भारत और इटली के बीच गहराती सक्रियता की संभावना
यूरोपीय देशों के साथ द्विपक्षीय संबंध स्थापित करना भारत की विदेश नीति का ऐसा लक्ष्य रहा जिसके अच्छे परिणाम हुए। हालिया समय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डेनमार्क, फिनलैंड और फ्राँस जैसे कई यूरोपीय देशों के साथ द्विपक्षीय सम्मेलन किए हैं जिनकी वजह से ऐसे समय में यूरोपीय शक्तियों के साथ भारत की सक्रियता बढ़ी है जब वैश्विक ताक़तों के बीच नए सिरे से संतुलन बनाए जाने की ज़रूरत है।
6 नवंबर 2020 को प्रधानमंत्री मोदी और उनके इतालवी समकक्ष प्रोफ़ेसर ग्युसेप कोंते के बीच इंटरनेट के माध्यम से वार्ता हुई। इस बैठक की वजह से द्विपक्षीय संबंधों की विस्तृत रूपरेखा की समीक्षा का व्यापक अवसर मिला और भावी परस्पर गठजोड़ की संभावनाएँ बढ़ीं।
इटली के नेता के साथ वर्चुअल शीर्ष बैठक के दौरान अपनी शुरुआती टिप्पणी में प्रधानमंत्री मोदी ने कोविड-19 महामारी से निपटने के इटली के प्रयासों की तारीफ़ करते हुए फिर से ये आश्वासन दिया कि इस रोग से लड़ने के लिए हर मदद की जाएगी। महामारी के बुरे प्रभावों से निपटने के बारे में भी विचार-विमर्श किया गया। दोनों नेताओं ने जी-20 व्यवस्था में विकास लक्षित वैश्विक एजेंडे के संदर्भ में सभी क्षेत्रों में कार्य करने का संकल्प भी व्यक्त किया।
इस बैठक के दौरान कुल मिलाकर निवेश, वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग, ऊर्जा, प्लास्टिक पूनर्चक्रिकरण, मछली उद्योग, जहाज़रानी, स्मारकों के संरक्षण और बहाली जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 15 समझौतों और सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए।
ये जानना रुचिकर है कि बैठक के बाद जारी किए गए संयुक्त वक्तव्य तथा कार्य योजना 2020-2024 में दोनों पक्षों ने समेकित वैश्विक शासन और नियम आधारित मुक्त तथा खुली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था आधारित सम्पर्क पहल के तौर पर मूल क्षेत्र के रूप में हिन्द प्रशांत क्षेत्र के महत्व पर ज़ोर दिया। ये भी याद रखा जाना चाहिए कि हाल ही में फ्राँस और जर्मनी हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग के बारे में अपनी-अपनी नीतियों के साथ सामने आए हैं और इस क्षेत्र में सहयोग करने की इटली की इच्छा से भारत को क्षेत्रीय एकता को बढ़ावा देने के साथ-साथ यूरोपीय देशों के साथ भी सहयोग बढ़ाने के बहुत से अवसर हासिल होंगे।
इस ऑनलाइन बैठक में भारत और इटली ने रक्षा, आतंकरोध और सुरक्षा, बहुपक्षवाद, छात्रों का परस्पर देशों में आना, सांस्कृतिक पर्व, पर्यटन और जन से जन का संपर्क जैसे क्षेत्रों में परस्पर सक्रियता बढ़ाए जाने की ज़रूरत पर बल दिया। प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री गोंते ने संयुक्त रक्षा समिति और सैन्य सहयोग समूह के माध्यम से विमर्श को बढ़ाते हुए दोतरफ़ा गठजोड़ तथा तकनीकी सहयोग, सह उत्पादन और सह विकास पर ज़ोर दिया।
दोनों पक्ष क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बहुपक्षीय मंचों पर निकट सहयोग करने के लिए राज़ी हुए। विशेष रूप से जी-बीस तथा संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन व्यवस्था समझौते और पैरिस समझौते को लागू करने के संदर्भ में। भारत ने अनुसमर्थन प्रक्रिया पूरी होते ही संयुक्त अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में इटली के शामिल होने का स्वागत किया।
राजनीतिक आदान-प्रदान तथा नीति संयोजन के सभी स्तरों पर धीमी प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए दोनों पक्षों ने आर्थिक सहयोग के स्तर पर ध्यान केद्रित करने की ज़रूरत पर बल दिया। दोनों देशों के बीच 2019 में केवल 9.52 अरब यूरो का व्यापर था जबकि इटली की कंपनियाँ भारत में फैशन और वस्त्रोद्योग, कपड़ा मशीनों, मोटर वाहनों के पूर्ज़ों, आधारभूत संरचना, रसायन, उर्जा और बीमा जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
इस वर्चुअल बैठक के मुख्य सकारात्मक बिंदुओं में से एक ये रहा कि इटली ने भारत के साथ अधिक सार्थक और सफल आर्थिक साझेदारी के लिए आपूर्ति शृंखला और निवेश की विविधता बनाए रखने के लिए अपनी रुचि व्यक्त की। असल में शीर्ष बैठक के दौरान द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग में आपूर्ति शृंखला की विविधता पर ध्यान केन्द्रित किया गया क्योंकि कोविड प्रभावित दुनिया में ये ज़रूरी है। इस संदर्भ में दोनों नेता ऐसी नई वित्तीय योजनाएँ तैयार करने के लिए राज़ी हुए जो द्विपक्षीय निवेश को बढ़ावा दे सके।
दोनों नेताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत और यूरोपीय संघ को लाभकारी भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और निवेश समझौता वार्ता शीघ्र आरम्भ करनी चाहिए। भारत और इटली के नेताओं ने अपनी प्राथमिकताओं, सामरिक लक्ष्यों और 2020 से लेकर 2025 तक परस्पर साझेदारी व्यवस्था से जुड़ी एक कार्ययोजना भी स्वीकार की।
आलेख- डॉ. संगमित्रा सरमा, विशेषज्ञ, यूरोपीय सामरिक मामले
अनुवाद- नीलम मलकानिया
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