भारत-बहरीन संबंध मज़बूती की ओर

भारत ऐतिहासिक संबंधों, द्विपक्षीय व्यापार और जनमानस संपर्क के आधार पर छोटे द्वीप राष्ट्र बहरीन के साथ मजबूत वाणिज्यिक, सामरिक और सांस्कृतिक संबंध साझा करता है। हालांकि आकार में छोटा यह देश, रणनीतिक रूप से खाड़ी के दक्षिण पश्चिम में स्थित है परन्तु क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है। बहरीन अरब खाड़ी मॉडल के विकास का भी अग्रणी है। भारत ने बहरीन के साथ हमेशा मजबूत राजनयिक और वाणिज्यिक संबंध बनाए रखे हैं। पेट्रोलियम और अन्य वस्तुओं के द्विपक्षीय व्यापार के अलावा, इस देश में लगभग 300,000 भारतीय प्रवासी निवास करते है जिन्होंने आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और स्थानीय समुदायों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंधों का उदाहरण भी प्रस्तुत किया है।

अगस्त 2019 में इस द्वीपीय राष्ट्र का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार द्विपक्षीय संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए हैं। भारत और बहरीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बल देने के अपने प्रयासों के लिए, प्रधानमंत्री को बहरीन ऑर्डर - प्रथम श्रेणी शाह हमद बिन ईसा अल-खलीफा द्वारा प्रदान किया गया था। यात्रा के दौरान, दोनों पक्षों ने इसरो और बहरीन राष्ट्रीय अंतरिक्ष और विज्ञान एजेंसी (NSSA) के बीच सहयोग के लिए और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के साथ बहरीन सहयोग के लिए चार समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। इनसे द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिली है।

भारत और बहरीन ने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करने के लिए भी प्रतिबद्धता व्यक्त की है। प्रधानमंत्री मोदी और शाह हमद ने अप्रैल 2020 में टेलीफोन पर बातचीत की और सहमति व्यक्त की कि उनके अधिकारी नियमित संपर्क में रहेंगे और कोविड-19 की चुनौतियों से निपटने के लिए एक-दूसरे को हर संभव सहायता सुनिश्चित करेंगे। बहरीन भी उन पहलेदेशों में शामिल था, जहां भारत ने महामारी के खिलाफ लड़ाई में मदद करने के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात को स्वीकृति दी थी।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस सप्ताह बहरीन की यात्रा आरंभ की। यह उन कुछ द्विपक्षीय यात्राओं में से एक है, जिन्हें विदेश मंत्री ने हाल के महीनों में पूरा करने का निर्णय लिया है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय यात्राएं और बैठकें कोविड-19 से बाधित हुई हैं। याद रखने वाली बात है कि है कि विदेश मंत्री के रूप में बहरीन के लिए डॉ. जयशंकर की यह पहली यात्रा है, हालांकि वे राजनयिक के रूप में अपने लंबे करियर के दौरान अरब खाड़ी देशों के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने के नेतृत्वकर्ता के रूप कोई नए नहीं हैं।

यह दो-दिवसीय यात्रा कई कारणों से महत्वपूर्ण है। यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में सहायता करेगी, विशेषरूप जब दुनिया कोविड-19 महामारी से निर्णायक रूप से लड़ने की तैयारी कर रही है। पूरा विश्व इस महामारी के कारण उत्पन्न हुए आर्थिक प्रकोपों से उबरने और कोविड के बाद की चुनौतियों से निपटने की तैयारियों में भी लगी है।

बहरीन में अपने समकक्ष डॉ. अब्दुल्लातिफ बिन रशीद अल-ज़ायनी के साथ चर्चा के दौरान, दोनों पक्ष 'रक्षा और समुद्री सुरक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, व्यापार और निवेश, बुनियादी ढाँचा, आईटी, आर्थिक तकनीक-फिनटेक, स्वास्थ्य, हाइड्रोकार्बन और नवीकरणीय ऊर्जा सहित अनेक क्षेत्रों में ऐतिहासिक भारत-बहरीन संबंधों को और मजबूत बनाने पर सहमत हुए। । डॉ. जयशंकर ने आने वाले महीनों में होने वाली तीसरी भारत-बहरीन उच्च संयुक्त आयोग की बैठक में भाग लेने के लिए बहरीन के विदेश मंत्री को नई दिल्ली आने के लिए आमंत्रित किया।

इस यात्रा से भारत को क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में बदलते हुए खाड़ी क्षेत्र के साथ अपनी बढ़ती साझेदारी में सहायता करने की आशा है। इज़राइल के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के लिए बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात का निर्णय, जिसका भारत द्वारा स्वागत किया गया, एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय विकास है। नई दिल्ली बदलती क्षेत्रीय गतिशीलता के प्रति सजग है और क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता की दिशा में आंदोलन का समर्थन करता है।

विदेश मंत्री ने बहरीन के युवराज सलमान बिन हमद अल-खलीफा, उप-सर्वोच्च कमांडर और वहाँ के प्रधानमंत्री से भी भेंट की और पूर्व प्रधानमंत्री राजकुमार खलीफा बिन सलाम अल-खलीफा के दुखद निधन पर गंभीर संवेदना व्यक्त की। भारत-बहरीन संबंधों को मजबूत करना और बहरीन में भारतीय समुदाय के कल्याण के लिए। यात्रा के दौरान, विदेशमंत्री ने बहरीन में भारतीय समुदाय के नेताओं के साथ एक वर्चुअल बैठक की और मनामा में 200 साल पुराने श्रीनाथजी (श्री कृष्ण) मंदिर का दौरा किया, जो भारत और बहरीन के बीच ऐतिहासिक संबंधों और लोगों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों का प्रमाण है।

भारत और बहरीन ऐतिहासिक संपर्क, व्यापार, आर्थिक और राजनयिक संबंधों के सहस्राब्दियों और एक बढ़ते राजनीतिक, सुरक्षा और रक्षा सहयोग के आधार पर मैत्रीपूर्ण संबंधों को साझा करते हैं। दोनों देशों की क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और समृद्धि के लिए एक साझा दृष्टिकोण है और डॉ. जयशंकर की यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाएगी। यह यात्रा पारस्परिक हितों के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के लिए भी मंच तैयार करती है।



आलेख - डॉ मोहम्मद मुदस्सिर क़मर
अनुवादक एवं वाचक - हर्ष वर्धन

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