प्रधानमंत्री का सावधानी से त्योहार मनाने का आह्वान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑल इंडिया रेडियो नेटवर्क पर अपने "मन की बात" कार्यक्रम में देशवासियों को संबोधित किया। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मन की बात की, 17वीं कड़ी में, प्रधानमंत्री ने लोगों को दशहरा यानि विजयदशमी त्योहार की बधाई दी। उन्होंने कहा कि ईद, शरद पूर्णिमा, वाल्मीकि जयंती, धनतेरस के बाद आने वाले त्योहार, दिवाली, भाई दूज, छठ मैय्या की पूजा और गुरु नानक देव जी की जयंती भी कोरोना के इस संकट काल में सावधानी के साथ मनाई जानी चाहिए। इसलिये हम सभी को धैर्य और संयम बरतना होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब हम त्योहारों की बात करते हैं और तैयारियां करते हैं, तो सबसे पहले सोचते हैं कि हमें कब बाजार में जाना है और क्या खरीदना है। त्योहारों का उत्साह और बाजार की चमक आपस में जुड़े हुए है । श्री मोदी ने कहा कि इस बार जब हम खरीदारी करें तो
'वोकल फॉर लोकल' के हमारे संकल्प को याद रखें। बाजार से चीजें खरीदते समय हमें स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देनी होगी ।
उत्सव के उल्लास के बीच, हमें लॉकडाउन अवधि को भी याद रखना चाहिए। लॉकडाउन के दौरान हमने स्थानीय सब्जी विक्रेताओं, दूधवालों, सुरक्षा गार्ड, सफाई कर्मियों और घरेलू कामकाज में लगें भाइयों और बहनों की सेवाओं को बारीकी से देखा है। अब हमने अपने जीवन में उनकी भूमिकाओं की सार्थकता को बेहतर तरीके से महसूस किया है। संकट के क्षण के दौरान, वे हमारे साथ थे; वे हम सभी के साथ खड़े थे । उत्सव के दौरान हमें उन्हें साथ लेकर चलना चाहिए । प्रधानमंत्री ने सभी से आग्रह किया कि ईमानदारी से किसी भी तरह से उन्हें समारोहों शामिल करना सुनिश्चित करें ।
प्रधानमंत्री ने आग्रह किया कि हमें अपने बहादुर सैनिकों के बारे में भी सोचना चाहिए जो त्योहार के उत्सव के समय भी कर्तव्य पालन करते हुए सीमाओं पर तैनात हैं । उन्होंने कहा कि भारत माता के इन वीर सपूतों-बेटियों के सम्मान में हम सभी को घर में दीप जलाना है। उन्होंने उन परिवारों के त्याग को नमन किया, जिनके बेटे-बेटियां सीमा पर हैं।
प्रधानमंत्री ने स्थानीय उत्पादों के बारे में कहा कि खादी लंबे समय से सादगी का प्रतीक बनी हुई है लेकिन अब खादी को पर्यावरण के अनुकूल कपड़े के रूप में मान्यता मिल रही है । स्वास्थ्य की दृष्टि से यह बॉडी फ्रेंडली परिधान है जो सभी प्रकार के मौसम में चलता है और अब यह फैशन स्टेटमेंट भी बन चुका है।
उन्होंने बताया कि मेक्सिको में ओक्साका नाम की एक जगह है। आज वहां की खादी ओक्साका खादी नाम से लोकप्रिय है। खादी ओक्साका तक कैसे पहुंची, यह भी कम दिलचस्प नहीं है। ओक्साका के एक युवा, मार्क ब्राउन ने एक बार महात्मा गांधी की एक फिल्म देखी थी और बापू पर बनी इस फिल्म देखकर वें इतने प्रेरित हुए कि उन्होंने भारत में बापू के आश्रम का दौरा किया, उनके बारे में गहराई से जाना और उन्हें समझा ।
तब जाकर ब्राउन को ये एहसास हुआ कि खादी सिर्फ एक कपड़ा नहीं है; यह तो एक जीवन जीने का एक पूरा तरीका था । खादी किस तरह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता के साथ आपस में घुली मिली हुई थी उससे ब्राउन बहुत प्रभावित हुए थे । मैक्सिको लौटने पर ब्राउन ने खादी पर काम करने का संकल्प लिया। उन्होंने मैक्सिको के ओक्साका के ग्रामीणों को खादी के बारे में बताया और उन्हें प्रशिक्षित किया और अब ओक्साका खादी एक ब्रांड बन गई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गांधी जयंती पर इस बार दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित खादी स्टोर में महज एक दिन में एक करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी हुई। कोरोना के दौरान खादी के मास्क भी काफी लोकप्रिय हो गए हैं। देश के कई स्थानों पर स्वयं सहायता समूह और ऐसी अन्य संस्थाएं खादी मास्क बना रही हैं।
प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की एकता के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने भारतीय जनता को स्वतंत्रता आंदोलन के साथ जोड़ा। उन्होंने किसानों के मुद्दों को आजादी से जोड़ने का प्रयास किया। उन्होंने देश में रियासतों के एकीकरण के लिए काम किया। वह हर भारतीय के मन में ' अनेकता में एकता ' के मंत्र का आह्वान कर रहे थे ।
निष्कर्ष में, प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि कैसे किसानों से मकई की खरीद करने वाली एक कंपनी ने न सिर्फ मकई की लागत का भुगतान किया बल्कि इसके साथ अतिरिक्त बोनस भी दिया । किसान को सुखद अहसास हुआ । कंपनी ने अपने अतिरिक्त मुनाफे को किसानों के साथ साझा किया। इस पर किसानों का हक था। श्री मोदी ने कहा कि बोनस राशि छोटी हो सकती है लेकिन यह पहल बड़ी है। कृषि कानूनों के पारित होने के कारण यह संभव हुआ।
प्रधानमंत्री ने आगामी त्योहारों के लिए सभी भारतीयों को शुभकामनाएं दीं, हालांकि, उन्होंने सभी से मास्क पहनने, हाथ धोते रहने और दो गज की सामाजिक दूरी बनाए रखने का आग्रह किया है ।
आलेख : कौशिक रॉय; ऑल इंडिया रेडियो के समाचार विश्लेषक
अनुवाद एवं स्वर : वीरेन्द्र कौशिक
On Mon, Oct 26, 2020 at 4:31 PM Virender Kaushik <virenderkaushikair@gmail.com> wrote:
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> सामयिक वार्ता 26. 10 .2020: सोमवार
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> विषय : प्रधानमंत्री का सावधानी त्योहार मनाने का आह्वान
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> आलेख : कौशिक रॉय; ऑल इंडिया रेडियो के समाचार विश्लेषक
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> अनुवाद एवं स्वर : वीरेन्द्र कौशिक
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> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑल इंडिया रेडियो नेटवर्क पर अपने "मन की बात" कार्यक्रम में देशवासियों को संबोधित किया। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मन की बात की, 17वीं कड़ी में, प्रधानमंत्री ने लोगों को दशहरा यानि विजयदशमी त्योहार की बधाई दी। उन्होंने कहा कि ईद, शरद पूर्णिमा, वाल्मीकि जयंती, धनतेरस के बाद आने वाले त्योहार, दिवाली, भाई दूज, छठ मैय्या की पूजा और गुरु नानक देव जी की जयंती भी कोरोना के इस संकट काल में सावधानी के साथ मनाई जानी चाहिए। इसलिये हम सभी को धैर्य और संयम बरतना होगा।
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> प्रधानमंत्री ने कहा कि जब हम त्योहारों की बात करते हैं और तैयारियां करते हैं, तो सबसे पहले सोचते हैं कि हमें कब बाजार में जाना है और क्या खरीदना है। त्योहारों का उत्साह और बाजार की चमक आपस में जुड़े हुए है । श्री मोदी ने कहा कि इस बार जब हम खरीदारी करें तो
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> 'वोकल फॉर लोकल' के हमारे संकल्प को याद रखें। बाजार से चीजें खरीदते समय हमें स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देनी होगी ।
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> उत्सव के उल्लास के बीच, हमें लॉकडाउन अवधि को भी याद रखना चाहिए। लॉकडाउन के दौरान हमने स्थानीय सब्जी विक्रेताओं, दूधवालों, सुरक्षा गार्ड, सफाई कर्मियों और घरेलू कामकाज में लगें भाइयों और बहनों की सेवाओं को बारीकी से देखा है। अब हमने अपने जीवन में उनकी भूमिकाओं की सार्थकता को बेहतर तरीके से महसूस किया है। संकट के क्षण के दौरान, वे हमारे साथ थे; वे हम सभी के साथ खड़े थे । उत्सव के दौरान हमें उन्हें साथ लेकर चलना चाहिए । प्रधानमंत्री ने सभी से आग्रह किया कि ईमानदारी से किसी भी तरह से उन्हें समारोहों शामिल करना सुनिश्चित करें ।
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> प्रधानमंत्री ने आग्रह किया कि हमें अपने बहादुर सैनिकों के बारे में भी सोचना चाहिए जो त्योहार के उत्सव के समय भी कर्तव्य पालन करते हुए सीमाओं पर तैनात हैं । उन्होंने कहा कि भारत माता के इन वीर सपूतों-बेटियों के सम्मान में हम सभी को घर में दीप जलाना है। उन्होंने उन परिवारों के त्याग को नमन किया, जिनके बेटे-बेटियां सीमा पर हैं।
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> प्रधानमंत्री ने स्थानीय उत्पादों के बारे में कहा कि खादी लंबे समय से सादगी का प्रतीक बनी हुई है लेकिन अब खादी को पर्यावरण के अनुकूल कपड़े के रूप में मान्यता मिल रही है । स्वास्थ्य की दृष्टि से यह बॉडी फ्रेंडली परिधान है जो सभी प्रकार के मौसम में चलता है और अब यह फैशन स्टेटमेंट भी बन चुका है।
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> उन्होंने बताया कि मेक्सिको में ओक्साका नाम की एक जगह है। आज वहां की खादी ओक्साका खादी नाम से लोकप्रिय है। खादी ओक्साका तक कैसे पहुंची, यह भी कम दिलचस्प नहीं है। ओक्साका के एक युवा, मार्क ब्राउन ने एक बार महात्मा गांधी की एक फिल्म देखी थी और बापू पर बनी इस फिल्म देखकर वें इतने प्रेरित हुए कि उन्होंने भारत में बापू के आश्रम का दौरा किया, उनके बारे में गहराई से जाना और उन्हें समझा ।
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> तब जाकर ब्राउन को ये एहसास हुआ कि खादी सिर्फ एक कपड़ा नहीं है; यह तो एक जीवन जीने का एक पूरा तरीका था । खादी किस तरह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता के साथ आपस में घुली मिली हुई थी उससे ब्राउन बहुत प्रभावित हुए थे । मैक्सिको लौटने पर ब्राउन ने खादी पर काम करने का संकल्प लिया। उन्होंने मैक्सिको के ओक्साका के ग्रामीणों को खादी के बारे में बताया और उन्हें प्रशिक्षित किया और अब ओक्साका खादी एक ब्रांड बन गई है।
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> प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गांधी जयंती पर इस बार दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित खादी स्टोर में महज एक दिन में एक करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी हुई। कोरोना के दौरान खादी के मास्क भी काफी लोकप्रिय हो गए हैं। देश के कई स्थानों पर स्वयं सहायता समूह और ऐसी अन्य संस्थाएं खादी मास्क बना रही हैं।
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> प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की एकता के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने भारतीय जनता को स्वतंत्रता आंदोलन के साथ जोड़ा। उन्होंने किसानों के मुद्दों को आजादी से जोड़ने का प्रयास किया। उन्होंने देश में रियासतों के एकीकरण के लिए काम किया। वह हर भारतीय के मन में ' अनेकता में एकता ' के मंत्र का आह्वान कर रहे थे ।
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> निष्कर्ष में, प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि कैसे किसानों से मकई की खरीद करने वाली एक कंपनी ने न सिर्फ मकई की लागत का भुगतान किया बल्कि इसके साथ अतिरिक्त बोनस भी दिया । किसान को सुखद अहसास हुआ । कंपनी ने अपने अतिरिक्त मुनाफे को किसानों के साथ साझा किया। इस पर किसानों का हक था। श्री मोदी ने कहा कि बोनस राशि छोटी हो सकती है लेकिन यह पहल बड़ी है। कृषि कानूनों के पारित होने के कारण यह संभव हुआ।
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> प्रधानमंत्री ने आगामी त्योहारों के लिए सभी भारतीयों को शुभकामनाएं दीं, हालांकि, उन्होंने सभी से मास्क पहनने, हाथ धोते रहने और दो गज की सामाजिक दूरी बनाए रखने का आग्रह किया है ।
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