“इन्वेस्ट इंडिया” ने अंकटाड निवेश संवर्धन पुरस्कार जीता

इन्वेस्ट इंडिया भारत की राष्ट्रीय निवेश संवर्धन एजेंसी है| संयुक्त राष्ट्र (अंकटाड) ने इन्वेस्ट इंडिया को 2020 का संयुक्त राष्ट्र निवेश संवर्धन पुरस्कार का विजेता घोषित किया है|यह पुरस्कार विश्व भर में निवेश संवर्धन एजेंसियों (आई॰पी॰एज़॰) के श्रेष्ठ अभ्यासों की सराहना करता है तथा इसे मान्यता देता है| अंकटाड ने 180 आई॰पी॰एज़॰ का मूल्यांकन किया तथा इन्वेस्ट इंडिया को विजेता घोषित किया| इस सप्ताह, पुरस्कार समारोह जेनेवा के अंकटाड मुख्यालयों में आयोजित किया गया|

निवेश संवर्धन एजेंसियों के लिए संयुक्त राष्ट्र निवेश संवर्धन पुरस्कार अत्यधिक इच्छित पुरस्कार है| भारत से पहले इस पुरस्कार को कोरिया, सिंगापुर तथा जर्मनी ने जीता है|अंकटाड आई॰पी॰एज़॰ के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने वाला तथा विश्व के श्रेष्ठ अभ्यासों की पहचान करने वाला एक केंद्रीय एजेंसी है|

कोविड-19 महामारी की पृष्ठभूमि में, यह संकट प्रबंधन तथा सरकार के आर्थिक आपात महामारी उपायों को सम्मिलित करने की दिशा में “हमेशा की तरह व्यापार” निवेश सुगमता से निवेश संवर्धन एजेंसियों के फ़ोकस में एक गति की तरह है| इन प्रचार सेवाओं का संचालन ऑनलाइन डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर किया जाता है तथा कर्मचारियों को “घर से काम” करने को कहा जाता है| कोविड-19 महामारी के प्रति प्रतिक्रिया दिखाने के आई॰पी॰एज़॰ के तरीक़े 2020 के संयुक्त राष्ट्र निवेश संवर्धन पुरस्कार के मूल्यांकन के लिए प्रमुख मानदंड रहे हैं| अंकटाड ने मार्च 2020 में महामारी के प्रति आई॰पी॰ए॰ की प्रतिक्रियाओं का मूल्यांकन तथा निगरानी करने के लिए एक टीम नियुक्त किया| अप्रैल तथा जुलाई 2020 में संयुक्त राष्ट्र ने आई॰पी॰ए॰ पर्यवेक्षक के रूप में निवेश संवर्धन एजेंसियों के श्रेष्ठ अभ्यासों को प्रकाशित किया| इन प्रकाशनों में दीर्घकालिक व्यावसायिक रणनीतियों, हितधारकों की आउटरीच, व्यवसाय के पुनर्गठन तथा आपूर्तिकर्ता की आउटरीच को दर्शाया गया| इन्होंने सोशल मीडिया के संपर्कों का विस्तार किया तथा कोविड प्रतिक्रिया दलों पर फ़ोकस किया| व्यवसाय प्रतिरक्षा मंच, विशिष्ट निवेश फ़ोरम की वेबिनार शृंखलाओं जैसे इन्वेस्ट इंडिया के श्रेष्ठ अभ्यासों को अंकटाड ने श्रेष्ठ अभ्यास के रूप में दर्शाये हैं| इन्वेस्ट इंडिया ने दीर्घ-कालिक रणनीतियों को भी साझा किया है तथा अंकटाड के उच्च स्तरीय चिंतन सत्रों में निवेश संवर्धन, सुगमता तथा अवधारण के लिए इन अभ्यासों का अनुगमन किया जा रहा है|

विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी की स्वर्ण जयंती भाषण शृंखलाओं में “महामारी के दूसरे पहलू” शीर्षक पर आधारित हाल के एक वेबिनार का आयोजन विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचार और विज्ञान प्रसार राष्ट्रीय परिषद ने किया| नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि कोविड-19 के बाद के प्रभावों से जल्द उबरने के बाद अगले कुछ वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था सभी क्षेत्रों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा नवोन्मेष का प्रयोग करके विश्व में शीर्ष अर्थव्यवस्था होगी|

विभाग के सचिव ने कहा कि विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभाग विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी और स्टार्ट-अप्स का प्रयोग करके भारतीय अर्थव्यवस्था को इच्छित गति से बढ़ाने में मददगार रहा है| कश्मीर, सिक्किम तथा असम के केंद्रीय विश्वविद्यालयों ने जलवायु परिवर्तन पर अनुसंधान के लिए “उत्कृष्टता केन्द्रों” को स्थापित किया है| नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि महामारी के दौरान एक सृजनात्मक विनाश की घटना घट चुकी है, ऐसे में कोविड-19 महामारी ने कई चीज़ों को परिवर्तित किया है तथा काम को अंजाम देने के नए तरीक़े दिखाये हैं| उन्होंने कहा कि यह रूपांतर कोविडोत्तर विश्व में स्थायी होने जा रहा है| उन्होंने कोविडोत्तर विश्व में एक नवोन्मेषी आर्थिक व्यवस्था के महत्व को रेखांकित किया|

राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन द्वारा अनुमानित नवीनतम जी॰डी॰पी॰ के अनुसार, पहली तिमाही के बाद कोविडोत्तर भारतीय अर्थव्यवस्था रिकवरी मोड में रही है| नीति आयोग के उपाध्यक्ष, डॉ॰ राजीव कुमार ने कहा कि कोविड-19 के व्यवधानों के प्रभावों से अगली कुछ तिमाहियों में भारतीय अर्थव्यवस्था फिर वापसी करेगी| उन्होंने एक बहुत ही आशावादी विचार साझा भी किया कि अगले 20-30 वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था औसतन 7-8 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी| उन्होंने यह भी कहा कि 2047 तक भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकती है| सरकार भारत में व्यवसाय करने की सुगमता में सुधार करने, नवोन्मेषी इकोसिस्टम जैसे “ढांचागत सुधार” कर सकती है, जहां स्कूल के प्रत्येक छात्र की पहुँच अभिनव उपकरण और प्रचलन तक होगी| सरकार की आर्थिक तथा नीतिपरक कोशिशें वैश्विक आपूर्ति शृंखला में मौजूदा शून्यता से भारत को लाभ उठाने के लिए और अवसर के द्वार खोलने की होगी| इसी दौरान, सरकार स्टार्ट-अप्स, सूक्ष्म, लघु तथा मझोले उद्यमों तथा अन्य व्यवसायों और स्थानीय उत्पादों के लिए एक वैश्विक बाज़ार को बढ़ावा देगी|



आलेख – डॉ॰ लेखा एस॰ चक्रवर्ती, प्रोफ़ेसर एन॰आई॰पी॰एफ़॰पी॰ एवं शोध संकाय सहयोगी, लेवी इकोनॉमिक्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ बार्ड कॉलेज, न्यू यॉर्क

अनुवाद एवं वाचन – मनोज कुमार चौधरी

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