत्री ने कहा, यह भारत का मार्गदर्शक दर्शन है| भारत विकसित होना चाहता है तथा भारत अपनी स्वयं की विकास आवश्यकताओं में दूसरों की सहायता करना चाहता है|
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास के लिए भारत का दृष्टिकोण मुख्य रूप से मानव-केन्द्रित है| भारत मानवता के कल्याण के लिए काम करना चाहता है| इतिहास ने हमें सिखाया है कि विकास साझेदारी के नाम पर राष्ट्र अधीनता की साझेदारी के लिए बाध्य हुए हैं| इसने औपनिवेशिक तथा राजसी शासन को बढ़ावा दिया| इसने वैश्विक शक्ति के ब्लॉक को भी बढ़ने का मौक़ा दिया तथा इसका ख़ामियाज़ा मानवता को भुगतना पड़ा|
भारत सम्मान, भिन्नता, भविष्य की चिंता और सतत विकास के लिए विकास साझेदारी कर रहा है| विकास सहयोग में भारत का मौलिक सिद्धान्त अपने साझेदारों का सम्मान करना है| विकास के सबक की यह साझेदारी ही भारत की एकमात्र प्रेरणा है| भारत अपनी विकास साझेदारी में किसी तरह की शर्तें नहीं रखता है| यह राजनीतिक या वाणिज्यिक विचार से प्रभावित नहीं होता है|
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विकास साझेदारियाँ भिन्न प्रकार की हैं| वाणिज्य से संस्कृति, ऊर्जा से अभियांत्रिकी, स्वास्थ्य से आवास, आई॰टी॰ से मूलभूत संरचना, खेल से विज्ञान के क्षेत्र में भारत विश्वभर के राष्ट्रों के साथ काम कर रहा है| अगर, भारत अफ़ग़ानिस्तान की संसद भवन के निर्माण में मदद करके सम्मानित हुआ है, तो यह नाइजर के महात्मा गांधी सम्मेलन केंद्र के निर्माण में सहयोग देकर भी गर्व का अनुभव करता है| एक आपातकालीन तथा ट्रॉमा अस्पताल के निर्माण के माध्यम से नेपाल की स्वास्थ्य सेवाओं को उन्नत करने में सहायता करके नई दिल्ली ख़ुश है| इसी प्रकार, सभी नौ प्रान्तों में आपातकालीन एम्ब्युलेंस सेवाओं की शुरुआत करने संबंधी श्रीलंका के प्रयासों को समर्थन देकर भारत गौरवान्वित हुआ है|
श्री मोदी ने कहा कि भारत नेपाल की जिस पाइपलाइन परियोजना पर काम कर रहा है, वह उस देश के पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्द्धता को सुनिश्चित करने में मददगार होगी| इसी प्रकार, मालदीव के 34 द्वीपों में पेय जल तथा स्वच्छता की उपलब्द्धता सुनिश्चित करने की दिशा में योगदान देकर भारत प्रसन्न है| भारत ने अफ़ग़ानिस्तान और गयाना जैसे देशों में स्टेडियम और अन्य सुविधाओं का निर्माण करने में मदद देकर क्रिकेट को लोकप्रिय बनाने की कोशिश की है| श्रीलंका की महत्वपूर्ण आवासीय परियोजना में अग्रणी भूमिका निभाते हुए भारत गर्व का अनुभव करता है| भारतीय प्रधानमंत्री का मानना है कि हमारी विकास साझेदारी हमारे सहयोगी राष्ट्रों की विकास वरीयताओं को दर्शाती है|
श्री मोदी ने कहा कि भविष्य सतत विकास में है| हमारे प्राकृतिक परिवेश के साथ मानवीय आवश्यकताएँ तथा आकांक्षाएँ मतभिन्नता में नहीं रह सकती हैं| इस दर्शन पर आधारित, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आई॰एस॰ए॰) जैसे नए संस्थानों को विकसित करने के लिए भारत ने कोशिशें की हैं|
मॉरीशस के साथ भारत की विशेष साझेदारी में ये सारे मूल्य समाहित हैं| मॉरीशस के साथ भारत न केवल हिन्द महासागर के जलों को साझा करता है, बल्कि अपनापन, संस्कृति और भाषा की एक समान विरासत को भी यह साझा करता है| हमारी मित्रता अतीत से शक्ति ग्रहण करती है और भविष्य की ओर भी देखती है| भारत को मॉरीशस के लोगों की उपलब्धियों पर गर्व है| इसे मॉरीशस द्वारा बनाए गए पवित्र आप्रवासी घाट की संकरी सीढ़ियों से लेकर आधुनिक भवनों पर गर्व है| यह कठिन परिश्रम तथा नवाचार के माध्यम से सफल रहा है| मॉरीशस का उत्साह प्रेरित करता है| आनेवाले वर्षों में भारत की साझेदारी का और बढ़ना निश्चित है|
आलेख – पदम सिंह, आकाशवाणी के समाचार विश्लेषक
अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी
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