प्रधानमंत्री ने भारतीय किसानों का जयजयकार किया



प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने ऑल इंडिया रेडियो नेटवर्क पर अपने “मन की बात” कार्यक्रम के माध्यम से देश को संबोधित किया| मन की बात के 69वें संस्करण में, प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोविड-19 संकट के दौरान, देश के किसानों ने आश्चर्यजनक लचीलेपन का प्रदर्शन किया है|

प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर कृषि क्षेत्र सशक्त होता है, तो “आत्मनिर्भर भारत” का आधार भी सशक्त होगा| उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले, इस क्षेत्र को कई तरह के बंधनों से मुक्त कर दिया गया है तथा कई मिथकों से मुक्त करने की कोशिश की गई है| उन्होंने हरियाणा के एक किसान, श्री कंवर चौहान का उदाहरण साझा किया, जिन्हें मंडी के बाहर फलों और सब्ज़ियों को बेचने में बहुत अधिक कठिनाई होती थी, लेकिन 2014 में, फलों और सब्ज़ियों को कृषि उपज विपणन समिति (ए॰पी॰एम॰सी॰) अधिनियम से बाहर कर दिया गया, जिसका उन्हें बहुत लाभ मिला| उन्होंने एक किसान उत्पादक संगठन का गठन किया तथा अब उनके गाँव के किसान स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न की खेती करते हैं तथा अपनी उपज को प्रत्यक्ष रूप से दिल्ली की आज़ादपुर मंडी, बड़ी खुदरा शृंखला और फ़ाइव स्टार होटल को भेजते हैं, जिससे उनकी आय में बहुत अधिक वृद्धि हुई है| प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि ये किसान अपने फलों और सब्ज़ियों को कहीं भी और किसी को बेचने का अधिकार रखते हैं, जो इनकी प्रगति का आधार है और अब सभी किसानों को उनके पूरे उत्पाद को देशभर में बेचने का यही अधिकार दिया गया है|

महाराष्ट्र में एक कृषि उत्पादन के संगठन – श्री स्वामी समर्थ कृषि उत्पादन कंपनी लिमिटेड के उदाहरण को साझा करते हुए, ए॰पी॰एम॰सी॰ के दायरे से फलों और सब्ज़ियों को हटाये जाने के कारण किसानों को होनेवाले लाभ का भी प्रधानमंत्री मोदी ने उल्लेख किया| उन्होंने कहा कि पुणे और मुंबई के किसान ख़ुद साप्ताहिक बाज़ार चला रहे हैं तथा किसी मध्यस्थ के बग़ैर अपनी उपज को प्रत्यक्ष रूप से बेच रहे हैं| उन्होंने किसानों की सामूहिक संस्था, तमिलनाडु की केला किसान उत्पादन कंपनी की भी चर्चा की| इस संगठन ने लॉकडाउन के दौरान, निकट के गांवों से सैंकड़ों मीट्रिक टन सब्जियाँ, फल तथा केले ख़रीदे और चेन्नई में सब्ज़ियों की कॉम्बो किट की आपूर्ति की| उन्होंने लखनऊ के “इरादा कृषि उत्पादन” समूह का उल्लेख किया| लॉकडाउन के दौरान, इस समूह ने सीधे खेतों से फलों तथा सब्ज़ियों को हासिल किया और किसी मध्यस्थ के बग़ैर, लखनऊ के बाज़ारों में प्रत्यक्ष रूप से बिक्री की|

प्रधानमंत्री ने कहा कि नवाचार और नई तकनीक के प्रयोग के माध्यम से, कृषि और प्रगति करेगी| उन्होंने गुजरात के एक किसान, इस्माइल भाई का ज़िक्र किया, जिन्होंने अपने परिवार द्वारा हतोत्साहित किए जाने के बावजूद खेती को अपनाया, उन्होंने ड्रिप सिंचाई प्रणाली का प्रयोग करके आलू उपजाए, उच्च गुणवत्ता के आलू अब उनकी पहचान है, जिन्हें बिना किसी बिचौलिये के वे बड़ी कंपनियों को प्रत्यक्ष रूप से बेचते हैं तथा अधिक लाभ अर्जित करते हैं|

मन की बात के सम्बोधन के दौरान, प्रधानमंत्री ने कहा कि मानव सभ्यता की तरह कहानियों का इतिहास भी प्राचीन है| उन्होंने कहा कि “जहां एक आत्मा है, वहीं एक कहानी है|” उन्होंने परिवार के बड़े सदस्यों द्वारा कहानी सुनाने की परंपरा के महत्व को लेकर कहा| उन्होंने कहा कि अपनी यात्राओं में बच्चों के साथ अपनी बातचीत के माध्यम से, उन्होंने माना कि चुट्कुले उनके जीवन में प्रमुखता से व्याप्त हैं तथा कहानियों का कोई संकेत उनके पास नहीं है|

देश में क़िस्सागोई या कहानी कहने की समृद्ध परंपरा की चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने “हितोपदेश” तथा “पंचतंत्र” की परंपरा को विकसित किया है, जिसमें जानवरों, पक्षियों तथा परियों की एक काल्पनिक दुनिया के माध्यम से विवेक समाहित है| श्री मोदी ने तमिलनाडु तथा केरल के ‘विल्लु पात’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘कथा’ धार्मिक कहानी कहने का एक प्राचीन रूप है, जो कहानी और संगीत का एक मेल है तथा उन्होंने कठपुतली की जीवंत परंपरा की भी चर्चा की| उन्होंने विज्ञान तथा विज्ञान की कल्पना पर आधारित स्टोरीटेलिंग की बढ़ती लोकप्रियता की ज़िक्र किया|

आई॰आई॰एम॰ के भूतपूर्व छात्र श्री अमर व्यास तथा मराठी की सुश्री वैशाली व्यवहारे देशपांडे तथा चेन्नई की श्रीविद्या वीराराघवन की पहल पर संचालित ‘गाथास्टोरी॰आईएन’ समेत क़िस्सागोई की कला को बढ़ावा देने संबंधी कई पहलों की प्रधानमंत्री ने प्रशंसा की, इनकी पहल पर हमारी संस्कृति से संबन्धित कहानियों का प्रसार होने के साथ ये कहानियाँ लोकप्रिय हो रहीं हैं| प्रधानमंत्री ने बेंगलुरु के श्री विक्रम श्रीधर द्वारा किए गए कार्य की प्रशंसा की, वे महात्मा गांधी से संबन्धित कहानियों को लेकर बहुत उत्साही हैं|

कहानियों के माध्यम से महान पुरुषों तथा नारियों के जीवन के साथ देश की नई पीढ़ी को जोड़ने के नए तरीक़ों को तलाशने के प्रति कथावाचकों को प्रधानमंत्री ने प्रेरित किया| उन्होंने कहा कि कथावाचन की कला को हर घर में पहुंचाने की आवश्यकता है तथा बच्चों को अच्छी कहानियाँ सुनाना आम जीवन का एक हिस्सा बनाया जाना चाहिए| उन्होंने एक विचार दिया कि प्रत्येक सप्ताह, परिवार के सदस्यों को सहानुभूति, संवेदनशीलता, साहस, बलिदान, वीरता आदि जैसी एक विषयवस्तु का चयन करके उसपर प्रत्येक सदस्य को कहानी सुनाना चाहिए|

आलेख – कौशिक रॉय, आकाशवाणी के समाचार विश्लेषक

अनुवाद एवं वाचन – मनोज कुमार चौधरी

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