भारत-श्रीलंका की साझेदारी का आधार आपसी संवेदनशीलता
भारत के विदेश मंत्री, डॉ॰ एस॰ जयशंकर श्रीलंका के अपने प्रतिपक्ष के आमंत्रण पर कोलंबो की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर थे| यह 2021 में विदेश मंत्री की पहली विदेश यात्रा तो थी ही साथ ही यह नए वर्ष में किसी विदेशी उच्च पदधारी की श्रीलंका की पहली यात्रा थी| डॉ॰ एस॰ जयशंकर ने राष्ट्रपति, गोठभय राजपक्षे, प्रधानमंत्री, महिंदा राजपक्षे, विदेश मंत्री, दिनेश गुनावर्धने, मत्स्योद्योग मंत्री, डगलस देवानन्दा, पूर्व प्रधानमंत्री, रनिल विक्रमसिंघे, विपक्षी नेता, सजीथ प्रेमदासा, संपदा आवास और सामुदायिक आधारभूत संरचना राज्य मंत्री, जीवन ठोंडमान तथा पिछड़े ग्रामीण क्षेत्र विकास राज्य मंत्री, सथासिवन वियलेंदिरन, तमिल नेता तथा श्रीलंका के व्यावसायिक समुदाय के साथ मुलाक़ात की|
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय सम्बन्धों के आड़े आ रही विशेष चुनौतियों को संबोधित करने की प्रक्रियाओं में सुविधा पहुंचाना तथा सम्पूर्ण मुद्दों पर चर्चा करना था| दोनों देशों के बीच के समझौतों तथा सहमति पत्रों के क्रियान्वयन में हो रही देरी मुख्य मुद्दों में से एक मुद्दा है| इस यात्रा के दौरान, विदेश मंत्री ने श्रीलंका की आर्थिक रिकवरी में गति प्रदान करने तथा परस्पर आर्थिक हित के लिए कनेक्टिविटी, ऊर्जा तथा मूलभूत संरचना के क्षेत्रों की परियोजनाओं पर चल रही चर्चा से इन परियोजनाओं को जल्द क्रियान्वित करने का आह्वान किया| श्रीलंका के विदेश मंत्री के साथ एक बैठक के बाद, डॉ॰ जयशंकर ने दवा निर्माण के लिए विशेष क्षेत्र तथा पर्यटन में विशेष रूप से निवेश की विशाल संभावनाओं पर बातचीत की|
भारतीय विदेश मंत्री ने कोलंबो बन्दरगाह के ईस्ट कंटेनर टर्मिनल (ई॰सी॰टी॰) के विकास पर भी चर्चाएं कीं| मई 2019 में, श्रीलंका के पूर्व शासन के तहत ई॰सी॰टी॰ को विकसित करने के लिए श्रीलंका, भारत तथा जापान के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता हुआ था| कोलंबो बन्दरगाह पर व्यवसाय का 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा भारतीय पोतान्तरण से आता है| इस टर्मिनल के विकास में भारत का वास्तविक हित यही है|
श्रीलंका के आम लोगों के जीवन को उन्नत बनाने में अत्यधिक योगदान सामाजिक, सामुदायिक तथा मानव संसाधन क्षेत्र में भारत की विकास साझेदारी का है| श्रीलंकाई नेताओं के साथ बातचीत के दौरान, डॉ॰ जयशंकर ने कृषि, प्रौद्योगिकी, कौशल तथा शहरी विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना के क्षेत्रों में श्रीलंका के साथ विकास साझेदारी को जारी रखने संबंधी भारत की इच्छा से नेताओं को अवगत कराया| ध्यातव्य है कि व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्रों को श्रीलंका की सरकार ने महत्वपूर्ण माना है| समुद्र तथा सुरक्षा की बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए श्रीलंका की योग्यताओं को बढ़ाने के लिए भारत की तैयारियों के प्रति भी मंत्री ने आश्वस्त किया|
डॉ॰ जयशंकर ने कोविड-19 महामारी के दौरान श्रीलंका के साथ सहयोग करने की अपनी वचनबद्धता को कोविडोत्तर काल में भी भारत से कोविड-19 के टीके देने के श्रीलंका के आग्रह के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया देकर भारत के इरादे को संप्रेषित किया|
मछुआरों के मुद्दे तथा तमिलों के पुनर्वास जैसे भारत-श्रीलंका के द्विपक्षीय सम्बन्धों के दो महत्वपूर्ण लंबित मुद्दों को भी भारतीय मंत्री ने उठाया| श्रीलंका के मत्स्योद्योग मंत्री, डगलस देवानन्दा के साथ मत्स्योद्योग पर साझा कार्यकारी समूह की 30 दिसंबर 2020 को हुई गत बैठक के बाद मत्स्योद्योग क्षेत्र में श्रीलंका के साथ भारत के सहयोग की समीक्षा डॉ॰ जयशंकर ने की| श्रीलंकाई अधिकारियों द्वारा पकड़े गए भारतीय मछुआरों की जल्द रिहाई का निवेदन भी किया गया|
श्रीलंका की मौजूदा व्यवस्था के कुछ सदस्य श्रीलंका के संविधान के 13वें संशोधन को रद्द करने का समर्थन कर रहे हैं| यह संशोधन प्रांतीय परिषदों के लिए सत्ता का हस्तांतरण किए जाने का प्रावधान करता है| 1987 में भारत-श्रीलंका संधि पर हस्ताक्षर के दौरान इस संशोधन की सिफ़ारिश की गई थी तथा बाद में श्रीलंकाई संसद ने इसे पारित किया| इसके बाद, भारत श्रीलंका की एकता, स्थिरता तथा क्षेत्रीय अखंडता के प्रति वचनबद्ध है| नई दिल्ली इस पर दृढ़ता से विश्वास करता है कि श्रीलंका की सरकार को 13वें संशोधन के क्रियान्वयन तथा सत्ता के सार्थक हस्तांतरण के प्रति वचनबद्ध रहना चाहिए|
क्षेत्रीय तथा अतिरिक्त क्षेत्रीय शक्तियों द्वारा कोलंबो की विस्तारित सहयोगात्मक साझेदारी के पीछे के इरादे को लेकर श्रीलंका में बड़े स्तर पर चल रही अटकलबाज़ियों तथा क्षेत्र के भू-रणनीतिक घटनाक्रमों की पृष्ठभूमि में, भारत के विदेश मंत्री की यह यात्रा महत्वपूर्ण थी| इससे यह संदेश गया कि भारत श्रीलंका का हमेशा एक अवलंबन योग्य साझेदार तथा एक भरोसेमंद मित्र रहेगा और परस्पर विश्वास, हित, सम्मान तथा संवेदनशीलता पर आधारित अपने सम्बन्धों को सशक्त बनाता रहेगा|
आलेख – डॉ॰ गुलबिन सुलताना, श्रीलंका मामलों की विश्लेषक
अनुवादक एवं वाचक – मनोज कुमार चौधरी
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