भारत मोरक्को संबंधों में वृद्धिभारत मोरक्को संबंधों में वृद्धि

भारत और मोरक्को के रिश्ते 14वीं सदी पुराने हैं जब मशहूर यात्री और लेखक इब्न बतूता वहां से भारत आए। आधुनिक इतिहास में देखें तो भारत संयुक्त राष्ट्र में मोरक्को के फ्रांस से स्वतंत्रता संघर्ष का सदैव समर्थन करता रहा है उसके आजाद होने के बाद भारत ने 20 जून 1956 को उसे अपनी मान्यता भी दी। फिर 1957 में इन दोनों के बीच राजनयिक रिश्ते भी स्थापित हुए। वर्षों से भारत और मोरक्को के बीच दोस्ताना संबंध रहे हैं और उनमें बढ़ोत्तरी हुई है। भारत के उपराष्ट्रपति डॉ जाकिर हुसैन 1967 में मोरक्को को गए थे। मोरक्को के किंग मोहम्मद (षष्ठ) जब राजकुमार थे तब 1983 में निर्गुट सम्मेलन में भाग लेने भारत आए थे फिर गद्दी संभालने के बाद 2001 और 2003 में भी भारत आए। भारत—अफ्रीका मंच की 2015 में हुई शिखर बैठक में भाग लेने के लिए भी वहा भारत आए थे। ये भारत अफ्रीका मंच की तीसरी बैठक थी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई भी 1999 में रबात गए थे। दोनों पक्षों के बीच नियमित रूप से मंत्री और अधिकारी स्तर की बैठक होती रही हैं।

विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर की ऑनलाइन बैठक किंग्डम ऑफ मोरक्को के विदेश मंत्री नासेर बोरिता से हो चुकी है। दोनों पक्ष सहमत थे कि 2015 की तीसरी भारत अफ्रीका शिखर बैठक में भाग लेने अक्टूबर 2015 में जब किंग मोहम्मद (षष्ठ) यहां आए थे तो उसके बाद दोनों पक्षों के संबंधों में काफी सुधार आया है। तब से अब तक 23 मंत्री स्तरीय यात्राएं हो चुकी हैं आपसी सहमति के जिन 40 मसौदों पर हस्ताक्षर ​हुए हैं वो हैं सूचना प्रौद्योगिकी, शिक्षा, संस्कृति, कृषि, आपसी कानूनी सहायता और प्रत्यावर्तन से जुड़े समझौते और कुछ अन्य समझौते भी। इससे पता चलता है कि दोनों देश एक दूसरे के करीब आने की कितनी मजबूत इच्छा रखते हैं। विदेश मंत्री ने मोरक्को के सुल्तान के दूरदर्शिता पूर्ण नेतृत्व की प्रशंसा की, चूंकि इसी नेतृत्व ने मोरक्को को आर्थिक प्रगति और खुशहाली के रास्ते पर ला कर दिखाया है। व्यापार और निवेश को सकारात्मक तौर पर आंकते हुए दोनों मंत्रियों ने गौर किया कि उर्वरक, वस्त्र, औषधि, ऑटोमोबाइल और आईसीटी क्षेत्र में सहयोग खासतौर में बड़ा है।

दोनों पक्ष सहमत हुए कि पिछले 2 साल में साइबर सुरक्षा, आतंक निरोध और अंतरिक्ष को लेकर हुए समझौते एक मजबूत और गहरे रिश्ते की नींव तैयार कर चुके हैं। दोनों मंत्री सहमत थे कि अब रक्षा सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान संबंधी समझौतों के मसौदे को आंतरिक रुप देना चाहिए अंतिम रूप देना चाहिए ताकि इस पर जल्द ही हस्ताक्षर हों।

दोनों पक्षों ने कोविड-19 महामारी की चुनौतियों से निपटने को लेकर भी चर्चा की। महामारी के दौरान उड़ानें बंद होने पर मोरक्को में फंसे भारतीयों को यहां लाने में मदद के लिए डॉ जयशंकर ने मोरक्को सरकार से मिले सहयोग के लिए श्री बोरिता को धन्यवाद कहा। बदले में श्री बोरिता ने इस संकट के समय में भारत से मिली दवाओं और सुविधाओं के लिए अपनी सरकार की ओर से धन्यवाद प्रेषित किया।

दोनों मंत्रियों ने जिन क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर वैचारिक आदान-प्रदान किया वो हैं, संयुक्त राष्ट्र सुधार, आतंक से अंतर्राष्ट्रीय युद्ध, जलवायु परिवर्तन, अक्षय ऊर्जा और भारत—अफ्रीका शिखर बैठकों में आपसी सहयोग।
भारत के विदेश मंत्री ने लीबिया संबंधी मोरक्को की नीति और वक्तव्यों की प्रशंसा करते हुए लीबिया की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के साथ-साथ जनता की आकांक्षाओं को महत्वपूर्ण बताया। हाल में बोजिका में लीबिया को लेकर जो बातचीत हुई थी उसमें श्री बोरिता के वक्तव्य की प्रशंसा भी श्री एस जयशंकर ने की।

श्री बोरिता ने 2021—22 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सीट पर भारत के चुनाव को लेकर अपनी ओर से बधाई और स्थायी सीट पर भारत की दावेदारी का सरकार की ओर से समर्थन करने का भी आश्वासन दिया। संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों में बढ़ रही आपसी सहयोग पर दोनों पक्षों ने संतोष व्यक्त किया।

डॉ जयशंकर ने सहारा मामले के वास्तविक स्थायी, आपसी सहमति से स्वीकार्य समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रयासों में भारत की ओर से पूरे समर्थन का वायदा किया गया और इस दिशा में मोरक्को के सुल्तान के प्रयासों का भी आदेश किया।
विदेश मंत्री ने श्री बोरिता को स्थिति सामान्य होने पर भारत आने का न्योता दिया और इसे मोरक्को के विदेश मंत्री ने खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया।

आलेख - पदम सिंह
अनुवाद - मुनीष शर्मा

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