भारत-नेपाल संबंधों की प्रगाढ़ता

भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला पिछले सप्ताह नेपाल की यात्रा पर थे। भारत के सेना प्रमुख की नेपाल यात्रा के तुरंत बाद विदेश सचिव की इस यात्रा से नेपाल के साथ भारत के संबंधों को और गहरा करने में बहुत मदद मिलेगी।

भारत और नेपाल को खुली सीमा वाले और समानता वाले ऐसे देशों के रूप में जाना जाता है जिनके बीच रोटी और बेटी का रिश्ता है। जितने नज़दीकी संबंध हैं, पहचान की भिन्नता की उतनी ही पेचीदगियाँ भी हैं। हालांकि नेपाल की राजनीतिक संरचना के कुछ धड़े भारत के साथ चीन के इशारे पर व्यवहार करते आए हैं।

लॉकडाउन और कोरोना की वजह से पृथकवाद ने पूरे साल सामाजिक दूरी बनाए रखने को मजबूर किया लेकिन फिर भी भारत ने कोरोना संकट के समय नेपाल को राहत और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई। विदेश सचिव बनने के बाद ये श्री शृंगला की नेपाल की पहली यात्रा थी। लेकिन ये कोई औपचारिक यात्रा नहीं थी। उन्होंने हाल ही में नेपाल के विदेश सचिव बने श्री भरत राज पौडयाल से मुलाक़ात की। इस यात्रा के दौरान उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री, राष्ट्रपति, विपक्ष के नेताओं सहित उच्च स्तरीय नेताओं से भी मुलाक़ात की।

इन बैठकों के दौरान द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न आयामों के साथ ही कोविड-19 महामारी की वजह से सामने आई बाध्यताओं के हालिया समय के दौरान सकारात्मक गतिविधियों के बारे में भी चर्चा की गई। असल में लॉकडाउन के दौरान भी भारत और नेपाल के बीच व्यापार और आर्थिक गतिविधियाँ लगातार जारी रहीं और साथ ही विकासीय साझेदारी भी। यात्रा के दौरान ऐसे विशेष उपायों पर भी चर्चा की गई जिनकी मदद से पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना जैसी अन्य परियोजनाएँ जल्द पूरी की जा सकें और साथ ही नई आर्थिक पहलें भी लागू की जा सकें। दोनों पक्षों ने सीमा मामले पर भी अपने-अपने विचार साझा किए और द्विपक्षीय व्यवस्था के अंतर्गत उचित तरीक़े से इन्हें सुलझाने पर विचार किया गया। नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली के साथ विदेश सचिव की बैठक में द्विपक्षीय सक्रियता बनाए रखने, जन से जन का सम्पर्क मज़बूत करने तथा परस्पर हित वाले द्विपक्षीय मुद्दों में वास्तविक प्रगति बनाए रखने पर ज़ोर दिया गया। एक-दूसरे के लिए संवेदनशील मुद्दों के प्रति सम्मान बनाए रखने और बहुआयामी संबंधों में सकारात्मकता बनाए रखने की ज़रूरत पर बल दिया गया।

विकासात्मक साझेदारी भारत और नेपाल संबंधों का अभिन्न अंग है। विदेश सचिव की यात्रा से कोविड-19 संबंधी सहयोग और मौजूदा परियोजनाओं पर गहन चर्चा करने का अवसर प्राप्त हुआ। ये संतोषजनक है कि भारत द्वारा ब्रॉड गेज बनाई गई रेलवे लाइन महामारी के दौरान भी भारत में जयनगर से नेपाल में जनकपुर तक संचालित होती रही।

विदेश सचिव ने 2015 में आए भूकंप का केन्द्र रहे गोरखा ज़िले का दौरा भी किया। भारत की मदद से बन रहे तीन विद्यालयों का उन्होंने उद्घाटन किया। दोनों देशों के बीच एक और सकारात्मक सूत्र है, बौद्ध धर्म की शृंखला ने भारत की आर्थिक मदद द्वारा बहाल किए गए मनंग ज़िले में तारे गोंपा बौद्ध विहार का भी रिमोट से उद्घाटन किया।

नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावती के साथ बैठक के दौरान भारत के विदेश सचिव ने भारत सरकार की ओर से उपहार स्वरूप रेमदेसेवीर दवा की 2000 शीशियाँ भी भेंट की। इससे पहले भारत सरकार द्वारा ज़रूरी दवाएँ, उपकरण और क्षमता वर्धन तकनीक के अलावा कोविड से जुड़ी अन्य सहायता भी प्रदान की गई है। दवा भेंट करते समय विदेश सचिव ने प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि कोविड टीका सिर्फ़ भारत के लोगों के लिए नहीं विकसित किया गया है बल्कि पूरी मानव जाति के लिए किया गया है और भारत इसे सभी के लिए उपलब्ध करवाएगा। उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि निकट पड़ौसी और नेपाल जैसे मित्र पहली प्राथमिकता होंगे।

विदेश सचिव की नेपाल यात्रा से दोनों देशों के बीच लगातार उच्च स्तरीय सक्रियता का मार्ग प्रशस्त होगा। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारत-नेपाल संयुक्त आयोग की अगली बैठक के लिए नेपाल के विदेश मंत्री को आमंत्रित किया है। भारत और नेपाल के संबंध ऐसे हैं कि कोविड के समय में जब सामाजिक दूरी ज़रूरी है तब भी दोनों देशों के बीच संस्थागत और समाज आधारित दूरी नहीं हो सकती।

आलेख- राजदूत मनजीव सिंह पुरी, नेपाल के लिए पूर्व राजदूत

अनुवाद- नीलम मलकानिया

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