प्रधामन्त्री मोदी अमरीका के लीजन ऑफ़ मेरिट अवॉर्ड से सम्मानित हुए

राजनय की दुनिया में प्रधानमंत्री मोदी की नवोन्मेषी, मौलिक तथा रचनात्मक पहल ने उन्हें अमरीका के “लीजन ऑफ़ मेरिट अवॉर्ड” के रूप में एक प्रतिष्ठा दिलाई है| अमरीका के राष्ट्रपति, डॉनल्ड ट्रम्प ने उन्हें यह पुरस्कार दिया|

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी सऊदी अरबिया, संयुक्त अरब अमारात, रूस, मालदीव तथा फ़िलिस्तीन व्यवस्था के सम्मान से पहले ही सम्मानित हो चुके हैं| ये सभी पुरस्कार वैश्विक मामलों में भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा निभाई गई भूमिका तथा व्यापक स्तर पर फैले संघर्ष, युद्ध, आतंकवादी गतिविधियों तथा कई अन्य चुनौतियों के बीच में शांति तथा स्थिरता को बढ़ावा देने में उनके अनवरत प्रयास के प्रति अंतर्राष्ट्रीय स्वीकृति है|

भारत-अमरीका की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका के कारण उन्हें “लीजन ऑफ़ मेरिट अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया है|जबकि, भारत तथा अमरीका के बीच की रणनीतिक द्विपक्षीय साझेदारी पूर्व राष्ट्रपति, बिल क्लिंटन की मार्च 2000 में भारत की यात्रा तथा भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा एक विज़न स्टेटमेंट पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद बहुत अधिक उन्नत रही है, हालांकि, दशकों से कई बाधाएँ तथा गड़बड़ियाँ होती रही हैं|

जब प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बी॰जे॰पी॰ ने विशाल निर्वाचकीय जीत हासिल की तथा भारत के प्रधानमंत्री बने, तब कई विश्लेषकों ने इस रणनीतिक साझेदारी पर संदेह व्यक्त किया था|

जो भी परिणाम सामने आए वे बहुत अधिक प्रभावशाली रहे हैं| प्रधानमंत्री मोदी ने जल्द ही राष्ट्रपति, बराक ओबामा के साथ एक सकारात्मक संपर्क स्थापित किया, जिस कारण उन्हें वाशिंगटन आने का आमंत्रण मिला और फिर तत्कालीन करिश्माई अमरीकी राष्ट्रपति के साथ उन्होंने निकटतम व्यक्तिगत संबंध स्थापित किए| इस कारण दो लोकतंत्रों के बीच के संबंध काफ़ी गहरे और अत्यधिक विस्तृत हुए| 2015 में गणतन्त्र दिवस के समारोहों में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति ओबामा की भारत यात्रा, प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी शिखर सम्मेलन स्तरीय वार्ता तथा द्विपक्षीय सम्बन्धों को और सशक्त बनाने के लिए कई समझौतों पर किए गए हस्ताक्षर अमरीका के साथ भारत के सम्बन्धों के इतिहास में उज्ज्वल समय की तरह हैं|

जब नवंबर 2016 में डॉनल्ड ट्रम्प अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव में विजयी हुए, तब संदेहवादियों द्वारा अमरीका के साथ भारत के सम्बन्धों में कठिन समय का पूर्वानुमान लगाया गया था| अमरीका के इतिहास में पहली बार एक कम राजनीतिक अनुभव तथा वॉशिंगटन के काम करने की वास्तविक जानकारी से अनभिज्ञ एक व्यावसायिक हस्ती ने व्हाइट हाउस में प्रवेश किया| उन्हें एक मनमौजी, अस्थिर और हठी व्यक्ति माना गया था| वे विदेशी नेताओं तथा विश्व के मामलों में प्रायः खुलकर बोलने वाले रहे हैं| श्री ट्रम्प पूर्व के अमरीकी प्रशासन द्वारा अंगीकार किए गए विदेश संबंधी बहुत से नीति निर्णयों के साथ प्रायः टकराव की स्थिति में रहे हैं|

फिर भी प्रधानमंत्री मोदी कुशलता से अमरीका के नए राष्ट्रपति के साथ अपने सम्बन्धों को निभाने में सफल रहे| उनके इस व्यवहार ने भारत तथा अन्य देशों के विश्लेषकों को आश्चर्यचकित किया| जब प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति, डॉनल्ड ट्रम्प के साथ शिखर सम्मेलन स्तर की पहली बैठक करने वॉशिंगटन गए, तब बहुत से लोग इस बैठक पर अत्यधिक उत्सुकता से नज़र जमाये हुए थे| इस यात्रा का परिणाम बहुत अधिक सकारात्मक रहा| जबकि, नैटो के सदस्यों, जापान तथा दक्षिण कोरिया समेत अमरीका के गठबंधन सहयोगियों के साथ राष्ट्रपति ट्रम्प दृढ़ता से वार्ता करते थे| ऐसा करते हुए वे भारत के साथ अपने देश की रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के प्रति दृढ़ प्रतीत होते थे|

कई अवसरों पर, राष्ट्रपति ट्रम्प ने व्यापार तथा निवेश के मुद्दों पर भारत के साथ सख़्ती दिखाई, फिर भी प्रधानमंत्री मोदी ने उनके साथ अपने सम्बन्धों में एक सकारात्मकता को बनाए रखा तथा केवल कुछेक वर्ष पहले ट्रम्प प्रशासन के साथ रक्षा तथा सुरक्षा सम्बन्ध अकल्पनीय स्तर तक गहरे हुए हैं|

राष्ट्रपति ट्रम्प भारत के कठोर पड़ोसी से अवगत थे, जहां भारत को आतंकवाद के पोषक, पाकिस्तान तथा एक आक्रामक उत्तरी पड़ोसी, चीन के साथ निपटना पड़ रहा था| दोनों देश एक नापाक मंसूबे के साथ एकजुट हैं| ट्रम्प प्रशासन ने चीन की दादागिरी को देखकर उचित ही विरोध किया तथा प्रतिक्रिया स्वरूप अविश्वसनीय और धोखेबाज़ पाकिस्तान की सहायता करना बंद कर दिया, जो निश्चित रूप से भारत के हितों के लिए लाभकारी साबित हुए|

राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ साझा रूप से आयोजित की गई प्रधानमंत्री मोदी की ह्यूस्टन रैली तथा अहमदाबाद की रैली अमरीका के साथ भारत की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी तथा एक नई महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में विश्व के मामलों में भारत की भूमिका की सफलता की गवाही है| इस प्रकार देखें तो सचमुच में प्रधानमंत्री मोदी लीजन ऑफ़ मेरिट अवॉर्ड के योग्य हैं|



आलेख – प्रोफ़ेसर चिंतामणि महापात्रा, रेक्टर, जे॰एन॰यू॰

अनुवाद एवं वाचन – मनोज कुमार चौधरी

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