अपने सम्बन्धों को बढ़ावा देने के लिए भारत और नॉर्वे ने दोहराई प्रतिबद्धता

भारत और नॉर्वे के बीच आर्थिक और व्यावसायिक रिश्तों को लगातार बढ़ावा देने के लिए संयुक्त आयोग की बैठक एक मुख्य मंच रहा है । हाल ही में इस मंच की छठी ऑनलाइन बैठक हुई । नॉर्वे के प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व नॉर्वे की विदेश मंत्री सुश्री इने एरिक्सन ने किया और भारतीय पक्ष का नेतृत्व विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने किया। द्विपक्षीय रिश्तों तो में प्रगति का जायज़ा लेते हुए दोनों पक्षों ने ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जहाँ और आगे बढ़ा जा सकता है खासकर लीक से हटकर नए क्षेत्रों में जहाँ महामारी से प्रभावित इस दुनिया में सतत विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का निर्माण संभव हो । दोनों देशों ने स्वास्थ्य सुरक्षा को महत्व देते हुए COVAX की वैश्विक सुविधा स्थापित करने का स्वागत किया जिसके तहत सभी की पहुँच वैक्सीन तक हो सके । दोनों पक्षों ने मातृत्व एवं बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग की प्रतिबद्धता भी दोहराई ।

इसी साल जनवरी में संपन्न व्यापार एवं निवेश संवाद के अनुरूप दोनों पक्षों ने तैयारियों को लेकर संतोष जताया जो जहाज़रानी और नौवहन सूचना व संचार प्रौद्योगिकी, अक्षय ऊर्जा, मत्स्य पालन सहित छोटे लघु एवं मध्यम दर्जे के उद्यमों के लिए भविष्य में लाभकारी होंगी । सागर संवाद एवं समुद्री अर्थव्यवस्था के सतत विकास से जुड़े कार्यबल की बैठक में आपसी हित के जिन क्षेत्रो की पहचान हुई वो है मत्स्य पालन , बंदरगाहों और नौवहन से जुडी पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकी, जलपोतों की रीसायक्लिंग यानि पुनर्चक्रण इत्यादि। समुद्रों में फैल रहे प्रदूषण, समेकित सागर प्रबंधन और अनुसन्धान तथा समुद्रों की भौगोलिक सरंचना के आधार पर उनके प्रबन्ध पर विशेष बल दिया गया।

भारत नॉर्वे संयुक्त आयोग के तहत दोनों देशो ने विभिन्न क्षेत्रों पर केंद्रित संयुक्त कार्यबल स्थापित किए हैं जैसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, उच्चशिक्षा, हाइड्रोकार्बन, संस्कृत, स्थानीय शासन, नौवहन सम्बन्धी मामले और मत्स्य पालन । दोनों ही देशों के विदेश मंत्रियो ने इन कार्यबलों को महत्वपूर्ण बताया चूंकि ये सतत विकास लक्ष्यों को बढ़ावा देने जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने और हरित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने पर बल देते है। इस नाते उन द्विपक्षीय सम्बन्धों में वो मामले भी शामिल कर लिए गए है जो विश्व समुदाय को प्रभावित करने वाले सामयिक सरोकारों पर बल दें ।

विश्व शांति और सुरक्षा रखने में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और महत्व पर भी बल दिया गया। संयुक्त राष्ट्र के भीतर दोनों देशों की भूमिका इसलिए बड़ी है चूंकि दोनों ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के आगामी, निर्वाचित सदस्य है और वरिष्ठ अधिकारी स्तर पर वार्ता संपर्क कायम करने पर सहमत है। दोनों सुरक्षा परिषद् के सदस्य 2021 से 2022 के मध्य रहेंगे । दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र के अतिरिक्त क्षेत्रीय, बहुपक्षीय और आपसी हित के वैश्विक मुद्दों की भी चर्चा की । ऐसे समय में जबकि बहुपक्षीय शासन व्यवस्था के कमज़ोर होने पर बहस जारी है भारत-नॉर्वे सहयोग संयुक्त राष्ट्र तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन दोनों में सुधारो को देखते हुए काफी महत्वपूर्ण है।

भारत-नॉर्वे सम्बन्ध 1947 में औपचारिक तौर पर स्थापित हुए। दोनों देश लोकतंत्र , मानवाधिकार और क़ानून के शासन जैसे साझा मूल्यों में विश्वास रखते है।

हाल के समय में दोनों देशों के सम्बन्ध और भी गतिशील एवं विकासोन्मुखी हुए है। इस साल दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति के 4 मसौदो पर हस्ताक्षर हुए है। ये बायो फ़ोटोनिक्स स्वास्थ्य एवं निदान उपकरणों, नैनो टेक्नोलॉजी, जल प्रबंधन , जल विद्युत परियोजना आधारित पढ़ाई और छात्रों तथा शोध विशेषज्ञों की आवा-जाही से सम्बन्ध रखते है और इनके कारण दोनों देशों की साझेदारी का और विस्तार हुआ है।

सहयोग के नए और विस्तृत क्षेत्रों पर बल दिया जा रहा है लेकिन आर्थिक और व्यावसायिक क्षेत्र में अभी काफ़ी ऐसी गुंजाइश है जिसका लाभ उठाया जाना बाक़ी है। दोनों देश नियमों पर आधारित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था पर बल देते है, व्यापार और निवेश का मज़बूत ढांचा पसंद करते है , निजी क्षेत्र को साथ लेकर चलते है इसलिए दोनों के बीच अनुसन्धान और तकनीकी सहयोग अत्यावश्यक है।

ऐसा करके ही आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाया जा सकता है। भारत तथा यूरोपीय मुक्त व्यापार संगठन के बीच मुक्त व्यापार संबंधी वार्ता जितनी जल्द पूरी होगी दोनों के बीच व्यापार और कारोबार उतना ही बढेगा तथा शुल्कों में कमी और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण जैसे लाभ मिलेगें । भारत-नॉर्वे संयुक्त आयोग की बैठक सफलता पूर्वक सम्पन्न हुई इस वायदे के साथ कि इसकी आगामी बैठक अब ओस्लो में होगी तथा तिथि का निर्धारण आपसी सुविधा और सहमति से होगा।

आलेख - डॉ संघमित्रा सरमा

अनुवाद - मुनीश शर्मा

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