गिलगित बाल्टिस्तान की स्थिति बदलने संबंधी पाकिस्तान की कोशिशों को भारत ने दृढ़ता से अस्वीकार किया



एक नवंबर 2020 को, पाकिस्तान ने गिलगित बाल्टिस्तान (जी॰बी॰) की तत्कालिक प्रांतीय स्थिति को स्वीकृति देने संबंधी अपने निर्णय की घोषणा की| ध्यातव्य है कि गिलगित बाल्टिस्तान को पूर्व में उत्तरी क्षेत्र के रूप जाना जाता था| पाक अधिकृत कश्मीर (पी॰ओ॰के॰) के हिस्से के रूप में वर्तमान में यह पाकिस्तान के अवैध नियंत्रण में है| भारत ने इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दिखाई है तथा इस क्षेत्र के “अवैध नियंत्रण” को धोखे से छिपाने की पाकिस्तान की कोशिशों की कटु आलोचना की है| विदेश मंत्रालय (एम॰ई॰ए॰) के प्रवक्ता, अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय क्षेत्र के एक हिस्से की वास्तविक स्थिति को बदलने संबंधी पाकिस्तान की कोशिशों को भारत “दृढ़ता से अस्वीकार” करता है, जिस पर इस्लामाबाद ने “ग़ैरक़ानूनी और जबरन कब्ज़ा” जमा रखा है| उन्होंने पड़ोसी देश को इस प्रकार के क्षेत्रों को तुरंत खाली करने को कहा है| उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान की सरकार का इन क्षेत्रों पर कोई अधिकार नहीं है तथा हाल की कोशिशें इस क्षेत्र में पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे “गंभीर” मानवाधिकारों के उल्लंघन को छिपाने में सफल नहीं होंगी| श्री श्रीवास्तव ने दोहराया कि तथाकथित “गिलगित बाल्टिस्तान” के क्षेत्र समेत संघ शासित जम्मू तथा कश्मीर और लद्दाख क़ानूनी तौर पर भारत के अभिन्न हिस्से हैं तथा 1947 में भारत संघ में जम्मू तथा कश्मीर का अखंडनीय परिग्रहण किया गया है|

गिलगित बाल्टिस्तान मुकुट के आकार के प्रदेश जम्मू तथा कश्मीर का बायाँ सिरा है| पाक अधिकृत कश्मीर के आकार की तुलना में लगभग पाँच गुना बड़ा यह क्षेत्र बहुत ऊंचाई पर स्थित है| लेकिन पी॰ओ॰के॰ की आबादी बहुत कम है| पाकिस्तान के सहयोगी चीन का यह क्षेत्र एकमात्र ज़मीनी संपर्क का माध्यम है| एक नवंबर 2020 को इस क्षेत्र की इमरान ख़ान की यात्रा 15 नवंबर को होनेवाले गिलगित बाल्टिस्तान विधान सभा के चुनावों के पहले हुई है| इससे पहले, गिलगित बाल्टिस्तान विधान सभा के चुनाव 2015 में हुए थे| बहरहाल, इस क्षेत्र का देश के संघीय राजनीतिक ढांचे यानि पाकिस्तान की संसद के निचले और ऊपरी सदनों में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है| पूर्ण प्रांत के रूप में पाकिस्तान में गिलगित बाल्टिस्तान के आधिकारिक समावेशन के लिए पाकिस्तानी संविधान में एक संशोधन की आवश्यकता होगी| हाल के गिलगित बाल्टिस्तान के चुनाव 18 अगस्त को होनेवाले थे, लेकिन कोरोनावायरस महामारी के कारण 11 जुलाई को पाकिस्तान के निर्वाचन आयोग ने इसे स्थगित कर दिया| गिलगित बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का पाँचवाँ प्रांत बनाने का मुद्दा गर्म है, इसी परिदृश्य में ये चुनाव होनेवाले हैं|

अफ़ग़ानिस्तान तथा चीन से लगनेवाले 1॰2 मिलियन की अनुमानित जनसंख्या के साथ रणनीतिक रूप से स्थित गिलगित बाल्टिस्तान चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सी॰पी॰ई॰सी॰) की 65 बिलियन डॉलर की मूलभूत संरचना विकास योजना का मुख्य क्षेत्र है| भविष्य के गिलगित बाल्टिस्तान में चीन महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता है| यह क्षेत्र राष्ट्रपति, शी चिनफिंग के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की मुख्य परियोजना, सी॰पी॰ई॰सी॰ के माध्यम से मूलभूत संरचना निवेशों के रूप में इसके अशांत शिंजियांग ऊईग़ुर स्वायत्त क्षेत्र से संलग्न है| सी॰पी॰ई॰सी॰ की संकल्पना में, अरब सागर में पाकिस्तान के ग्वादर बन्दरगाह को इंटर्लोकिंग बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के एक सेट के माध्यम से शिंजियांग के काश्गर से जोड़ दिया जाएगा| गिलगित बाल्टिस्तान इस योजना में महत्वपूर्ण हैं| पाकिस्तान के पांचवें प्रांत में गिलगित बाल्टिस्तान का समावेशन इस क्षेत्र में चीन के सी॰पी॰ई॰सी॰ में किए गए निवेशों को सुरक्षा प्रदान करने में सहायक होगा|

पाकिस्तान की सेना के समर्थन में, इमरान ख़ान की सत्तारूढ़ पार्टी, पाकिस्तान की तहरीक़-ए-इंसाफ़ (पी॰टी॰आई॰) जी॰बी॰ में चुनावों से अपनी संख्या बढ़ाने की आशा कर रही है| इस प्रस्ताव को पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व का समर्थन प्राप्त है| भारत की तर्कसंगत स्थिति यह रही है कि गिलगित बाल्टिस्तान भारतीय क्षेत्र का हिस्सा है| एक नवंबर को दिये गए विदेश मंत्रालय के एक वक्तव्य में इस बात की पुष्टि होती है| 2018 के प्रशासनिक आदेश को संशोधित करने के लिए सरकार को अनुमति देने वाले पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के फ़ैसले के बाद भारत ने एक समान स्टैंड लिया था| 2018 के गिलगित बाल्टिस्तान के आदेश ने प्रशासनिक परिवर्तन करने की अनुमति दी, जिसमें मुद्दों की एक सारणी पर क़ानून बनाने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को अधिकृत किया जाना शामिल है| सरकार ने एक वरिष्ठ पाकिस्तानी राजनयिक को अदालत के फ़ैसले पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए सीमांकन जारी किया है| कश्मीर में भी चीन के बढ़ते दखल को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है|

आलेख – डॉ॰ स्मिता, अफ़ग़ानिस्तान पाकिस्तान मामलों की रणनीतिक विश्लेषक

अनुवाद एवं वाचन – मनोज कुमार चौधरी

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