संसद में पिछला सप्ताह



संसद का मानसून सत्र 14 सितंबर से सख्त सुरक्षा नियमों के साथ चल रहा है। दोनों सदनों की कार्यवाही शनिवार और रविवार को भी बिना अवकाश के चल रही है। प्रत्येक सदन प्रतिदिन चार घंटे चलता है - एक सत्र सुबह और दूसरा दोपहर में। इस मानसून सत्र के दौरान कुल 18 बैठकें आयोजित की जाएंगी। पिछले सप्त जिन तीन प्रमुख मुद्दों का बोलबाला था, उनमें कोविड-19 महामारी, अध्यादेशों के स्थान पर 11 विधेयक और चीन के साथ सीमा विवाद शामिल रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सत्र एक बहुत ही ठोस संदेश देगा कि दोनों सदन एक स्वर में, हमारे बहादुर सैनिकों के पीछे सीमाओं की रक्षा के लिए खड़े हैं। प्रधानमंत्री ने यह कहते हुए एक सधी हुई टिप्पणी की, कि सत्र 'विशेष परिस्थितियों' में आयोजित हो रहा है और कहा कि सदस्यों ने कर्तव्यपरायणता का रास्ता चुना है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा को बताया कि भारत किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार था और 15000 फीट की ऊंचाई पर तैनात भारतीय सैनिकों का मनोबल ऊंचा था। उन्होंने एलएसी की यथास्थिति में एकतरफा बदलाव के प्रयास के लिए चीन को दोषी ठहराया और कहा कि भारत, चल रहे सैन्य टकराव को शांति से हल करना चाहता था, साथ ही वह किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार था। रक्षा मंत्री ने पूर्वी लद्दाख की स्थिति पर राज्यसभा में इसी तरह का बयान दिया कि “दुनिया की कोई भी ताकत भारतीय सैनिकों को लद्दाख में देश की सीमाओं पर गश्त ललगाने से नहीं रोक सकती”।

पिछले सत्र के बाद से अब तक, सरकार ने 11 अध्यादेश जारी किए। इनमें से पांच कोविड -19 संकट और लॉकडाउन से संबंधित हैं: कर दाखिल करने की तारीखों का विस्तार, नए दिवालिया मामलों पर स्थगन, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए संरक्षण और वेतन और संसद और मंत्रियों के भत्तों में अस्थायी कटौती। अन्य छह में से, दो होम्योपैथी और चिकित्सा की भारतीय प्रणालियों को विनियमित करने वाली परिषदों के बोर्डों के आधिपत्य से संबंधित हैं, एक भारतीय रिजर्व बैंक को सहकारी बैंकों को विनियमित करने की अनुमति देता है, जबकि तीन अन्य कृषि बाजारों से संबंधित हैं। राज्यसभा में पेश विधेयकों में मंत्रियों के वेतन और भत्ते (संशोधन) विधेयक, 2020, महामारी रोग (संशोधन) विधेयक, 2020, होम्योपैथी केंद्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक, 2020 और भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक 2020 को राज्यसभा में वॉयस वोट के माध्यम से पेश किया गया है। सभी चार विधेयक पहले से ही अध्यादेश के रूप में लागू हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने लोकसभा को बताया कि देशव्यापी तालाबंदी, सरकार का साहसिक निर्णय था। यह इस तथ्य का प्रमाण है कि भारतीय सामूहिक रूप से कोविड का सामना करने के लिए खड़े हुए थे। कार्यवाही के दौरान, वित्त मंत्री, निर्मला सीतारमण ने 2.35 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च के लिए संसद की अनुमति मांगी जिसमें 1.60 लाख करोड़ रुपये का नकद ख़र्च मुख्य रूप से कोविड 19 महामारी का मुकाबला करने के लिए निर्धारित है।
सरकार ने कृषि क्षेत्र से जुड़े तीन विधेयक भी प्रस्तुत किए हैं, जैसे किसान उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक, मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा विधेयक और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक से जुड़ा किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता, जो सरकार द्वारा पूर्व में घोषित अध्यादेशों की जगह लेगा। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि इन विधेयकों से किसानों को अपनी उपज के साथ-साथ निजी निवेश और प्रौद्योगिकी के लिए भी पारिश्रमिक मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों सदनों द्वारा पारित तीन विधेयकों को ऐतिहासिक बताया। श्री मोदी ने कहा कि “किसानों को नई स्वतंत्रता दी गई है। अब उनके पास अपनी उपज बेचने के लिए अधिक विकल्प और अवसर होंगे। बिचौलियों से बचाने के लिए इन उपायों को लाना आवश्यक था।"
राज्यसभा ने इस साल 25 मार्च से ताजा कोविड -19 के चलते डिफ़ॉल्ट के खिलाफ अधिकतम एक वर्ष तक के लिए दिवालिया कार्यवाही को निलंबित करने के लिए एक विधेयक को भी मंजूरी दी। उच्च सदन में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) का उद्देश्य "कंपनियों को विघटित करने के बजाय संरक्षण प्रदान करते रहना" है। लोकसभा ने कराधान विधेयक पारित किया जो करदाताओं को कर प्रबंधन में विभिन्न राहत और पारदर्शिता प्रदान करने का प्रयास करता है।

आलेख - योगेश सूद, पत्रकार
अनुवादक एवं वाचक - हर्ष वर्धन

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