भारत ने आयोजित की पहली बड़ी एससीओ बैठक

भारत ने इस सप्ताह शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों के शासनाध्यक्षों की परिषद की 19वीं बैठक आयोजित की। ये यूरेशिया के साथ बढ़ते सहयोग और बहुपक्षीय सक्रियता में मौजूदा भरोसे का संकेत है। शंघाई सहयोग संगठन या एससीओ महत्वपूर्ण यूरेशियाई क्षेत्र के लिए एक मज़बूत स्वर बनकर उभरा है। भारत 2017 में एससीओ का पूर्ण सदस्य बना था और पहली बार नई दिल्ली में सदस्य देशों के शासनाध्यक्षों की बैठक आयोजित की गई। राष्ट्राध्यक्षों की परिषद के बाद शासनाध्यक्षों की परिषद एससीओ की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था है। क्षेत्र में जारी महामारी संकट के बावजूद इंटरनेट के माध्यम से इस बैठक का आयोजन किया गया। भारत ने आयोजन की अध्यक्षता की। भारत के उप राष्ट्रपति श्री एम. वैंकेया नायडू द्वारा ये बैठक आयोजित की गई। चीन, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज़बेकिस्तान, कज़ाकिस्तान और किर्गिज़ गणराज्य के प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल हुए। तुर्कमेनिस्तान विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुआ, एससीओ क्षेत्रीय आतंकरोधी संरचना के कार्यकारी निदेशक, एससीओ महासचिव, बेलारूस, ईरान, मंगोलिया और अफ़ग़ानिस्तान जैसे प्रेक्षक देशों के प्रतिनिधि, व्यापार परिषद के प्रमुख और एससीओ इंटरनेट बैंक गठबंधन के प्रमुख भी इस बैठक में शामिल हुए।

इस वर्चुअल बैठक के दौरान कोरोना विषाणु महामारी से पैदा हुई चुनौतियों से निपटने और इसके सामाजिक तथा आर्थिक प्रभावों के विषय में विशेष चर्चा की गई। आर्थिक क्षेत्र में सहयोग पर सभी प्रतिभागियों ने विशेष ध्यान दिया। सभी सदस्य देशों ने महामारी और क्षेत्र विशेष पर इसके प्रभावों का उल्लेख किया। उप राष्ट्रपति नायडू ने कहा कि भारत ने कोविड-19 महामारी का सामना बहादुरी से किया है। संभार तंत्र की बाध्यताओं के बावजूद भारत ने एससीओ सदस्य देशों सहित 150 से ज़्यादा देशों को चिकित्सा तथा अन्य सहायता उपलब्ध करवाई है। उन्होंने कहा कि भारत कम क़ीमत बनाने और आपूर्ति करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित अन्य वैश्विक संस्थानों में सुधार की माँग भी की गई।

प्रगति के लिए शांति को बेहद ज़रूरी शर्त मानते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि आतंकवाद और विशेष रूप से सीमा-पार आतंकवाद शांति के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती है। इससे निपटने के लिए सामूहिक प्रयास ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि देशों द्वारा आतंकवाद का इस्तेमाल अपनी नीतियों के रूप में करना एससीओ नियमों और भावना के कदम ख़िलाफ़ है।

भारत बहुत से क्षेत्रों में यूरेशिया के साथ अपनी सक्रियता बढ़ाने के लिए एससीओ को एक महत्वपूर्ण मंच मानता है। भौगोलिक रूप से नज़दीक होने के बावजूद सीधे ज़मीनी सम्पर्क ना होने की वजह से मध्य एशिया के साथ व्यापार संबंध संभावनाओं से बहुत कम रहे हैं। भारत द्वारा स्टार्टअप और नवाचार को लेकर विशेष कार्यकारी समूह के गठन के लिए कई प्रस्ताव पेश किए जा चुके हैं। एससीओ स्टार्टअप मंच बनाए जाने के साथ ही इन समूहों की वार्षिक बैठक का प्रस्ताव भी है। एससीओ स्वास्थ्य मंत्रियों की वार्षिक के अंतर्गत पारस्परिक चिकित्सा के लिए विशेषज्ञ समूह बनाए जाने का भी एक प्रस्ताव रखा गया। लघु, मझौले और छोटे उद्योगों के विकास के लिए भी लगातार ध्यान दिए जाने की ज़रूरत है। भारत इस क्षेत्र में अपने श्रेष्ठ अभ्यास साझे करने के लिए तैयार है और एससीओ एमएसएमई (MSME) डिजिटल केन्द्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव है।

भारत ने एससीओ आर्थिक विचार समूह की पहली संगोष्ठी का भी आयोजन किया। इस सहायता संघ ने दिल्ली कार्य योजना विकसित की जिसमें बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम लागू करने के दिशा-निर्देश बताए गए। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कार्य योजना को स्पीकर किए जाने का समर्थन किया।

युवा शक्ति पर ध्यान देते हुए भारत ने पहली बार एससीओ युवा वैज्ञानिक सभा का भी आयोजन किया और द्वि-वार्षिक तौर पर इसका आयोजन करवाने का प्रस्ताव रखा। साझी बौद्ध परम्परा के आधार पर एससीओ सदस्य देशों के बीच तीस नवंबर से एक ऑनलाइन प्रदर्शनी का भी आयोजन शुरू किया गया। भारत के राष्ट्रीय संग्राहलय द्वारा इस प्रदर्शनी का आयोजन करवाया गया। इसके अतिरिक्त दस क्षेत्रीय भारतीय साहित्यिक कृतियों का रूसी और चीनी भाषाओं में अनुवाद करवाया गया। एससीओ की बीसवीं वर्षगाँठ मनाने के लिए 2021 में एक एससीओ आहार उत्सव का भी आयोजन किया जाएगा।

इस बैठक में ये स्पष्ट उजागर किया गया कि भारत एससीओ के निरंतर विकास के लिए सहयोग हेतु प्रतिबद्ध है। प्रतिनिधिमंडलों ने भारत की अध्यक्षता की सराहना की। कज़ाकिस्तान परिषद का नया अध्यक्ष बना।

आलेख- डॉ. अतहर ज़फ़र, मध्य एशियाई सामरिक मामलों के विश्लेषक

अनुवाद- नीलम मलकानिया

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