कृषि विधेयक – किसानों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण
संसद द्वारा पारित कृषि विधेयक निश्चित रूप से देश के किसानों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण साबित होंगे| ये विधेयक न केवल किसानों को सारे राज्यों में अपनी उपज का व्यापार करने की स्वतन्त्रता प्रदान करेंगे, बल्कि ये किसानों को अपनी उपज के व्यापारी बनने की शक्ति भी प्रदान करेंगे|
वास्तव में, दो कृषि विधेयक, किसान उपज व्यापार तथा वाणिज्य (संवर्धन तथा सुविधा) विधेयक तथा मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा विधेयक पर आधारित किसान (सशक्तिकरण तथा संरक्षण) समझौता भी कल्पित है| ये विधेयक देश के करोड़ों किसानों के लिए एक सुस्थिर और लाभकारी भविष्य को सुनिश्चित करेंगे|
प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने उचित ही कहा कि कृषि क्षेत्र में परिवर्तन समय की मांग है| वास्तव में, अपनी उपज संबंधी निर्णय लेने में किसानों को स्वाधीनता देने वाला इससे पहले इस तरह का एक भी क़ानून नहीं था|
इसके अलावा, कृषि उत्पादों की ख़रीद और बिक्री में उनके हाथ बंधे हुए थे| अधिसूचित कृषि उपज बाज़ार समिति ने अपने दायरे के बाहर किसानों को अपनी कृषि उपज बेचने से रोके रखा था|
राज्य सरकारों के पंजीकृत लाइसेंसधारियों को ही फ़सल बेचने की उनकी सीमाएं तय कर दी गई थीं| इसके अलावा, विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा प्रभावी भिन्न कृषि उपज विपणन समितियों से संबन्धित क़ानूनों की प्रधानता के कारण विभिन्न राज्यों के बीच कृषि उपज के उन्मुक्त प्रवाह में बाधाएँ बनी हुई हैं|
लेकिन अब, दो कृषि विधेयक भारतीय किसानों के जीवन की दिशा में परिवर्तन लाएँगे| वे अब राज्य कृषि उपज विपणन क़ानूनों के अंतर्गत अधिसूचित बाज़ारों के भौतिक परिसरों के बाहर अपने कृषि उत्पादों का व्यवसाय कर सकते हैं|
इसे स्मरण रखना चाहिए कि छोटे आकार का होने के कारण भारतीय कृषि को विखंडन द्वारा चिन्हित किया जाता है| मौसम पर निर्भरता, उत्पादन अनिश्चितता तथा बाज़ार की अस्थिरता जैसी इसकी कुछ दुर्बलताएं हैं| यह कृषि को जोखिमभरा तथा इनपुट और आउटपुट दोनों तरह के प्रबंधन में अप्रभावी बनाती हैं|
इस पृष्ठभूमि में, दोनों कृषि विधेयक क्रांतिकारी हैं, क्योंकि ये अब किसानों को अनावश्यक बाधाओं से छुटकारा दिलाएँगे, जिसका वे कृषि संबंधी मुद्दों के निपटारे में सामना किया करते थे| केंद्रीय कृषि मंत्री, नरेंद्र सिंह तोमर ने अपने वक्तव्य में कहा कि दोनों कृषि विधेयक राज्य क़ानूनों के तहत स्थापित न ही “मंडियों” और न ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम॰एस॰पी॰) की वसूली को प्रभावित करेंगे| राज्य के क़ानून बंद कर दिये जाएँगे और राज्य किसानों की बेहतरी के लिए एक तंत्र के रूप में विधेयकों की स्वीकृति के लिए माहौल बनाएँगे|
वास्तव में, सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की अपनी वचनबद्धता पर क़ायम है| इसने कृषि समुदाय को ख़ुश होने का एक अवसर दिया है|
जबकि, ये विधेयक उन्हें और अधिक विकल्प प्रदान करेंगे, ये बाज़ार की लागतों को कम करने में भी मददगार होंगे| इसके अलावा, ये विधेयक बेहतर मूल्य प्राप्त करने तथा घाटे और कम मूल्यों के साथ क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को अधिशेष देने में किसानों के लिए मददगार होंगे|
ये विधेयक इलेक्ट्रॉनिक रूप से निर्बाध व्यापार को सुनिश्चित करने के लिए लेनदेन के मंच में एक इलेक्ट्रॉनिक व्यापार का प्रस्ताव भी करते हैं| यही वजह है कि अत्यधिक कृषि संगठनों ने संसद द्वारा पारित कृषि विधेयकों को लाने संबंधी सरकार के निर्णय का स्वागत किया है|
अखिल भारतीय कृषि संगठनों के महासंघ (एफ़॰ए॰आई॰एफ़॰ए॰) ने इन विधेयकों के पारित होने को सरकार द्वारा समय पर उठाया गया एक क़दम कहा है| ये विधेयक किसानों को अपनी फ़सल के उचित मूल्य दिलाने में मददगार होंगे तथा वे अपनी आय पर नियंत्रण रख सकेंगे|
एफ़॰ए॰आई॰एफ़॰ए॰ के अध्यक्ष, बी॰वी॰ जवारे गौड़ा ने एक वक्तव्य में कहा कि “सरकार द्वारा समय पर उठाया गया निर्णायक क़दम व्यापार की स्वाधीनता के साथ अपनी आय पर नियंत्रण रखकर किसानों को उचित मूल्य देनेवाली एक निष्पक्ष बाज़ार की परिकल्पना के लिए आधारशिला के रूप में काम करेगा|”
बहरहाल, महत्वपूर्ण बात यह है कि कृषि विधेयकों का नया सेट राष्ट्रीय तथा वैश्विक बाज़ारों में देश के कृषि उत्पादों के लिए आपूर्ति शृंखला तथा कृषि मूलभूत संरचना वर्धन में निजी क्षेत्र के निवेश के माध्यम से कृषि के विकास की गति को बढ़ाने में मददगार होगा| ये विधेयक रोज़गार के अवसरों को सृजित करने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में सहायक होंगे, जिससे राष्ट्र की अर्थव्यवस्था सशक्त होगी|
दोनों कृषि विधेयकों में ध्यान देने योग्य सच्चाई यह है कि ये विधेयक “एक भारत, एक कृषि बाज़ार” उत्पन्न करने का मार्ग प्रशस्त करेंगे तथा भारत के कठिन परिश्रमी करोड़ों किसानों के लिए सुनहरी फ़सलों की बुनियाद रखेंगे|
आलेख – शंकर कुमार, पत्रकार
अनुवाद एवं वाचन – मनोज कुमार चौधरी
वास्तव में, दो कृषि विधेयक, किसान उपज व्यापार तथा वाणिज्य (संवर्धन तथा सुविधा) विधेयक तथा मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा विधेयक पर आधारित किसान (सशक्तिकरण तथा संरक्षण) समझौता भी कल्पित है| ये विधेयक देश के करोड़ों किसानों के लिए एक सुस्थिर और लाभकारी भविष्य को सुनिश्चित करेंगे|
प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने उचित ही कहा कि कृषि क्षेत्र में परिवर्तन समय की मांग है| वास्तव में, अपनी उपज संबंधी निर्णय लेने में किसानों को स्वाधीनता देने वाला इससे पहले इस तरह का एक भी क़ानून नहीं था|
इसके अलावा, कृषि उत्पादों की ख़रीद और बिक्री में उनके हाथ बंधे हुए थे| अधिसूचित कृषि उपज बाज़ार समिति ने अपने दायरे के बाहर किसानों को अपनी कृषि उपज बेचने से रोके रखा था|
राज्य सरकारों के पंजीकृत लाइसेंसधारियों को ही फ़सल बेचने की उनकी सीमाएं तय कर दी गई थीं| इसके अलावा, विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा प्रभावी भिन्न कृषि उपज विपणन समितियों से संबन्धित क़ानूनों की प्रधानता के कारण विभिन्न राज्यों के बीच कृषि उपज के उन्मुक्त प्रवाह में बाधाएँ बनी हुई हैं|
लेकिन अब, दो कृषि विधेयक भारतीय किसानों के जीवन की दिशा में परिवर्तन लाएँगे| वे अब राज्य कृषि उपज विपणन क़ानूनों के अंतर्गत अधिसूचित बाज़ारों के भौतिक परिसरों के बाहर अपने कृषि उत्पादों का व्यवसाय कर सकते हैं|
इसे स्मरण रखना चाहिए कि छोटे आकार का होने के कारण भारतीय कृषि को विखंडन द्वारा चिन्हित किया जाता है| मौसम पर निर्भरता, उत्पादन अनिश्चितता तथा बाज़ार की अस्थिरता जैसी इसकी कुछ दुर्बलताएं हैं| यह कृषि को जोखिमभरा तथा इनपुट और आउटपुट दोनों तरह के प्रबंधन में अप्रभावी बनाती हैं|
इस पृष्ठभूमि में, दोनों कृषि विधेयक क्रांतिकारी हैं, क्योंकि ये अब किसानों को अनावश्यक बाधाओं से छुटकारा दिलाएँगे, जिसका वे कृषि संबंधी मुद्दों के निपटारे में सामना किया करते थे| केंद्रीय कृषि मंत्री, नरेंद्र सिंह तोमर ने अपने वक्तव्य में कहा कि दोनों कृषि विधेयक राज्य क़ानूनों के तहत स्थापित न ही “मंडियों” और न ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम॰एस॰पी॰) की वसूली को प्रभावित करेंगे| राज्य के क़ानून बंद कर दिये जाएँगे और राज्य किसानों की बेहतरी के लिए एक तंत्र के रूप में विधेयकों की स्वीकृति के लिए माहौल बनाएँगे|
वास्तव में, सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की अपनी वचनबद्धता पर क़ायम है| इसने कृषि समुदाय को ख़ुश होने का एक अवसर दिया है|
जबकि, ये विधेयक उन्हें और अधिक विकल्प प्रदान करेंगे, ये बाज़ार की लागतों को कम करने में भी मददगार होंगे| इसके अलावा, ये विधेयक बेहतर मूल्य प्राप्त करने तथा घाटे और कम मूल्यों के साथ क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को अधिशेष देने में किसानों के लिए मददगार होंगे|
ये विधेयक इलेक्ट्रॉनिक रूप से निर्बाध व्यापार को सुनिश्चित करने के लिए लेनदेन के मंच में एक इलेक्ट्रॉनिक व्यापार का प्रस्ताव भी करते हैं| यही वजह है कि अत्यधिक कृषि संगठनों ने संसद द्वारा पारित कृषि विधेयकों को लाने संबंधी सरकार के निर्णय का स्वागत किया है|
अखिल भारतीय कृषि संगठनों के महासंघ (एफ़॰ए॰आई॰एफ़॰ए॰) ने इन विधेयकों के पारित होने को सरकार द्वारा समय पर उठाया गया एक क़दम कहा है| ये विधेयक किसानों को अपनी फ़सल के उचित मूल्य दिलाने में मददगार होंगे तथा वे अपनी आय पर नियंत्रण रख सकेंगे|
एफ़॰ए॰आई॰एफ़॰ए॰ के अध्यक्ष, बी॰वी॰ जवारे गौड़ा ने एक वक्तव्य में कहा कि “सरकार द्वारा समय पर उठाया गया निर्णायक क़दम व्यापार की स्वाधीनता के साथ अपनी आय पर नियंत्रण रखकर किसानों को उचित मूल्य देनेवाली एक निष्पक्ष बाज़ार की परिकल्पना के लिए आधारशिला के रूप में काम करेगा|”
बहरहाल, महत्वपूर्ण बात यह है कि कृषि विधेयकों का नया सेट राष्ट्रीय तथा वैश्विक बाज़ारों में देश के कृषि उत्पादों के लिए आपूर्ति शृंखला तथा कृषि मूलभूत संरचना वर्धन में निजी क्षेत्र के निवेश के माध्यम से कृषि के विकास की गति को बढ़ाने में मददगार होगा| ये विधेयक रोज़गार के अवसरों को सृजित करने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में सहायक होंगे, जिससे राष्ट्र की अर्थव्यवस्था सशक्त होगी|
दोनों कृषि विधेयकों में ध्यान देने योग्य सच्चाई यह है कि ये विधेयक “एक भारत, एक कृषि बाज़ार” उत्पन्न करने का मार्ग प्रशस्त करेंगे तथा भारत के कठिन परिश्रमी करोड़ों किसानों के लिए सुनहरी फ़सलों की बुनियाद रखेंगे|
आलेख – शंकर कुमार, पत्रकार
अनुवाद एवं वाचन – मनोज कुमार चौधरी
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