प्रधानमंत्री ने कहा कि देश उद्यमियों और सम्पत्ति सृजकों के साथ है
भारत का आत्मनिर्भर होने का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है जब उद्योगपति सरकार द्वारा तैयार किए गए उद्योग के माहौल का पूरी तरह लाभ उठाएँगे। आज सरकार द्वारा विशेष आर्थिक और व्यापक पैकेज की मदद से कृषि और श्रम क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों की वजह से तैयार हुए सकारात्मक माहौल का औद्योगिक समुदाय को भरपूर उपयोग करना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत सप्ताहांत भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल या एसोचैम के स्थापना सप्ताह के दौरान अपने संबोधन में इन विषयों पर ज़ोर दिया। भारत के एक उच्च व्यापार संगठन की वर्चुअल बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश उद्यमियों और संपत्ति सृजकों के साथ है और उनकी प्रगति की कोई सीमा नहीं है।
लेकिन संपत्ति सृजन तभी संभव है जब युवा प्रतिभाओं और महिलाओं को शामिल करते हुए उद्योगों में सुधार किए जाएं और जब अपनी कार्य संस्कृति में मुनाफ़ा साझा करने वाली दुनिया की कोर्पोरेट व्यवस्था को शामिल किया जाए।
प्रधानमंत्री ने टाटा समूह के अध्यक्ष श्री रतन टाटा को एसोचैम एंटरप्राइज ऑफ दी सेंचुरी अवॉर्ड भी प्रदान किया। निश्चित रूप से ये सम्मान एक प्रतीक है और ये दर्शाने के लिए भी महत्वपूर्ण है कि भारत रोज़गार और सम्पंत्ति सृजन के लिए अपने उद्योगपतियों और कारोबारियों का साथ देता है।
अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने बड़े सुधारों के लिए दुनिया भर से निवेश आकर्षित करने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा महामारी के दौरान भी जब पूरी दुनिया निवेश पाने के लिए संघर्ष कर रही थी, भारत ने रिकॉर्ड विदेशी प्रत्यक्ष निवेश और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश दर्ज किया। अप्रैल से सितंबर के बीच देश में सालाना आधार पर विदेशी प्रत्यक्ष निवेश 13 प्रतिशत बढ़ा। इस बढ़त का श्रेय निर्माण क्षेत्र को सरकार द्वारा दिया जाने वाला सहयोग और भारत की प्रगति को लेकर व्याप्त आशा को दिया जा सकता है।
हालांकि इसके साथ ही कुछ कटु तथ्य भी जुड़े हैं जैसे कि भारतीय उद्योगों के शोध और विकास क्षेत्र में होने वाला निवेश अमरीका के मुक़ाबले बहुत कम है जहाँ क्षेत्र के कुल निवेश का सत्तर प्रतिशत हिस्सा अकेले निजी क्षेत्र से आता है।
प्रधानमंत्री ने देश में शोध और विकास में इतने कम निवेश को लेकर निराशा व्यक्त की। उन्होंने उद्योगपतियों से कृषि, रक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा, निर्माण, औषधि और परिवहन जैसे क्षेत्रों में शोध एवं विकास के लिए निवेश बढ़ाने के लिए कहा।
वास्तव में शोध एवं विकास के माध्यम से ही कारोबार में नई तकनीक इजाद की जा सकती है और लंबे समय के लिए मौजूदा प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सकता है। ये कहा जाता है कि जो क्षेत्र शोध और विकास में निवेश करता है वो तरक्की करते हुए लोगों को अधिक लाभ प्रदान कर सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी कंपनियों को इस संदर्भ में निश्चित धनराशि का निवेश ज़रूर करना चाहिए।
ये याद रखा जाना चाहिए कि शोध और विकास में अधिक निवेश इस दौर की ज़रूरत है क्योंकि दुनिया तेज़ी से औद्योगिक क्रांति की ओर बढ़ रही है जहाँ नई तकनीक के रूप में नई चुनौतियाँ सामने आएंगी।
शायद इसी वजह से प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि आज योजना बनाने और उसके अनुसार कार्य करने का समय है। उन्होंने कहा कि 27 साल बाद जब भारत की आज़ादी को सौ साल पूरे हो जाएंगे तब दुनिया भारत का पैनी दृष्टि से आकलन करेगी और ये हर भारतीय के सपने और निष्ठा की परीक्षा होगी।
इसी तरह उन्होंने भारतीय उद्योगों से अपनी क्षमता, प्रतिबद्धता और साहस का परिचय देने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता प्राप्त करना ही काफ़ी नहीं है बल्कि ये भी बहुत ज़रूरी है कि पूरा देश इस लक्ष्य को कब प्राप्त करता है।
ग्रामीण और शहरी विभाजन को दूर करने के लिए श्री मोदी ने सरकार को राज्य सरकारों, कृषि संगठनों और औद्योगिक संगठनों के साथ मिलकर काम करने की ज़रूरत पर बल देते हुए कहा कि इससे देश के जैविक उत्पादों, बेहतर अवसंरचना और बेहतर बाज़ारों को बढ़ावा मिलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वे चाहते हैं कि भारत की विकास गाथा दुनिया के लिए एक उदाहरण बने। लेकिन उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि सरकार इस दिशा में ज़रूरी सुविधाएँ उपलब्ध करवाते हुए सही माहौल तैयार कर सकती है और प्रोत्साहन देते हुए नीतियों में बदलाव ला सकती है। लेकिन फिर भी औद्योगिक साझेदार ही इस सहयोग को सफलता में बदल सकते हैं।
आलेख- शंकर कुमार, वरिष्ठ पत्रकार
अनुवाद- नीलम मलकानिया
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