फगानिस्तान सम्मेलन 2020 में भारत ने की विकास सहायता की घोषणा
हाल में जेनेवा में वर्चुअल माध्यम से अफगानिस्तान सम्मेलन 2020 का आयोजन किया गया । इसमें भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री डॉ एस. जयशंकर ने किया । सम्मेलन की सह-अध्यक्षता संयुक्त राष्ट्र, इस्लामिक गणराज्य अफगानिस्तान और फ़िनलैंड सरकार ने की । इस सम्मेलन का लक्ष्य था अफगानिस्तान के परिवर्तनकारी 2015 से 24 के दशक के उत्तरार्ध में अफगानिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से प्रतिबद्धता को मजबूती से दोहराना ।
विदेश मंत्री ने सम्मेलन में घोषणा की कि क़ाबुल शहर के 20 लाख वासियों को पेय जल देने के लिए भारत ने अफगान सरकार के साथ शातूत बांध बनाने का समझौता किया है । इससे पहले क़ाबुल शहर के वासियों को बिजली देने के लिए फुल-ए-खुमारी विद्युत लाइन 202 किलोमीटर में बिछाने का काम भी भारत कर चुका है । डॉ जयशंकर ने घोषणा की कि सामुदायिक विकास परियोजनाओं के चौथे चरण के अंतर्गत 80 मिलियन अमरीकी डॉलर की 100 से अधिक परियोजनाएं भारत शुरू करेगा । विदेश मंत्री ने अफगानिस्तान के विकास में भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए उन लाभों का उल्लेख किया जो इस पड़ोसी देश की जनता को हो रहे हैं । उन्होंने अफगानिस्तान को भारत का रणनीतिक साझेदार कहा । अभी तक भारत वहाँ 3 अरब डॉलर विकास संबंधी कामों में लगा चुका है भारत वहाँ के सभी 34 प्रांतों में 400 परियोजनाओं से जुड़ा है यानि अफगानिस्तान कहीं से भी भारतीय मदद से अछूता नहीं है । भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि चारों तरफ भू भाग से गिरा होना अफगानिस्तान के विकास में बाधक रहा है इसलिए भारत ने उसे एक समर्पित वायु मार्ग और चाबहार बंदरगाह से जोड़ दिया है । कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने उसे 75,000 टन गेहूं की मदद चाबहार के रास्ते ही भेजी है । भारत ने अफगानिस्तान की शांति और विकास में भारी निवेश किया है । भारत चाहता है कि इस दौरान हुआ लाभ बरकरार रहे और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों, औरतों और कमज़ोर वर्गों की रक्षा हो । भारत के विदेश मंत्रालय ने अफगानिस्तान में बढ़ती हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए वहाँ तत्काल गहन युद्ध विराम का आह्वान किया है । भारत के हित भी अफगानिस्तान से जुड़े हैं अतः वो अफगान जनता तथा विश्व समुदाय के साथ मिलकर शांतिपूर्ण, खुशहाल, संप्रभु, लोकतांत्रिक और एकता के सूत्र में बँधे अफगानिस्तान के लिए प्रयासरत है ।
भारत और अफगानिस्तान के रिश्ते ऐतिहासिक तौर पर सुदृढ़ हैं । अफगानिस्तान के विकास में भारत की रणनीतिक साझेदारी और दीर्घावधि की प्रतिबद्धता जुड़ी है ।
अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में भारत की 3 अरब डॉलर से अधिक की सहायता राशि से जो 400 से अधिक परियोजनाओं चल रही हैं उनसे अफगानिस्तान वासियों के जीवन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है ।
भारत के विकास कार्यक्रम 5 स्तंभो पर टिके हैं : विशाल बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं, मानव संसाधन विकास और क्षमता निर्माण, मानवीय सहायता तथा उच्च प्रभावशीलता वाली सामुदायिक विकास परियोजनाएं तथा वायु व भू संपर्क के माध्यम से व्यापार व निवेश को बढ़ावा देना । भारत जो बड़ी परियोजनाएं वहाँ पूरी करके सौंप चुका है उनमें शामिल हैं अफ़गान ईरान सीमा पर 218 किलो मीटर की सड़क, भारत-अफ़गान मैत्री बाँध और अफगानिस्तान की संसदीय इमारत जो अफ़गान लोकतंत्र का सबसे अच्छा प्रतीक है ।
भारत में 65,000 से अधिक अफ़गान छात्र पढ़ चुके हैं वो भी छात्रवृत्ति लेकर, फिलहाल 15,000 पढ़ रहे हैं । युवा अफ़गान महिलाओं को भारत में पढ़ने के लिए 3,000 से अधिक वज़ीफ़े दिए गए हैं । अफगानिस्तान के पुन: र्निर्माण में भारत की प्रतिबद्धता के चलते ये संख्या हर साल बढ़ रही है ।
डॉ एस. जयशंकर ने कहा कि चाबहार बंदरगाह के ज़रिए भारत ने अफगानिस्तान को चारों ओर भूमि से घिरा होने की बाधा से निकलने में मदद की है और कोविड-19 की चुनौती का सामना करने के लिए 20 टन प्राण रक्षक दवाएं और उपकरण भी उसे दिए हैं ।
आलेख - पदम सिंह, समाचार विश्लेषक
अनुवाद - मुनीश शर्मा
विदेश मंत्री ने सम्मेलन में घोषणा की कि क़ाबुल शहर के 20 लाख वासियों को पेय जल देने के लिए भारत ने अफगान सरकार के साथ शातूत बांध बनाने का समझौता किया है । इससे पहले क़ाबुल शहर के वासियों को बिजली देने के लिए फुल-ए-खुमारी विद्युत लाइन 202 किलोमीटर में बिछाने का काम भी भारत कर चुका है । डॉ जयशंकर ने घोषणा की कि सामुदायिक विकास परियोजनाओं के चौथे चरण के अंतर्गत 80 मिलियन अमरीकी डॉलर की 100 से अधिक परियोजनाएं भारत शुरू करेगा । विदेश मंत्री ने अफगानिस्तान के विकास में भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए उन लाभों का उल्लेख किया जो इस पड़ोसी देश की जनता को हो रहे हैं । उन्होंने अफगानिस्तान को भारत का रणनीतिक साझेदार कहा । अभी तक भारत वहाँ 3 अरब डॉलर विकास संबंधी कामों में लगा चुका है भारत वहाँ के सभी 34 प्रांतों में 400 परियोजनाओं से जुड़ा है यानि अफगानिस्तान कहीं से भी भारतीय मदद से अछूता नहीं है । भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि चारों तरफ भू भाग से गिरा होना अफगानिस्तान के विकास में बाधक रहा है इसलिए भारत ने उसे एक समर्पित वायु मार्ग और चाबहार बंदरगाह से जोड़ दिया है । कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने उसे 75,000 टन गेहूं की मदद चाबहार के रास्ते ही भेजी है । भारत ने अफगानिस्तान की शांति और विकास में भारी निवेश किया है । भारत चाहता है कि इस दौरान हुआ लाभ बरकरार रहे और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों, औरतों और कमज़ोर वर्गों की रक्षा हो । भारत के विदेश मंत्रालय ने अफगानिस्तान में बढ़ती हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए वहाँ तत्काल गहन युद्ध विराम का आह्वान किया है । भारत के हित भी अफगानिस्तान से जुड़े हैं अतः वो अफगान जनता तथा विश्व समुदाय के साथ मिलकर शांतिपूर्ण, खुशहाल, संप्रभु, लोकतांत्रिक और एकता के सूत्र में बँधे अफगानिस्तान के लिए प्रयासरत है ।
भारत और अफगानिस्तान के रिश्ते ऐतिहासिक तौर पर सुदृढ़ हैं । अफगानिस्तान के विकास में भारत की रणनीतिक साझेदारी और दीर्घावधि की प्रतिबद्धता जुड़ी है ।
अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में भारत की 3 अरब डॉलर से अधिक की सहायता राशि से जो 400 से अधिक परियोजनाओं चल रही हैं उनसे अफगानिस्तान वासियों के जीवन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है ।
भारत के विकास कार्यक्रम 5 स्तंभो पर टिके हैं : विशाल बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं, मानव संसाधन विकास और क्षमता निर्माण, मानवीय सहायता तथा उच्च प्रभावशीलता वाली सामुदायिक विकास परियोजनाएं तथा वायु व भू संपर्क के माध्यम से व्यापार व निवेश को बढ़ावा देना । भारत जो बड़ी परियोजनाएं वहाँ पूरी करके सौंप चुका है उनमें शामिल हैं अफ़गान ईरान सीमा पर 218 किलो मीटर की सड़क, भारत-अफ़गान मैत्री बाँध और अफगानिस्तान की संसदीय इमारत जो अफ़गान लोकतंत्र का सबसे अच्छा प्रतीक है ।
भारत में 65,000 से अधिक अफ़गान छात्र पढ़ चुके हैं वो भी छात्रवृत्ति लेकर, फिलहाल 15,000 पढ़ रहे हैं । युवा अफ़गान महिलाओं को भारत में पढ़ने के लिए 3,000 से अधिक वज़ीफ़े दिए गए हैं । अफगानिस्तान के पुन: र्निर्माण में भारत की प्रतिबद्धता के चलते ये संख्या हर साल बढ़ रही है ।
डॉ एस. जयशंकर ने कहा कि चाबहार बंदरगाह के ज़रिए भारत ने अफगानिस्तान को चारों ओर भूमि से घिरा होने की बाधा से निकलने में मदद की है और कोविड-19 की चुनौती का सामना करने के लिए 20 टन प्राण रक्षक दवाएं और उपकरण भी उसे दिए हैं ।
आलेख - पदम सिंह, समाचार विश्लेषक
अनुवाद - मुनीश शर्मा
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