भारत-अफ्रीकी भागीदारी का 15 वां डिजिटल सम्मेलन
विदेश मंत्रालय तथा वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के सहयोग से, भारत-अफ्रीकी साझेदारी पर, 15 वां भारतीय उद्योग परिसंघ और एक्ज़िम बैंक डिजिटल सम्मेलन दिल्ली में आयोजित की गया। सम्मेलन को कोविड -19 महामारी के कारण वीडियों कांफ्रेन्सिग के माध्यम से आयोजित किया गया। इसमें अफ्रीका और भारत दोनों देशों के बीच साझेदारी को मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से भुमिका बनाने वालें प्रतिष्ठित गणमान्य लोगों की भागीदारी देखी गई। कुछ क्षेत्रों में कटौती करते हुए बैठक में, दोनों देशों के आर्थिक सम्बंधो को मजबूत करने के लिए रणनीति की नयी रूपरेखा तैयार करने वालें अफ्रीका और भारत के वरिष्ठ मंत्रियों, नीति निर्माताओं और व्यापार जगत के नेताओं को आभासी मंच प्रदान किया गया।
यह साझेदारी नई सफलता प्राप्त करने की कगार पर है। यह 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा युगांडा की संसद में दिये भाषण में बताये गये भारत-अफ्रीका सम्बंधों के10 मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुरूप है ।
अफ्रीका के 500 से अधिक प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में भाग लिया। उद्घाटन सत्र में लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो के प्रधानमंत्री, श्री सिल्वेस्ट्रे इलुंगा, मॉरीशस के उप-प्रधानमंत्री, डॉ. मोहम्मद अनवर हुस्नू, केन्या के विदेश मामलों की कैबिनेट सचिव, सुश्री रेचेल अवूर ओमाओ, तथा नाइजीरिया के उद्योग, व्यापार और निवेश मंत्री, ओटुनबा नियि अदेबायो मुख्य अतिथि थे।
उल्लेखनीय है कि अफ्रीका, भारतीय विदेश नीति में, पारंपरिक रूप से ध्यानाकृष्ण एक विशेष का केंद्र रहा है। 1990 के दशक के बाद से, भारत ने इस महाद्वीप के साथ अपने सम्बंधों में व्यापक रूप से विस्तार किया है। तीन शिखर सम्मेलन, और व्यापार तथा निवेश में जारी विस्तार भारत की विदेश नीति में, अफ्रीकी महाद्वीप के बढते महत्व को प्रदर्शित करते हैं।
इसके अलावा, साल 2000 से अफ्रीका की नई आर्थिक गतिविधियों में आ रही तेजी और साथ ही साथ, भारत की पहले से ही एक बड़ी अर्थव्यवस्था बनने को अग्रसर छवि ने भारत-अफ्रीका द्विपक्षीय साझेदारी को बढ़ाया है। आज अफ्रीका में न केवल एक विशाल बाजार और व्यापार के लिए अवसरों में विस्तार हुआ है बल्कि यह खनिजों, प्राकृतिक संसाधनों और कृषि के माल असबाब का खजाना भी है।सम्मेलन में इन पहलों को अफ्रीका के साथ दीर्घकालिक जुड़ाव और भारत-अफ्रीकी आर्थिक साझेदारी के फलक के विस्तार के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता के दृष्टिकोण को व्यापक बनाने के तौर पर दिखाया गया है।भारत के विदेश मंत्री, डॉ. एस. जयशंकर के उद्घाटन भाषण से यह पता चलता है कि भारत, अफ्रीका में बाजार खोलने और भारतीय उद्योगों को निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भारत और अफ्रीका के बीच बढ़ते सम्बंधों की सराहना की और आर्थिक विकास के लिए अफ्रीकी देशों द्वारा किये जा रहे प्रयासों में सहयोग करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। डॉ. जयशंकर ने विकास साझेदारी, व्यापार और निवेश तथा लोगों से लोगों के मजबूत सम्बंधों के चार स्तंभों की अवधारणा को लेकर अफ्रीका के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया, जिसमें विशेष रूप से युवा अफ्रीकियों के लिए शिक्षा और क्षमता निर्माण के क्षेत्र और हाल ही में रक्षा और समुद्री सुरक्षा शामिल हैं। भारत ने 37 अफ्रीकी देशों में 194 परियोजनाएं शुरू की हैं। इनमें आधारभूत संरचना से लेकर आईसीटी(ICT,), बिजली उत्पादन और पानी का वितरण तथा सिंचाई, रेलवे से लेकर सड़क, कृषि से लेकर चीनी संयंत्र तक शामिल हैं। विदेश मंत्री ने विस्तार से बताया कि कैसे भारतीय निवेश के बलबूते पर अफ्रीकी देशों में कई क्षेत्रों में हजारों नौकरियां पैदा की हैं। उन्होंने भारत को अफ्रीका का सबसे दृढ़ साथी बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय परियोजनाएं हमेशा "स्थानीय समुदायों से कुछ हासिल करने के बजाय उन्हें सशक्त" करती हैं और सतत विकास सुनिश्चित करती हैं। यह चीन पर कटाक्ष ही कहा जाएगा। अपने संबोधन की समाप्त पर उन्होंने यह माना कि 21 वीं सदी में, रक्षा और सुरक्षा सहयोग भारत-अफ्रीकी साझेदारी का एक प्रमुख स्तंभ है।
कोविड 19 महामारी संकट चरम पर पहुंचने के दौरान, विभिन्न अफ्रीकी देशों में डॉक्टरों के दलों, दवा और चिकित्सा उपकरण तथा खाद्यान्न भेजने के लिए अफ्रीकी गणमान्य व्यक्तियों ने भारत की उदारता की प्रशंसा की। 2009 से, भारत ने पैन-अफ्रीका ई-नेटवर्क परियोजना के माध्यम से अफ्रीकी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कई बड़ी पहल की हैं। अफ्रीका सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सक्रिय रूप से अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए भारत से मदद मांग रहा है, खासकर उस मध्यम वर्ग के लिए जो बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को प्राप्त करने के लिये दूसरें देशों में नहीं जा सकते हैं। अफ्रीकी देश स्वास्थ्य सेवाओं की लागत में कमी लाने के लिए टेलीमेडिसिन को शामिल करने की संभावना को भी देख रहे हैं। अफ्रीकी गणमान्य लोगों ने डिजिटल वैज्ञानिक अनुसंधान, अंतरिक्ष विज्ञान और उपग्रह विकास कार्यक्रम के साथ-साथ फार्मास्यूटिकल्स और विनिर्माण के क्षेत्रों में भारत-अफ्रीका सहयोग पर जोर दिया।सम्मेलन में कृषि, स्वास्थ्य सेवा, औषध, बिजली और ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, विनिर्माण, वित्त, शिक्षा और कौशल विकास क्षेत्रों में सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई।
भारत-अफ्रीकी साझेदारी पर 15 वें डिजिटल सम्मेलन ने कई नई सीमा-पार साझेदारियों के पनपने के लिए रास्ता तैयार किया है। 2005 में इसकी शुरुआत के बाद से, यह सम्मेलन, भारत और अफ्रीका के बीच साझेदारी और आर्थिक सम्बंध बढ़ाने में एक प्रवर्तक के रूप में उभरा है।
आलेख : प्रो. अपराजिता बिस्वास, पूर्व प्रोफेसर और निदेशक, अफ्रीकी अध्ययन केंद्र, मुंबई विश्वविद्यालयअनुवाद एवं स्वर : वीरेन्द्र कौशिक
यह साझेदारी नई सफलता प्राप्त करने की कगार पर है। यह 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा युगांडा की संसद में दिये भाषण में बताये गये भारत-अफ्रीका सम्बंधों के10 मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुरूप है ।
अफ्रीका के 500 से अधिक प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में भाग लिया। उद्घाटन सत्र में लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो के प्रधानमंत्री, श्री सिल्वेस्ट्रे इलुंगा, मॉरीशस के उप-प्रधानमंत्री, डॉ. मोहम्मद अनवर हुस्नू, केन्या के विदेश मामलों की कैबिनेट सचिव, सुश्री रेचेल अवूर ओमाओ, तथा नाइजीरिया के उद्योग, व्यापार और निवेश मंत्री, ओटुनबा नियि अदेबायो मुख्य अतिथि थे।
उल्लेखनीय है कि अफ्रीका, भारतीय विदेश नीति में, पारंपरिक रूप से ध्यानाकृष्ण एक विशेष का केंद्र रहा है। 1990 के दशक के बाद से, भारत ने इस महाद्वीप के साथ अपने सम्बंधों में व्यापक रूप से विस्तार किया है। तीन शिखर सम्मेलन, और व्यापार तथा निवेश में जारी विस्तार भारत की विदेश नीति में, अफ्रीकी महाद्वीप के बढते महत्व को प्रदर्शित करते हैं।
इसके अलावा, साल 2000 से अफ्रीका की नई आर्थिक गतिविधियों में आ रही तेजी और साथ ही साथ, भारत की पहले से ही एक बड़ी अर्थव्यवस्था बनने को अग्रसर छवि ने भारत-अफ्रीका द्विपक्षीय साझेदारी को बढ़ाया है। आज अफ्रीका में न केवल एक विशाल बाजार और व्यापार के लिए अवसरों में विस्तार हुआ है बल्कि यह खनिजों, प्राकृतिक संसाधनों और कृषि के माल असबाब का खजाना भी है।सम्मेलन में इन पहलों को अफ्रीका के साथ दीर्घकालिक जुड़ाव और भारत-अफ्रीकी आर्थिक साझेदारी के फलक के विस्तार के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता के दृष्टिकोण को व्यापक बनाने के तौर पर दिखाया गया है।भारत के विदेश मंत्री, डॉ. एस. जयशंकर के उद्घाटन भाषण से यह पता चलता है कि भारत, अफ्रीका में बाजार खोलने और भारतीय उद्योगों को निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भारत और अफ्रीका के बीच बढ़ते सम्बंधों की सराहना की और आर्थिक विकास के लिए अफ्रीकी देशों द्वारा किये जा रहे प्रयासों में सहयोग करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। डॉ. जयशंकर ने विकास साझेदारी, व्यापार और निवेश तथा लोगों से लोगों के मजबूत सम्बंधों के चार स्तंभों की अवधारणा को लेकर अफ्रीका के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया, जिसमें विशेष रूप से युवा अफ्रीकियों के लिए शिक्षा और क्षमता निर्माण के क्षेत्र और हाल ही में रक्षा और समुद्री सुरक्षा शामिल हैं। भारत ने 37 अफ्रीकी देशों में 194 परियोजनाएं शुरू की हैं। इनमें आधारभूत संरचना से लेकर आईसीटी(ICT,), बिजली उत्पादन और पानी का वितरण तथा सिंचाई, रेलवे से लेकर सड़क, कृषि से लेकर चीनी संयंत्र तक शामिल हैं। विदेश मंत्री ने विस्तार से बताया कि कैसे भारतीय निवेश के बलबूते पर अफ्रीकी देशों में कई क्षेत्रों में हजारों नौकरियां पैदा की हैं। उन्होंने भारत को अफ्रीका का सबसे दृढ़ साथी बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय परियोजनाएं हमेशा "स्थानीय समुदायों से कुछ हासिल करने के बजाय उन्हें सशक्त" करती हैं और सतत विकास सुनिश्चित करती हैं। यह चीन पर कटाक्ष ही कहा जाएगा। अपने संबोधन की समाप्त पर उन्होंने यह माना कि 21 वीं सदी में, रक्षा और सुरक्षा सहयोग भारत-अफ्रीकी साझेदारी का एक प्रमुख स्तंभ है।
कोविड 19 महामारी संकट चरम पर पहुंचने के दौरान, विभिन्न अफ्रीकी देशों में डॉक्टरों के दलों, दवा और चिकित्सा उपकरण तथा खाद्यान्न भेजने के लिए अफ्रीकी गणमान्य व्यक्तियों ने भारत की उदारता की प्रशंसा की। 2009 से, भारत ने पैन-अफ्रीका ई-नेटवर्क परियोजना के माध्यम से अफ्रीकी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कई बड़ी पहल की हैं। अफ्रीका सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सक्रिय रूप से अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए भारत से मदद मांग रहा है, खासकर उस मध्यम वर्ग के लिए जो बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को प्राप्त करने के लिये दूसरें देशों में नहीं जा सकते हैं। अफ्रीकी देश स्वास्थ्य सेवाओं की लागत में कमी लाने के लिए टेलीमेडिसिन को शामिल करने की संभावना को भी देख रहे हैं। अफ्रीकी गणमान्य लोगों ने डिजिटल वैज्ञानिक अनुसंधान, अंतरिक्ष विज्ञान और उपग्रह विकास कार्यक्रम के साथ-साथ फार्मास्यूटिकल्स और विनिर्माण के क्षेत्रों में भारत-अफ्रीका सहयोग पर जोर दिया।सम्मेलन में कृषि, स्वास्थ्य सेवा, औषध, बिजली और ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, विनिर्माण, वित्त, शिक्षा और कौशल विकास क्षेत्रों में सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई।
भारत-अफ्रीकी साझेदारी पर 15 वें डिजिटल सम्मेलन ने कई नई सीमा-पार साझेदारियों के पनपने के लिए रास्ता तैयार किया है। 2005 में इसकी शुरुआत के बाद से, यह सम्मेलन, भारत और अफ्रीका के बीच साझेदारी और आर्थिक सम्बंध बढ़ाने में एक प्रवर्तक के रूप में उभरा है।
आलेख : प्रो. अपराजिता बिस्वास, पूर्व प्रोफेसर और निदेशक, अफ्रीकी अध्ययन केंद्र, मुंबई विश्वविद्यालयअनुवाद एवं स्वर : वीरेन्द्र कौशिक
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