विदेश सचिव की यात्रा से मज़बूत होते भारत-मालदीव संबंध

भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला ने मालदीव के अपने समकक्ष अब्दुल गफ़ूर मोहम्मद के निमंत्रण पर मालदीव की आधिकारिक यात्रा की। कार्यभार संभालने के बाद से मालदीव की ये उनकी पहली यात्रा रही और साथ ही इस साल मार्च में कोरोना विषाणु फैलाने के बाद से भी दोनों देशों के बीच पहली उच्च स्तरीय यात्रा थी। इस यात्रा के दौरान भारत के विदेश सचिव ने राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह से मुलाक़ात की और मालदीव के विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री, आर्थिक विकास मंत्री, गृह मंत्री, योजना मंत्री, पर्यटन, युवा और खेल मंत्री के साथ ही संसद अध्यक्ष मोहम्मद नाशीद से भी मह्त्वपूर्ण विचार-विमर्श किए। दोनों देशों ने खेलों और युवा मामलों, प्रभावी सामुदायिक विकास परियोजनाएं और ग्रेटर माले संपर्क परियोजना के लिए एक सौ मिलियन अमरिकी डॉलर के अनुदान से जुड़े सहमति पात्र पर भी हस्ताक्षर किए। भारत के विदेश सचिव की यात्रा के दौरान देशभर में बच्चों के 67 उद्यानों के लिए उपकरण भी प्रदान किए गए। श्री शृंगला ने भारत की सहायता से मालदीव में चल रही परियोजनाओं की प्रगति का भी जायज़ा लिया। दिसंबर 2019 में आयोजित सयुंक्त आयोग की छठी बैठक के परिणामों और नवंबर 2018 में राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह के सत्ता में आने के बाद से बेहतर हुए द्विपक्षीय संबंधों को और मज़बूत करने के उपायों पर भी चर्चा की गई।

गत 2 वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक आधारभूत संरचनात्मक निर्माण सुरक्षा और रक्षा, खेल शिक्षा समुद्री क्षेत्र स्वास्थ तथा अन्य कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग में काफी विकास हुआ है। भारत ने ग्रेटर माले संपर्क परियोजना के लिए 1.4 अरब अमरिकी डॉलर और 500 मिलियन अतिरिक्त अमरिकी डॉलर के वित्त पैकेज की भी घोषणा की है। दोनों पक्ष इस बात पर संतुष्ट हैं कि भारतीय वित्त सहायता से चल रही परियोजनाएं या तो पूरी हो रही हैं या जल्द लागू होने वाली हैं। कोविड-19 की वजह से सामने आई चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग भी इसका उदहारण है कि दो देशों के बीच प्रतिबद्ध साझेदारी है। कोविड-19 से निपटने के लिए भारत से मदद प्राप्त करने वाला मालदीव पहला और सबसे बड़ा पड़ौसी है। भारत ने मालदीव को 250 मिलियन अमरीकी डॉलर मूल्य की मदद की है, ताकि लॉकडाउन के दौरान भारत में मालदीव के मरीज़ों का इलाज हो सके। इस संदर्भ में दोनों देशों के बीच ‘एयर बबल’ समझौता भी उल्लेखनीय है।

ये भी उल्लेखनीय है कि 1965 में आज़ाद होने के बाद से मालदीव भारत का अहम साझेदार रहा है। 1988 में तख़्तापलट के प्रयासों को विफल करने के लिए भारत द्वारा मालदीव की समय से की गई सहायता से भी दोनों देशों के संबंध मज़बूत हुए हैं। जब मालदीव में एक दलीय व्यवस्था से बहुदलीय व्यवस्था के साथ राजनितिक बदलाव हुआ तथा 2008 में बहुदलीय व्यवस्था के अंतर्गत पहला राष्ट्रपति चुनाव हुआ तब भी दोनों देशों की मैत्री और परस्पर समझ जारी। 2013 में राष्ट्रपति मोहम्मद वाहिद हसन और राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के समय ही भारत और मालदीव के संबंध अपने सबसे ख़राब स्तर पर पहुंच गए थे। अब जब राष्ट्रपति सोलिह के अंतर्गत प्रशासन ‘भारत-प्रथम नीति’ के लिए प्रतिबद्ध है, तब भारत भी अपनी ‘पड़ौस प्रथम’ नीति में मालदीव को विशेष स्थान देने की हर संभव कोशिश करता है। भारत 2019 में मालदीव के साथ सक्रियता बढ़ा रहा है। ऐसा चीन को जवाब देने के लिए नहीं किया जा रहा बल्कि दो दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के बीच पुराने संबंधों को और मज़बूती प्रदान करने के लिए किया जा रहा है।

सोलिह प्रशासन ने भारत पर लगे निराधार आरोपों को कोई अहमियत नही दी । मालदीव के एक छोटे से धड़े में भारत विरोधी रुझान होने के बावजूद मालदीव में बड़े पैमाने पर ये संतोष व्यापत है कि भारत द्वारा दी जा रही आर्थिक मदद से तैयार मालदीव की परियोजनाएं पूरी तरह पारदर्शी हैं तथा जनता व सरकार की जरूरतों के अनुरूप हैं। मालदीव को दी जा रही आर्थिक मदद हिन्द महासागर द्वीपसमूह में निर्भरता पैदा करने के उदेश्य से नही है बल्कि दोनों देशों के बीच परस्पर आत्मनिर्भरता आधारित मैत्री को बढ़ावा देना है। दोनों देशों के बीच शुरू की गई नौका सेवा और मालदीव की मदद से भारत द्वारा सीप्लेन सेवा आरम्भ करना इसका सटीक उदाहरण है।

द्विपक्षीय सक्रियता के अतिरिक्त भारत बहुपक्षीय मंच पर मालदीव की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत ने 2021 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र में अध्यक्षता के लिए मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्लाह शाहिद की उम्मीदवारी का समर्थन करने का आश्वासन दिया है।

दोनों देशों की सरकारें सम्बन्ध मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है इसलिये भारत और मालदीव संबंधों का भविष्य सकारात्मक प्रतीत होता है। जिन परियोजनाओं पर सहमति व्यक्त की गई है उनकी सफलता के लिए उच्च स्तरीय परस्पर सक्रियता बेहद ज़रूरी है।

आलेख : डॉ गुलबिन सुल्ताना, हिंद महासागर क्षेत्र मामलों की विश्लेषक

अनुवाद: नीलम मलकानिया

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