पाकिस्तान आंतरिक झगड़े का सामना कर रहा है
पाकिस्तान सरकार ने घरेलू स्तर पर ख़ुद को मज़बूत बनाने के लिए एक अन्य व्यर्थ, निरर्थक तथा हास्यास्पद प्रयास किया है| पाकिस्तान ने एक नया "मानचित्र" तैयार किया है, जिसमें भारतीय राज्य गुजरात, संघ शासित प्रदेश जम्मू तथा कश्मीर और लद्दाख कुछ हिस्से को शामिल कर लिया है|
पाकिस्तान के मंत्रिमंडल ने इस तथाकथित "मानचित्र" की स्वीकृति दी है तथा बाद में इसे मीडिया के सामने लाया गया| नया "मानचित्र" स्वयं इसके अपने नागरिकों के लिए ही हंसी का कारण बना हुआ है| इस "मानचित्र" को संघीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद जारी किया गया है| पूर्व में, विदेश मंत्री, शाह मेहमूद क़ुरेशी ने विदेश कार्यालय में एक बैठक के दौरान विपक्षी पार्टियों के विधायकों को इसकी जानकारी दी थी|
भारत ने पाकिस्तान के दावे को पूरी तरह से ख़ारिज़ कर दिया है| भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान के तथाकथित “राजनीतिक मानचित्र” को देखा है, जिसे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, इमरान ख़ान ने जारी किया है| यह राजनीतिक अर्थहीनता का एक प्रयोग है, जिसके अंतर्गत भारतीय राज्य गुजरात तथा हमारे संघ शासित प्रदेश जम्मू तथा कश्मीर और लद्दाख के इलाक़ों पर असमर्थनीय दावेदारी की गई है| ये हास्यास्पद दावेदारियाँ ना ही क़ानूनी रूप से वैध है और ना ही इसकी कोई अंतर्राष्ट्रीय विश्वसनीयता है| वास्तव में, क्षेत्रीय सीमा-पार आतंकवाद में बढ़ोतरी के समर्थन के साथ, यह नया प्रयास केवल पाकिस्तान की सनक की वास्तविकता को पुष्ट करता है|
इसी दौरान, पाकिस्तान के विभिन्न वर्गों में अशांति जारी है, जबकि आज की सरकार तमाशा करने में व्यस्त है| बलूच तथा सिंध समूह सरकार के विरुद्ध एक यूनाइटेड फ़्रंट का गठन करने को लेकर एकजुट हुए हैं| विभिन्न बलूची समूहों का समूह, बलूच राज अजोई संगार (बी॰आर॰ए॰एस॰) तथा सिंधुदेश रिवोल्यूशनरी आर्मी (एस॰आर॰ए॰) पाकिस्तान के विरुद्ध एक साझा मोर्चा खोलने के लिए हाथ मिला चुके हैं| हाल ही में, इस फ़्रंट की एक गुप्त स्थान पर बैठक हुई है| इस बैठक में भागीदारों ने इस बात पर सहमति जताई कि सदियों से सिंध तथा बलूच राष्ट्रों के राजनीतिक, ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक संबंध रहे हैं| इन्हें सदियों पुराने सम्बन्धों को पुनर्जीवित करना चाहिए|
पाकिस्तान राज्य के गठन के बाद, इसकी उतरोत्तर सरकारों ने सिंधियों तथा बलूचियों के विरुद्ध हमेशा भेदभाव किया है| सिंध तथा बलूचिस्तान प्रांतों की स्थिति इतनी ख़राब है कि दोनों ही स्वतंत्र राष्ट्र होना चाहते हैं|
फ़्रंट ने कहा कि 60 बिलियन डॉलर की लागत के चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सी॰पी॰ई॰सी॰) ने दोनों ही प्रान्तों को प्रभावित किया है तथा सिंधी और बलूची चीन के विस्तारवादी तथा दमनकारी संकल्प को लेकर संदेह में हैं| भविष्य में इन्हें चीन की अधीनता स्वीकार करने का डर सता रहा है|
इसे जाना जाना चाहिए कि सिंध और बलूचिस्तान दोनों के विशाल समुद्र तट हैं तथा ये दोनों व्यापक स्तर पर हिन्द महासागर से जुड़े हुए हैं| बलूचियों और सिंधियों का मानना है कि लंबे समुद्र तट रणनीतिक महत्व के हैं|
गुप्त स्थान पर हुई बैठक में, सिंधी और बलूची फ़्रंट के भागीदारों ने यह भी कहा कि सिंधी हज़ारों वर्ष पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता के संरक्षक हैं| बलूचियों का भी हज़ारों वर्ष पुराना इतिहास है| मेहरगढ़ सभ्यता बलूची लोगों की विरासत है| समूचे इतिहास में सिंधियों और बलूचियों ने विभिन्न विजेताओं और लूटेरों से अपनी ज़मीन, सभ्यता तथा स्वतन्त्रता की रक्षा की है|
बहरहाल, पाकिस्तान के गठन के बाद, इनके साथ दूसरे दर्जे के नागरिकों की तरह व्यवहार किया गया| यहाँ तक कि 21वीं सदी में भी, इनके अधिकार अन्य पाकिस्तानी नागरिकों की तरह नहीं हैं| दोनों प्रान्तों में अनियंत्रित भ्रष्टाचार, कुनबा–परस्ती तथा अन्य बुराइयाँ हैं| सिंधी और बलूची युवाओं की बेरोज़गारी ने दोनों प्रान्तों में सामाजिक झगड़ों को हवा दी है|
सिंधी और बलूच फ़्रंट के नेता पाकिस्तानी सरकार की लूट और दमन के विरुद्ध साझा मोर्चा खोलने पर सहमत हुए हैं| सिंधी-बलूच फ़्रंट अन्य उत्पीड़ित राष्ट्रों तथा प्रतिरोधी संगठनों के साथ संपर्क स्थापित करने की प्रक्रिया में है| समस्या के समाधान की तलाश में ये विश्व की विभिन्न सरकारों तथा यू॰एन॰ के साथ संपर्क साधने की कोशिश भी कर रहे हैं|
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, इमरान ख़ान को “नया पाकिस्तान” बनाने पर फ़ोकस करना चाहिए| ध्यातव्य है कि यह उनका चुनावी वादा था| काल्पनिक “मानचित्र” का अनावरण करने में समय नष्ट करने के बजाय, श्री ख़ान को सिंध और बलूचिस्तान के घावों को भरने के लिए मरहम की व्यवस्था करनी चाहिए|
आलेख – कौशिक रॉय, आकाशवाणी के समाचार विश्लेषक
अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी
पाकिस्तान के मंत्रिमंडल ने इस तथाकथित "मानचित्र" की स्वीकृति दी है तथा बाद में इसे मीडिया के सामने लाया गया| नया "मानचित्र" स्वयं इसके अपने नागरिकों के लिए ही हंसी का कारण बना हुआ है| इस "मानचित्र" को संघीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद जारी किया गया है| पूर्व में, विदेश मंत्री, शाह मेहमूद क़ुरेशी ने विदेश कार्यालय में एक बैठक के दौरान विपक्षी पार्टियों के विधायकों को इसकी जानकारी दी थी|
भारत ने पाकिस्तान के दावे को पूरी तरह से ख़ारिज़ कर दिया है| भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान के तथाकथित “राजनीतिक मानचित्र” को देखा है, जिसे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, इमरान ख़ान ने जारी किया है| यह राजनीतिक अर्थहीनता का एक प्रयोग है, जिसके अंतर्गत भारतीय राज्य गुजरात तथा हमारे संघ शासित प्रदेश जम्मू तथा कश्मीर और लद्दाख के इलाक़ों पर असमर्थनीय दावेदारी की गई है| ये हास्यास्पद दावेदारियाँ ना ही क़ानूनी रूप से वैध है और ना ही इसकी कोई अंतर्राष्ट्रीय विश्वसनीयता है| वास्तव में, क्षेत्रीय सीमा-पार आतंकवाद में बढ़ोतरी के समर्थन के साथ, यह नया प्रयास केवल पाकिस्तान की सनक की वास्तविकता को पुष्ट करता है|
इसी दौरान, पाकिस्तान के विभिन्न वर्गों में अशांति जारी है, जबकि आज की सरकार तमाशा करने में व्यस्त है| बलूच तथा सिंध समूह सरकार के विरुद्ध एक यूनाइटेड फ़्रंट का गठन करने को लेकर एकजुट हुए हैं| विभिन्न बलूची समूहों का समूह, बलूच राज अजोई संगार (बी॰आर॰ए॰एस॰) तथा सिंधुदेश रिवोल्यूशनरी आर्मी (एस॰आर॰ए॰) पाकिस्तान के विरुद्ध एक साझा मोर्चा खोलने के लिए हाथ मिला चुके हैं| हाल ही में, इस फ़्रंट की एक गुप्त स्थान पर बैठक हुई है| इस बैठक में भागीदारों ने इस बात पर सहमति जताई कि सदियों से सिंध तथा बलूच राष्ट्रों के राजनीतिक, ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक संबंध रहे हैं| इन्हें सदियों पुराने सम्बन्धों को पुनर्जीवित करना चाहिए|
पाकिस्तान राज्य के गठन के बाद, इसकी उतरोत्तर सरकारों ने सिंधियों तथा बलूचियों के विरुद्ध हमेशा भेदभाव किया है| सिंध तथा बलूचिस्तान प्रांतों की स्थिति इतनी ख़राब है कि दोनों ही स्वतंत्र राष्ट्र होना चाहते हैं|
फ़्रंट ने कहा कि 60 बिलियन डॉलर की लागत के चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सी॰पी॰ई॰सी॰) ने दोनों ही प्रान्तों को प्रभावित किया है तथा सिंधी और बलूची चीन के विस्तारवादी तथा दमनकारी संकल्प को लेकर संदेह में हैं| भविष्य में इन्हें चीन की अधीनता स्वीकार करने का डर सता रहा है|
इसे जाना जाना चाहिए कि सिंध और बलूचिस्तान दोनों के विशाल समुद्र तट हैं तथा ये दोनों व्यापक स्तर पर हिन्द महासागर से जुड़े हुए हैं| बलूचियों और सिंधियों का मानना है कि लंबे समुद्र तट रणनीतिक महत्व के हैं|
गुप्त स्थान पर हुई बैठक में, सिंधी और बलूची फ़्रंट के भागीदारों ने यह भी कहा कि सिंधी हज़ारों वर्ष पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता के संरक्षक हैं| बलूचियों का भी हज़ारों वर्ष पुराना इतिहास है| मेहरगढ़ सभ्यता बलूची लोगों की विरासत है| समूचे इतिहास में सिंधियों और बलूचियों ने विभिन्न विजेताओं और लूटेरों से अपनी ज़मीन, सभ्यता तथा स्वतन्त्रता की रक्षा की है|
बहरहाल, पाकिस्तान के गठन के बाद, इनके साथ दूसरे दर्जे के नागरिकों की तरह व्यवहार किया गया| यहाँ तक कि 21वीं सदी में भी, इनके अधिकार अन्य पाकिस्तानी नागरिकों की तरह नहीं हैं| दोनों प्रान्तों में अनियंत्रित भ्रष्टाचार, कुनबा–परस्ती तथा अन्य बुराइयाँ हैं| सिंधी और बलूची युवाओं की बेरोज़गारी ने दोनों प्रान्तों में सामाजिक झगड़ों को हवा दी है|
सिंधी और बलूच फ़्रंट के नेता पाकिस्तानी सरकार की लूट और दमन के विरुद्ध साझा मोर्चा खोलने पर सहमत हुए हैं| सिंधी-बलूच फ़्रंट अन्य उत्पीड़ित राष्ट्रों तथा प्रतिरोधी संगठनों के साथ संपर्क स्थापित करने की प्रक्रिया में है| समस्या के समाधान की तलाश में ये विश्व की विभिन्न सरकारों तथा यू॰एन॰ के साथ संपर्क साधने की कोशिश भी कर रहे हैं|
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, इमरान ख़ान को “नया पाकिस्तान” बनाने पर फ़ोकस करना चाहिए| ध्यातव्य है कि यह उनका चुनावी वादा था| काल्पनिक “मानचित्र” का अनावरण करने में समय नष्ट करने के बजाय, श्री ख़ान को सिंध और बलूचिस्तान के घावों को भरने के लिए मरहम की व्यवस्था करनी चाहिए|
आलेख – कौशिक रॉय, आकाशवाणी के समाचार विश्लेषक
अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी
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