भारत जेद्दाह सुधार में शामिल हुआ
हाल ही में आयोजित एक उच्च स्तरीय वर्चुअल बैठक के बाद एक पर्यवेक्षक राज्य के रूप में भारत जिबूती आचार संहिता के लिए जेद्दाह सुधार में शामिल हुआ| नई दिल्ली वर्तमान पर्यवेक्षक राज्यों के समूह का एक हिस्सा बनी, जिसमें जापान, नॉर्वे, यू.के. तथा अमरीका शामिल हैं| हिन्द महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को बढाने में योगदान करने तथा समन्वय करने की दिशा में भारत 18 सदस्यीय समूहों के साथ काम करने की आशा कर रहा है|
जेद्दाह सुधार 2017 में जिबूती आचार संहिता के हस्ताक्षरकर्ताओं द्वारा अंगीकृत एक संशोधित आचार संहिता है| यह समुद्री परिवेश की प्रभावशाली सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय क़ानून को अंगीकार करने पर बल देता है तथा यह समुद्री क्षेत्र में आतंकवाद समेत अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराध को नियंत्रित करने में सहयोग करने के लिए हस्ताक्षरकर्ताओं का आह्वान करता है| यह अवैध रूप से मछली पकड़ने समेत ग़ैरक़नूनी समुद्री गतिविधियों को रोकने तथा बंदरगाह सुविधाओं के सुरक्षित परिचालन को सुनिश्चित करने तथा ग़ैरकानूनी गतिविधियों से समुद्री व्यापार को बचाने सम्बन्धी सुरक्षा नीतियों को अंगीकार करने पर भी बल देता है| इसके अलावा, यह राजस्व, रोज़गार तथा स्थिरता को बढ़ाने के लिए एक सुस्थिर ‘ब्लू अर्थव्यवस्था’ तथा समुद्री क्षेत्र के विकास के लिए एक राष्ट्रीय रणनीति विकसित करने के प्रति इसमें भागीदारी करने को प्रेरित करता है|
जेद्दाह सुधार आचार संहिता के प्रभावशाली क्रियान्वयन के लिए सहायता तथा तकनीकी सहयोग प्रदान करने के प्रति सदस्य राज्यों को सुझाव देता है| यह समुद्री परिवेश के प्रबंधन, विशेषकर समुद्र में सलामती, सुरक्षा तथा क़ानून और व्यवस्था को बनाए रखने सम्बन्धी प्रशिक्षण को बढ़ाने पर बल देता है तथा सदस्य राज्यों की क्षेत्रीय अखंडता तथा संप्रभुता के लिए परस्पर सम्मान के आधार पर जहाज़ों पर होनेवाली सशस्त्र डकैती तथा समुद्री डकैती में संलिप्त लोगों पर प्रभावशाली तरीक़े से अभियोग चलाने की प्रक्रिया को बढ़ाने तथा बड़े स्तर पर क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है| 2009 में अंगीकृत जिबूती आचार संहिता पर जेद्दाह सुधार आधारित है|
जिबूती आचार संहिता अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन द्वारा स्थापित एक क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा सहयोग समझौते पर आधारित थी तथा इसका फ़ोकस मुख्य रूप से पश्चिमी हिन्द महासागर क्षेत्र, अदन की खाड़ी तथा लाल सागर में जहाज़ों पर होनेवाली सशस्त्र डकैती तथा समुद्री डकैती पर है| जिबूती आचार संहिता के हस्ताक्षरकर्ता जांच करने, गिरफ़्तारी करने तथा जहाज़ों पर होनेवाली सशस्त्र डकैती तथा समुद्री डकैती को अंजाम देने या फिर इस कार्यवाही में सुविधा पहुंचाने तथा इस कृत्य को उकसावा देने में संदिग्ध लोगों पर अभियोग चलाने पर सहमत हुए|
हस्ताक्षरकर्ताओं ने सशस्त्र डकैती तथा समुद्री डकैती से सम्बंधित संपत्ति तथा जहाज़ों, लोगों की देखरेख करने तथा बचाव करने के लिए एक साथ काम करने के प्रति वचनबद्धता जताई तथा वे संदिग्ध जहाज़ों को ज़ब्त करने और रोकने के लिए एकजुट होने पर सहमत हुए| जिबूती आचार संहिता ने इस क्षेत्र के बाहर के देशों के नौसैनिक बलों के साथ साझा अभियानों में सहयोग करने का निर्णय लिया था तथा सोमालिया के तट से दूर होनेवाली समुद्री डकैती के साथ निपटने में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के प्रस्तावों के प्रासंगिक पहलुओं के क्रियान्वयन को बढ़ावा देना इसका उद्देश्य था| इसने संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 63/111 पर विचार किया| यह प्रस्ताव समुद्र में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होनेवाले संगठित अपराध, नशीले पदार्थों तथा मनोदैहिक पदार्थों की अवैध तस्करी, प्रवासियों तथा लोगों की तस्करी और समुद्री सुरक्षा के जोखिमों से सम्बंधित है|
भारत पश्चिमी हिन्द महासागर में अपने क़दम बढ़ा रहा है| भारत जेद्दाह सुधार में एक पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हुआ है, दूरस्थ समुद्री सुरक्षा से निकट की समुद्री सुरक्षा सम्बन्धी रवैये में एक परिवर्तन के लिए जब से पेईचिंग के 2015 के रक्षा श्वेत पत्र ने आह्वान किया, तब से चीन हिन्द महासागर क्षेत्र में अपने सैन्य प्रभाव का विस्तार करने के लिए ठोस प्रयास कर रहा है| चीन पश्चिमी हिन्द महासागर के वैश्विक रणनीतिक महत्त्व को स्वीकार करता है तथा यह एक विमान वाहक पोत को खड़ा करने के लिए अपने जिबूती नौसैनिक बेस की क्षमता में वृद्धि कर चुका है, जो इसे समूचे हिन्द महासागर में सैन्य हस्तक्षेप करने के योग्य बनाएगा|
जेद्दाह सुधार में भारत का शामिल होना, इसे अपने हितों की रक्षा करते हुए मध्य पूर्व तथा पूर्व अफ़्रीका के देशों के साथ समुद्री सुरक्षा पर सहयोग करने का एक अवसर प्रदान करेगा| 2009 के भारतीय समुद्री सिद्धांत के अनुसार, अदन की खाड़ी तथा लाल सागर भारत के लिए अतिरिक्त महत्त्व के थे| ये अब भारतीय नौसेना के लिए मुख्य महत्त्व के क्षेत्र बन चुके हैं, क्योंकि यह पश्चिमी हिन्द महासागर के मुख्य प्रवेश बिन्दुओं पर संबंधों को विकसित करने के लिए अत्यधिक ध्यान दे रहा है| यह क्षेत्रीय संपर्क, उन्मुक्त तथा खुले हिन्द-प्रशांत पर भारत के फ़ोकस के लिए निर्णायक है|
आलेख – डॉ. लक्ष्मी प्रिया, शोध विश्लेषक, मनोहर पर्रीकर रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान, नई दिल्ली
अनुवाद एवं वाचन – मनोज कुमार चौधरी
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