रक्षा उत्पादन में भारत की लंबी छलांग लगाने की योजना
रक्षा उत्पादन तथा निर्यात नीति (डी॰पी॰ई॰पी॰) के प्रारूप के साथ, भारत ने रक्षा आपूर्ति शृंखला के एक बड़े उत्पादन पर ध्यान केन्द्रित किया है| 2025 तक, वन-फ़िफ्थ निर्यात किए जाने के साथ, इस मसौदे में देश में 25 बिलियन डॉलर के रक्षा उत्पादन के आकार को निर्धारित किया गया है| चूंकि, भारत रक्षा उत्पादन का तीसरा आयातक देश है, अब भारत ने आत्मनिर्भर (सेल्फ़ रिलायंस) की कथित नीति में विश्वास रखने का उद्देश्य निर्धारित किया|
रक्षा मंत्रालय ने विभिन्न हितधारकों की टिप्पणियों के लिए पब्लिक डोमेन में 2020 के रक्षा उत्पादन तथा निर्यात संवर्धन नीति का प्रस्ताव किया है| अगले तीन हफ़्तों में, मंत्रालय इस मसौदे पर होनेवाली चर्चा के लिए हितधारकों को शामिल करेगा| नीति दस्तावेज़ रक्षा तथा एयरोस्पेस के लिए विश्व में एक शीर्ष स्तर के देश के रूप में उभरने के लिए इसका मार्ग-दर्शन करेगा|
भारत द्वारा इस वर्ष की शुरुआत में रक्षा क्षेत्र में 74 प्रतिशत की प्रत्यक्ष विदेश निवेश की अनुमति दिये जाने के बाद, यह मसौदा नीति आई है| इस निवेश की सीमा 49 प्रतिशत से बढ़ाते हुए, वित्त मंत्री, निर्मला सीतारामन ने उचित ही कहा कि नीति निर्णय आत्म-निर्भर भारत के उद्देश्य के अनुरूप है| सरकार घरेलू उत्पादन से प्राप्त कुछ विशेष मंचों तथा रक्षा हथियारों को सूचीबद्ध करेगी| यह क़दम आत्म-निर्भर के उद्देश्य को और बल प्रदान करेगा|
इसके अतिरिक्त, मसौदा नीति दस्तावेज़ ऐसे समय में आया है, जब भारत उन्नत सैन्य साज़ों-सामान तथा मंचों के साथ सशस्त्र बलों का सशक्तिकरण कर रहा है| राफ़ेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप की प्राप्ति निर्णय लेने की प्रक्रिया में स्पष्टता की पुष्टि करती है|
मसौदा के घोषित उद्देश्य में एयरोस्पेस तथा नौसैनिक जहाज़ों के निर्माण के साथ वैश्विक स्तर के एक प्रतिस्पर्धी रक्षा उद्योग का निर्माण शामिल है| वास्तव में, अनुसंधान तथा विकास वैश्विक स्वीकृति प्राप्त करने के मूल में है तथा मसौदा नीति स्वदेशी नवाचारों पर अधिक बल देती है| इस महत्वकांक्षी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए, मसौदा दस्तावेज़ घरेलू ख़रीद सुधार का उचित वचन देता है| यह एक स्वागत योग्य क़दम भी है, क्योंकि नीति दस्तावेज़ “स्टार्ट-अप्स” तथा छोटे और मझोले उद्यमों में विश्वास रखता है| निजी क्षेत्र के लिए अन्तरिक्ष क्षेत्र को खोलने संबंधी निर्णय के साथ, मसौदा दस्तावेज़ देश की मांगों को पूरा करने के लिए स्वदेशी प्रयासों को प्रोत्साहित करने के इरादे को वास्तव में प्रदर्शित करता है|
पूर्व में, सरकार ने आयुध निर्माणी बोर्ड को निगमीकृत करने के इरादे को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया था| यह वैश्विक रक्षा आपूर्ति शृंखला में एक महत्वपूर्ण भूमिका प्राप्त करने के उद्देश्य को प्राप्त करने के प्रति श्रेष्ठ प्रबंधन के अभ्यासों को हासिल करने की दिशा में बढ़ाया गया एक क़दम है|
यह स्मरण करने लायक है कि हाल ही में, सरकार ने 20 लाख करोड़ के आत्मनिर्भर पैकेज की घोषणा की, जिसमें रक्षा क्षेत्र में भी “मेक इन इंडिया” पहल पर अधिक बल दिया गया है| इस पैकेज ने एम॰एस॰एम॰ई॰ क्षेत्र के लिए बहुत से वित्तीय प्रोत्साहनों की पेशकश की, जिसे मसौदा दस्तावेज़ में 2025 तक 25 बिलियन के रक्षा उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त करने में निर्णायक माना गया है| देश में एम॰एस॰एम॰ई॰ क्षेत्र सबसे अधिक रोज़गार भी देता है| मसौदा दस्तावेज़ में निर्धारित रूपरेखा देश में रोज़गार सृजन पर गुणक प्रभाव छोड़ती है| इस कारण, आनेवाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था सुदृढ़ भी होगी|
यह ध्यान दिये जाने योग्य है कि मेक इन इंडिया पहल ने मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक में बहुत अच्छे परिणाम दिये हैं, जिसमें मोबाइल फ़ोन का निर्माण शामिल है| अब कुल मांग के 65 प्रतिशत से अधिक टेलीविज़न सेट देश में ही निर्मित हो रहे हैं| अभी टेलीविज़न सेट के आयात को प्रतिबंधित सूची में रखा गया है| सरकार ने पहले ही कहा है कि यह विशिष्ट घरेलू ख़रीद के लिए हथियारों की सूची को बढ़ाना जारी रखेगी, जो निश्चित रूप से एम॰एस॰एम॰ई॰ तथा स्टार्ट-अप्स को सशक्त बनाएगा|
इस वर्ष मार्च में प्रकाशित, स्टॉकहोम अंतर्राष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने 2017-18 के अपने 4,682 करोड़ के रक्षा निर्यात को 100 प्रतिशत बढ़ाकर 2018-19 में 10,745 करोड़ कर दिया| यह रिपोर्ट मसौदा रक्षा उत्पादन तथा निर्यात नीति को अधिक यथार्थवादी बनाती है|
आलेख – मनीष आनंद, वरिष्ठ विशेष संवाददाता
अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी
रक्षा मंत्रालय ने विभिन्न हितधारकों की टिप्पणियों के लिए पब्लिक डोमेन में 2020 के रक्षा उत्पादन तथा निर्यात संवर्धन नीति का प्रस्ताव किया है| अगले तीन हफ़्तों में, मंत्रालय इस मसौदे पर होनेवाली चर्चा के लिए हितधारकों को शामिल करेगा| नीति दस्तावेज़ रक्षा तथा एयरोस्पेस के लिए विश्व में एक शीर्ष स्तर के देश के रूप में उभरने के लिए इसका मार्ग-दर्शन करेगा|
भारत द्वारा इस वर्ष की शुरुआत में रक्षा क्षेत्र में 74 प्रतिशत की प्रत्यक्ष विदेश निवेश की अनुमति दिये जाने के बाद, यह मसौदा नीति आई है| इस निवेश की सीमा 49 प्रतिशत से बढ़ाते हुए, वित्त मंत्री, निर्मला सीतारामन ने उचित ही कहा कि नीति निर्णय आत्म-निर्भर भारत के उद्देश्य के अनुरूप है| सरकार घरेलू उत्पादन से प्राप्त कुछ विशेष मंचों तथा रक्षा हथियारों को सूचीबद्ध करेगी| यह क़दम आत्म-निर्भर के उद्देश्य को और बल प्रदान करेगा|
इसके अतिरिक्त, मसौदा नीति दस्तावेज़ ऐसे समय में आया है, जब भारत उन्नत सैन्य साज़ों-सामान तथा मंचों के साथ सशस्त्र बलों का सशक्तिकरण कर रहा है| राफ़ेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप की प्राप्ति निर्णय लेने की प्रक्रिया में स्पष्टता की पुष्टि करती है|
मसौदा के घोषित उद्देश्य में एयरोस्पेस तथा नौसैनिक जहाज़ों के निर्माण के साथ वैश्विक स्तर के एक प्रतिस्पर्धी रक्षा उद्योग का निर्माण शामिल है| वास्तव में, अनुसंधान तथा विकास वैश्विक स्वीकृति प्राप्त करने के मूल में है तथा मसौदा नीति स्वदेशी नवाचारों पर अधिक बल देती है| इस महत्वकांक्षी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए, मसौदा दस्तावेज़ घरेलू ख़रीद सुधार का उचित वचन देता है| यह एक स्वागत योग्य क़दम भी है, क्योंकि नीति दस्तावेज़ “स्टार्ट-अप्स” तथा छोटे और मझोले उद्यमों में विश्वास रखता है| निजी क्षेत्र के लिए अन्तरिक्ष क्षेत्र को खोलने संबंधी निर्णय के साथ, मसौदा दस्तावेज़ देश की मांगों को पूरा करने के लिए स्वदेशी प्रयासों को प्रोत्साहित करने के इरादे को वास्तव में प्रदर्शित करता है|
पूर्व में, सरकार ने आयुध निर्माणी बोर्ड को निगमीकृत करने के इरादे को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया था| यह वैश्विक रक्षा आपूर्ति शृंखला में एक महत्वपूर्ण भूमिका प्राप्त करने के उद्देश्य को प्राप्त करने के प्रति श्रेष्ठ प्रबंधन के अभ्यासों को हासिल करने की दिशा में बढ़ाया गया एक क़दम है|
यह स्मरण करने लायक है कि हाल ही में, सरकार ने 20 लाख करोड़ के आत्मनिर्भर पैकेज की घोषणा की, जिसमें रक्षा क्षेत्र में भी “मेक इन इंडिया” पहल पर अधिक बल दिया गया है| इस पैकेज ने एम॰एस॰एम॰ई॰ क्षेत्र के लिए बहुत से वित्तीय प्रोत्साहनों की पेशकश की, जिसे मसौदा दस्तावेज़ में 2025 तक 25 बिलियन के रक्षा उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त करने में निर्णायक माना गया है| देश में एम॰एस॰एम॰ई॰ क्षेत्र सबसे अधिक रोज़गार भी देता है| मसौदा दस्तावेज़ में निर्धारित रूपरेखा देश में रोज़गार सृजन पर गुणक प्रभाव छोड़ती है| इस कारण, आनेवाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था सुदृढ़ भी होगी|
यह ध्यान दिये जाने योग्य है कि मेक इन इंडिया पहल ने मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक में बहुत अच्छे परिणाम दिये हैं, जिसमें मोबाइल फ़ोन का निर्माण शामिल है| अब कुल मांग के 65 प्रतिशत से अधिक टेलीविज़न सेट देश में ही निर्मित हो रहे हैं| अभी टेलीविज़न सेट के आयात को प्रतिबंधित सूची में रखा गया है| सरकार ने पहले ही कहा है कि यह विशिष्ट घरेलू ख़रीद के लिए हथियारों की सूची को बढ़ाना जारी रखेगी, जो निश्चित रूप से एम॰एस॰एम॰ई॰ तथा स्टार्ट-अप्स को सशक्त बनाएगा|
इस वर्ष मार्च में प्रकाशित, स्टॉकहोम अंतर्राष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने 2017-18 के अपने 4,682 करोड़ के रक्षा निर्यात को 100 प्रतिशत बढ़ाकर 2018-19 में 10,745 करोड़ कर दिया| यह रिपोर्ट मसौदा रक्षा उत्पादन तथा निर्यात नीति को अधिक यथार्थवादी बनाती है|
आलेख – मनीष आनंद, वरिष्ठ विशेष संवाददाता
अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी
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