हरित रणनीतिक साझेदारी के साथ भारत-डेनमार्क के सम्बन्धों को पुनः स्थापित करना
प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी तथा डेनमार्क के उनके प्रतिपक्ष, मेत्ते फ़्रेडराइकसन ने द्विपक्षीय सम्बन्धों का जायज़ा लेने के लिए एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन किया| कोविड-19 महामारी तथा अर्थव्यवस्था पर पड़नेवाले इसके प्रभाव के कारण परिवर्तित होते अंतर्राष्ट्रीय गतिशीलताओं के परिदृश्य में, एक देश पर निर्भरता के परे जाकर दोनों नेताओं ने वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने की आवश्यकता पर बल दिया| प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस प्रकार की एक विविधता के लिए भारत जापान तथा ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर काम कर रहा है तथा भारत-चीन सीमा पर चल रहे वर्तमान गतिरोध के परिदृश्य में इस वक्तव्य की प्रासंगिकता है|
भारत तथा डेनमार्क के पुराने संबंध हैं| डेनमार्क के पूर्व प्रधानमंत्री, एंडर्स फॉग रस्मुसेन ने 2008 तथा 2009 में भारत की यात्रा की| बहरहाल, पुरुलिया में शस्त्र गिराने के मामले में आरोपी डेनमार्क के नागरिक, किम डेवी के प्रत्यर्पण के कारण 2010 तथा 2016 में सम्बन्धों में गतिरोध उत्पन्न हुआ था| 2016 की समाप्ति पर दोनों पक्षों के बीच आधिकारिक संबंध फिर से बहाल हुए हैं| मंत्रिस्तरीय बैठकें करने के अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने 2018 में स्टॉकहोम में पहले नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में डेनमार्क के प्रधानमंत्री, लार्स लॉगी रस्मुसेन से मुलाक़ात की थी| इस मुलाक़ात ने इस बात का संकेत दिया कि विगत के मुद्दे नई दिल्ली-कोपेनहेगेन के सम्बन्धों के भविष्य को अब और परिभाषित नहीं करेंगे| 2019 में गांधीनगर में आयोजित वायब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन 2019 में डेनमार्क साझेदार देश था तथा इस सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री रस्मुसेन से बातचीत की थी|
गत तीन वर्षों में, भारत-डेनमार्क के सम्बन्धों में एक महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है| ताज़ा वर्चुअल शिखर सम्मेलन में व्यापार, वाणिज्य तथा ऊर्जा पर फ़ोकस के साथ एक ‘हरित रणनीतिक साझेदारी’ के लिए द्विपक्षीय समीकरण में वृद्धि हुई| विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह नए युग की एक साझेदारी है, जो परस्पर लाभकारी है तथा एक सुस्थिर और हरित आर्थिक विकास पर केन्द्रित पेरिस समझौते को क्रियान्वित करने पर फ़ोकस करते हुए ये एक साथ वैश्विक चुनौतियों को संबोधित कर रहे हैं|
दोनों पक्ष दूसरे नॉर्डिक शिखर सम्मेलन पर भी सहमत हुए, जो प्रौद्योगिकी, जलवायु परिवर्तन, नवाचार तथा डिजिटल रूपान्तरण के क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका निभानेवाले पाँच यूरोपीय देशों के एक छोटे समूह के साथ गहन बातचीत में भारत को शामिल करता है| चूंकि, नॉर्डिक भारत के साथ सम्बन्धों के लिए एक नए मंच की ओर देख रहा है, इसलिए यह नई दिल्ली के विकसित होते आर्थिक तथा राजनीतिक मूल्य की भी पुनः पुष्टि करता है|
एक केन्द्रित सहयोग के माध्यम से हरित रणनीतिक साझेदारी का उद्देश्य सहयोग को बढ़ाने तथा लाभों को प्राप्त करने पर केन्द्रित है| इस ढांचे में, ऊर्जा तथा जलवायु परिवर्तन सूची में शीर्ष पर है तथा इसकी कोशिश नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्तियों को बढ़ाने की और जलवायु के असर को कम करने की है| अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन से डेनमार्क के जुड़ने की सहमति के साथ इसे एक और बल मिला| नवीकरणीय ऊर्जा प्रयासों में भारत की बढ़ती नेतृत्वकारी भूमिका के लिए यह एक प्रभावी वक्तव्य है| दोनों पक्ष जल तथा सर्कुलर अर्थव्यवस्था पर सहयोग को बढ़ाने पर सहमत हुए, जो साझा तकनीकी गठबंधन के माध्यम से विविध जल उपयोग तथा कचरा के मुद्दे को संबोधित करने का प्रयास करता है| सुस्थिर शहरी विकास तथा स्मार्ट सिटीज़ फ़ोकस के अन्य क्षेत्र हैं, जो देश में बढ़ते शहरीकरण के कारण नई दिल्ली की वरीयता में शामिल है|
चूंकि, दोनों पक्षों ने व्यवसाय, व्यापार तथा शिपिंग पर बल दिया है, इसलिए इसे ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है कि कोपेनहेगेन-मालमो बन्दरगाह नॉर्डिक क्षेत्र में सबसे बड़ा बन्दरगाह है तथा यह बाल्टिक क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण है| इस प्रकार, उत्तरी यूरोप में डेनमार्क इस बन्दरगाह के माध्यम से निर्यातों के ज़रिये लाभ अर्जित करने के लिए भारतीय व्यापार तथा वाणिज्य के लिए अवसर की पेशकश करता है| यह इसके वाणिज्यिक समुद्री पहुँच के बिदुओं तथा अन्य आपूर्ति मार्गों के निर्माण में विविधता प्रदान करने के भारत के बढ़ते प्रयासों पर भी बल देता है| भारत में 140 से अधिक डेनमार्क की कंपनियाँ कार्यरत हैं तथा ये कंपनियाँ विज्ञान की तकनीकी जानकारी और व्यापार की संभावनाओं को साथ लाती हैं| ये विज्ञान, तकनीक तथा डिजिटाइज़ेशन पर फ़ोकस करके सहयोग कर सकती हैं| देश के जिन जगहों पर डेनमार्क की कंपनियाँ उपस्थित हैं, नई दिल्ली ने वहाँ हरित ऊर्जा पार्कों तथा कौशल संस्थानों को स्थापित करने का प्रस्ताव किया है|
कोविड-19 के असर के परिदृश्य में वर्चुअल शिखर सम्मेलन ने स्वास्थ्य पर सहयोग की अत्यधिक आवश्यकता को रेखांकित किया| अपनी फ़ार्मा सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए, भारत भी इस क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने की इच्छा रखता है| साथ में, दोनों पक्षों ने डब्ल्यू॰टी॰ओ॰ में व्यापक सुधारों को लाने समेत बहुपक्षीय व्यवस्था पर आधारित नियमों के प्रति अपनी वचनबद्धता दिखाई| डेनमार्क के प्रधानमंत्री, मेत्ते फ़्रेडराइकसन ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन केवल एक मील का पत्थर साबित नहीं हुआ, बल्कि यह द्विपक्षीय सम्बन्धों को सशक्त बनाने पर एक दूरदर्शी समझौता भी है|
आलेख – प्रोफ़ेसर उम्मु सलमा बावा, प्रोफ़ेसर और जीन मोनेट चेयर, यूरोपीय अदध्ययन केंद्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय
अनुवाद एवं वाचन – मनोज कुमार चौधरी
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