प्रधानमंत्री ने एक विस्तारित संयुक्त राष्ट्र का आह्वान किया
यू॰एन॰ के 75वें वर्षगांठ शिखर सम्मेलन में अपने अवलोकन के बाद शांति, सुरक्षा तथा विकास के उद्देश्यों को एकीकृत करनेवाले यू॰एन॰ के भविष्य के लिए एक दृष्टिकोण की रूपरेखा देते हुए 26 सितंबर, 2020 को प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए कहा कि “संयुक्त राष्ट्र का मुख्य कार्य अधूरा है|”
इस दृष्टिकोण को साकार करने के लिए परिवर्तन की आवश्यकता केंद्र में रही| प्रधानमंत्री ने कहा कि 1945 में जिस संदर्भ में यू॰एन॰ का गठन किया गया था, वह विगत 75 वर्षों में पूरी तरह से परिवर्तित हो चुका है| यू॰एन॰ के एक संस्थापक सदस्य के रूप में, “भारत इस महान संस्थान की प्रासंगिकता को बनाए रखने के प्रति” वचनबद्ध है| बहरहाल, 21वीं सदी की आवश्यकताएं तथा चुनौतियां विगत की तुलना में पूरी तरह से भिन्न हैं| उन्होंने रेखांकित किया कि “प्रतिक्रियाओं, प्रक्रियाओं तथा संयुक्त राष्ट्र के वास्तविक स्वरूप में सुधार” समय की मांग है|
इस सुधार के केंद्र में यह है कि असैन्य युद्ध तथा आतंकी हमलों समेत संघर्षों को रोकने में यू॰एन॰ सुरक्षा परिषद की असफलता के कारण हज़ारों बच्चों समेत बहुत अधिक संख्या में साधारण लोग मारे गए हैं| इन संघर्षों के कारण करोड़ों लोग अपने मूल स्थान को छोड़ने पर बाध्य हुए और शरणार्थी का जीवन बिताने पर मजबूर हुए हैं|
श्री मोदी ने कहा कि भारत के 1॰3 बिलियन लोगों ने इन सुधारों के लिए लंबे समय तक इंतज़ार किया है| संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में निर्णय लेने के ढांचे में भारत को शामिल किया जाना इन सुधारों के पीछे का तर्क है|
इस परिषद में भारत की स्थायी उपस्थिती विश्व के सबसे बड़े लोकतन्त्र और विश्व की पूरी जनसंख्या के 18 प्रतिशत हिस्से के प्रतिनिधिक के रूप में भारत के अनुभव से संयुक्त राष्ट्र को लाभ उठाने योग्य बनाएगा| भारत की उपस्थिती वैश्विक कल्याण को प्राथमिकता देनेवाले वसुधैव कुटुंबकम के इसके सभ्यतागत विचार को दर्शाते हुए, एक परिवार के रूप में संयुक्त राष्ट्र के दृष्टिकोण को सशक्त बनाएगी|
प्रधानमंत्री ने 2 अक्तूबर को मनाया जानेवाला अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस तथा 21 जून को पालन किए जानेवाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस में भारत की प्रायोजकता पर बल दिया| प्रधानमंत्री ने मानव तथा प्रकृति और सुस्थिर विकास के बीच शांति, एकता के प्रति भारत की वचनबद्धता के उदाहरण के रूप में आपदा लचीलेपन के मूलभूत संरचना गठबंधन तथा अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन पर बल दिया|
चल रही कोविड-19 महामारी के दौरान की स्थिति का स्मरण करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने 150 से अधिक देशों को आवश्यक औषधियां भेजी हैं, उन्होंने समुदाय को आश्वस्त किया कि वैश्विक स्तर के टीका उत्पादन तथा सुपुर्दगी क्षमता प्रयोग में लाये जाएंगे, जिसमें सभी देशों में इन टीकों की सुपुर्दगी के लिए कोल्ड चेन तथा भंडारण क्षमताओं को बढ़ाना शामिल है|
महामारी के बाद की स्थिति के लिए, भारत ने एक “आत्म-निर्भर भारत” के एक दृष्टिकोण की घोषणा की थी, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावी रूप से बढ़ाएगा| प्रधानमंत्री मोदी ने “परिवर्तनकारी परिवर्तन” को सूचीबद्ध किया था, जिसने विगत पाँच वर्षों में औपचारिक वित्तीय क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए भारत के करोड़ों लोगों को प्रेरित किया, खुले में शौच से मुक्ति दिलाई तथा इस कारण लोगों को निःशुल्क स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की सुविधा मिली| उद्यमशीलता तथा नेतृत्व को बढ़ावा देकर महिलाओं का सशक्तिकरण, सूक्ष्म वित्तीय व्यवस्था तक पहुँच तथा भुगतान सहित मातृत्व अवकाश भारत की भेदभाव रहित विकास नीतियों के अभिन्न अंग रहे हैं| प्रधानमंत्री ने कहा कि “भारत डिजिटल लेनदेन करनेवाले अग्रणी देशों में से एक है” तथा उन्होंने स्मरण करते हुए कहा कि “अपने विकास के अनुभवों को साझा करने में भारत ने कभी संकोच नहीं किया है|”
प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र की विस्तारित भूमिका के लिए भारत के महत्वपूर्ण योगदानों पर बल दिया| विश्व की शांति को बनाए रखने के लिए लगभग 50 शांतिरक्षक अभियानों में सुरक्षा परिषद द्वारा तैनात यू॰एन॰ शांतिरक्षकों में शहीद होनेवाले सैनिकों में भारत के अधिकतर बहादुर सैनिक शामिल हैं| “पड़ोस पहले” की नीति तथा “एक्ट ईस्ट” नीति, “क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा तथा विकास” तथा हिन्द-प्रशांत पर इसके दृष्टिकोण जैसी भारत की विदेश नीति पहल वैश्विक शांति तथा सहयोग के प्रति इसकी वचनबद्धता से प्रेरित रही हैं|
अगले वर्ष जनवरी महीने से यू॰एन॰ सुरक्षा परिषद के लिए भारत का चयन करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को धन्यवाद देते हुए, प्रधानमंत्री ने पुष्टि की कि “समूचे विश्व के हित के लिए भारत अपने समृद्ध विकासात्मक अनुभवों” को साझा करेगा| यह संयुक्त राष्ट्र के सशक्तिकरण तथा स्थिरता में “विश्व कल्याण” के लिए आवश्यक योगदान देगा|
आलेख – राजदूत अशोक कुमार मुखर्जी, संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि
अनुवाद एवं वाचन – मनोज कुमार चौधरी
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